‘चीन, ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया’
‘चीन, ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का हथियार के रूप में इस्तेमाल किया’
(सागर कुलकर्णी)
वाशिंगटन, 12 अप्रैल (भाषा) चीन और ईरान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए अमेरिका को घेरने की कोशिश की है। दोनों देशों ने वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर दबाव डालकर और वाणिज्यिक संबंधों का रणनीतिक लाभ उठाकर अमेरिका के खिलाफ आर्थिक बढ़त हासिल करने का प्रयास किया है। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की एक खबर में यह कहा गया है।
खबर में पिछले साल चीन द्वारा अमेरिका को दुर्लभ खनिज निर्यात सीमित करने और ईरान द्वारा हाल में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का हवाला दिया गया है, जिसके कारण दुनिया भर में तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इसे आर्थिक युद्ध के खेल में अमेरिका को मात देने वाले प्रतिद्वंद्वियों के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
खबर में कहा गया, ‘एक समय वाशिंगटन इस प्रकार के आर्थिक युद्ध पर लगभग एकाधिकार रखता था, और मनमानी करने वाले देशों को डॉलर का इस्तेमाल करने से रोककर या सिलिकॉन वैली की सबसे उन्नत तकनीकों तक पहुंच से वंचित करके उन्हें दंडित करता था।’
खबर में सीनेट वित्त समिति के वरिष्ठ डेमोक्रेट, ओरेगन के सीनेटर रॉन वायडेन के हवाले से कहा गया है कि अमेरिकी वित्त विभाग ने युद्ध से पहले संघर्ष के संभावित ऊर्जा बाजार परिणामों का कोई विश्लेषण नहीं किया था।
‘द वाशिंगटन पोस्ट’ के अनुसार, वाणिज्यिक संबंध वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित दबाव बिंदुओं के रूप में उभरे हैं, जैसा कि कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका-चीन संबंधों में आई उथल-पुथल के दौरान देखा गया था।
खबर में कहा गया है कि इसके जवाब में, अमेरिका, चीन और यूरोप सभी आवश्यक वस्तुओं के घरेलू उत्पादन में निवेश करके अपनी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
अमेरिकी आर्थिक युद्ध के दृष्टिकोण के इतिहास पर आधारित पुस्तक ‘चोकपॉइंट्स’ के लेखक एडवर्ड फिशमैन ने कहा, ‘वैश्विक अर्थव्यवस्था को 1990 के दशक के अनुकूल वातावरण के लिए तैयार किया गया था, जब हमने यह मान लिया था कि चीन और रूस हमारे मित्र होंगे। लेकिन हम भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के तीव्र दौर में जी रहे हैं।’
फिशमैन ने अखबार से कहा, ‘यह प्रक्रिया तब तक चलती रहेगी जब तक कि एक नयी वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण नहीं हो जाता।’
भाषा आशीष नरेश
नरेश

Facebook


