बांग्लादेश की संसद ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध का समर्थन किया
बांग्लादेश की संसद ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी पर प्रतिबंध का समर्थन किया
ढाका, आठ अप्रैल (भाषा) बांग्लादेश की संसद ने बुधवार को उस विधेयक को पारित कर दिया, जिसमें अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी को प्रतिबंधित करने के मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती अंतरिम सरकार के आदेश का समर्थन किया गया है।
संसद में विधेयक पेश करने वाले गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने अवामी लीग का नाम लिये बिना कहा, “यह विधेयक नरसंहार में शामिल एक आतंकवादी संगठन पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित है। यह पिछले आतंकवाद-विरोधी अधिनियम में संशोधन करता है।”
अहमद ने कहा कि नया कानून निर्वाचन आयोग में अवामी लीग के पंजीकरण का निलंबन जारी रखेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि पार्टी पर “नरसंहार” में शामिल होने के लिए मुकदमा चलाया जाए।
प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) से जुड़े सत्ता पक्ष के सदस्यों ने विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया, जिसमें अंतरिम सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश को बरकरार रखा गया है, जबकि पिछले आतंकवाद-विरोधी कानून में संशोधन किया गया है।
इससे पहले, यूनुस सरकार ने एक अध्यादेश के जरिये आतंकवाद-विरोधी अधिनियम में संशोधन किया था। संशोधित अधिनियम में कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति या संगठन आतंकवादी गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो सरकार उसे प्रतिबंधित कर सकती है।
अध्यादेश लागू होने के तुरंत बाद अंतरिम सरकार ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया था और उसे चुनावों में हिस्सा लेने से रोक दिया था।
नया कानून प्रतिबंधित पार्टी द्वारा या उसकी ओर से या उसके समर्थन में प्रेस विज्ञप्तियों के प्रकाशन या मुद्रण तथा मुख्यधारा या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके किसी भी तरह का प्रचार-प्रसार करने तथा उस पार्टी के समर्थन में रैली आयोजित करने या सार्वजनिक भाषण देने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाता है।
मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी के अध्यक्ष शफीकुर रहमान ने विधेयक की समीक्षा करने के लिए और समय मांगा। उन्होंने कहा कि सांसदों को विधेयक की प्रति कुछ ही मिनट पहले मिली थी और चूंकि, “यह कानून संवेदनशील प्रकृति का है, इसलिए हमें इसे पढ़ने और समझने के लिए समय दिया जाना चाहिए।”
जवाब में गृह मंत्री ने कहा कि विपक्षी नेता को याद करना चाहिए कि जमात-ए-इस्लामी और यूनुस के आशीर्वाद से पिछले साल गठित छात्रों के नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के उसके “दोस्तों” ने 2024 में एक आंदोलन शुरू किया था।
उन्होंने कहा, “इसी आधार पर संशोधित आतंकवाद-विरोधी अधिनियम के तहत अवामी लीग की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।”
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रमुख सहित संयुक्त राष्ट्र के कई अधिकारियों ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाने के लिए यूनुस सरकार की आलोचना की थी और इसे संगठन बनाने और शांतिपूर्ण सभा करने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध बताया था।
संविधान मामलों के विशेषज्ञ स्वाधीन मलिक ने कहा कि बांग्लादेश “इतिहास में दूसरा ऐसा देश है”, जिसने उस पार्टी पर प्रतिबंध लगाया है, जिसने उसकी आजादी के आंदोलन का नेतृत्व किया था।
अवामी लीग के कट्टर आलोचक मलिक ने कहा कि अवामी लीग जैसी प्रमुख पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना एक स्वस्थ लोकतंत्र में “वांछनीय नहीं” है।
जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और बांग्लादेश छोड़ भारत चली गई थीं।
बांग्लादेश के एक न्यायाधिकरण ने हसीना की गैरमौजूदगी में हुई एक विवादित सुनवाई में विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के प्रयासों को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री को मानवता के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई है।
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

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