विशाल महासागरों में कोरल रीफ़ आपस में जुड़े, उनके अस्तित्व के लिए यह जरूरी है : अध्ययन

विशाल महासागरों में कोरल रीफ़ आपस में जुड़े, उनके अस्तित्व के लिए यह जरूरी है : अध्ययन

विशाल महासागरों में कोरल रीफ़ आपस में जुड़े, उनके अस्तित्व के लिए यह जरूरी है : अध्ययन
Modified Date: April 22, 2026 / 03:51 pm IST
Published Date: April 22, 2026 3:51 pm IST

( केट मेरी क्विग्ले – जेम्स कुक यूनिवर्सिटी और एलिस तेरेसे जी डेहॉन्ट – मेमोरियल यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूफाउंडलैंड )

मेलबर्न, 22 अप्रैल (द कन्वरसेशन) एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरल रीफ़़ केवल अलग-अलग समुद्री संरचनाएं नहीं हैं, बल्कि वे विशाल महासागरीय क्षेत्रों में एक जटिल और आपस में जुड़े नेटवर्क के रूप में कार्य करती हैं, जो उनके अस्तित्व और पुनर्जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सिडनी से लगभग 700 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित लॉर्ड होवे आईलैंड घने जंगलों से घिरा एक दूरस्थ द्वीप है और दुनिया के सबसे दक्षिणी कोरल रीफ़ प्रणाली का हिस्सा है। हालांकि यह रीफ़ उतना प्रसिद्ध नहीं है जितना ग्रेट बैरियर रीफ़ है, लेकिन शोध के अनुसार यह पूरे दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में कोरल रीफ़ को जोड़ने वाले “पर्यावरणीय नेटवर्क” में अहम भूमिका निभाता है।

अध्ययन में बताया गया है कि कोरल रीफ़ के बीच “कनेक्टिविटी” यानी जैविक जुड़ाव उनके अस्तित्व की आधारशिला है। जब समुद्री गर्मी की लहरें, तूफान या अन्य प्राकृतिक आपदाएं रीफ़ को नुकसान पहुंचाती हैं, तब इन्हीं कनेक्शन के जरिए नए कोरल लार्वा दूर-दराज से आकर रीफ़ को फिर से जीवित करते हैं। यदि यह नेटवर्क टूट जाए, तो कई रीफ़ स्वयं को पुनः स्थापित करने में असमर्थ हो जाते हैं।

शोधकर्ताओं ने 2011 से 2024 के बीच समुद्री धाराओं के मॉडल का उपयोग करते हुए लगभग 850 रीफ़ में कोरल लार्वा की आवाजाही का अध्ययन किया। इसमें कोरल सी, न्यू कैलेडोनिया, ग्रेट बैरियर रीफ़ और लॉर्ड होवे आइलैंड जैसे क्षेत्र शामिल थे।

अध्ययन में पाया गया कि कोरल लार्वा समुद्र की सतह पर कई हफ्तों तक बहते रहते हैं और धाराओं के सहारे सैकड़ों से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर सकते हैं। इस प्रक्रिया से विभिन्न रीफ़ एक-दूसरे को लगातार सहयोग करते रहते हैं।

शोध में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क में कुछ ही रीफ़ “हब” की तरह काम करते हैं—जहां लार्वा आते भी हैं और वहां से आगे अन्य रीफ़ तक भी पहुंचते हैं। इन रीफ़ के खत्म होने से पूरा समुद्री नेटवर्क टूट सकता है।

विशेष रूप से कोरल सी क्षेत्र को एक महत्वपूर्ण “ब्रिज” के रूप में पहचाना गया है, जो दक्षिणी ग्रेट बैरियर रीफ़ को न्यू कैलेडोनिया और अन्य दूरस्थ रीफ़ से जोड़ता है।

लॉर्ड होवे आइलैंड को अध्ययन में एक संभावित “रेफ्यूजियम” यानी ऐसा सुरक्षित क्षेत्र बताया गया है जहां कोरल अपेक्षाकृत गर्म होते महासागरों में भी जीवित रह सकते हैं। हालांकि इसकी भौगोलिक अलगाव की स्थिति साफ बताती है कि यह अन्य रीफ़ से अधिक जुड़ा नहीं है। इसका अर्थ है कि यह क्षेत्र स्वयं सुरक्षित हो सकता है, लेकिन आसपास के रीफ़ से इसे मिलने वाला प्राकृतिक पुनर्संयोजन सीमित है।

अध्ययन में यह भी पाया गया कि गर्मी के प्रति प्राकृतिक रूप से अधिक सहनशील रीफ़ अपेक्षाकृत सीमित संख्या में ही अन्य रीफ़ को लार्वा भेजते हैं। वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि “असिस्टेड जीन फ्लो” जैसी तकनीकों के माध्यम से गर्मी के प्रति सहिष्णु कोरल को कमजोर रीफ़ तक पहुंचाकर उनकी मजबूती बढ़ाई जा सकती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि जलवायु परिवर्तन, बड़े पैमाने पर मछली पकड़ने और प्रदूषण इन समुद्री कनेक्टिविटी मार्गों पर गंभीर दबाव डाल रहे हैं। लॉर्ड होवे राइस और दक्षिण तस्मान सागर जैसे क्षेत्र इन “लार्वा सुपरहाइवे” का हिस्सा हैं, और ये क्षेत्र पहले से ही खतरे में हैं।

अध्ययन का निष्कर्ष है कि समुद्री संरक्षित क्षेत्रों को अलग-अलग इकाइयों के रूप में नहीं बल्कि एक जुड़े हुए नेटवर्क के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही, ऑस्ट्रेलिया और प्रशांत द्वीप देशों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग इस नेटवर्क की सुरक्षा के लिए आवश्यक है, क्योंकि ये समुद्री कनेक्शन किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं हैं।

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि इन अदृश्य समुद्री “सुपरहाइवे” को सुरक्षित नहीं रखा गया, तो कोरल रीफ़ की प्राकृतिक पुनर्जीवन क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे पूरे क्षेत्रीय समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के अस्तित्व पर खतरा मंडरा सकता है।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा नरेश

नरेश


लेखक के बारे में