नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) दिल्ली सरकार प्रदूषण मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के चलन को तेज करने के लिए इस साल के अंत तक लगभग 7,000 नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बना रही है। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों के अनुसार, यह पहल वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। चार्जिंग अवसंरचना के साथ-साथ सरकार बसों के बेड़े का विस्तार कर सार्वजनिक परिवहन को भी मजबूत करने की तैयारी में है।
मौजूदा ईवी नीति मार्च के अंत में समाप्त हो जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इस समय सीमा तक एक संशोधित नीति को अंतिम रूप देकर अधिसूचित किए जाने की संभावना है।
प्रस्तावित परिवहन योजना के तहत, सरकार का लक्ष्य 2026 के अंत तक 2,000 से अधिक बसें जोड़ने का है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने शहर के लिए कुल 11,000 बसों की आवश्यकता बताई। वर्तमान में दिल्ली में 5,245 बसें चल रही हैं, जिनमें 3,377 इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘अधिकारियों के साथ महीने-वार कार्ययोजना साझा की गई है। इस साल 2,468 नयी बसें जोड़ने का लक्ष्य है। हालांकि, साल के दौरान कुछ पुरानी सीएनजी बसों को हटाया जा सकता है, जिसका असर अभी कुल संख्या पर पड़ना बाकी है।’’
इलेक्ट्रिक वाहनों के चलन को समर्थन देने के लिए सरकार की प्रदूषण नियंत्रण योजना में पूरे शहर में 7,000 चार्जिंग स्टेशन जोड़ना शामिल है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर तक दिल्ली में 8,849 ईवी चार्जिंग स्टेशन थे, जबकि अनुमानित आवश्यकता 36,150 की है। इस लिहाज से वर्तमान में 27,301 स्टेशनों की कमी है।
अधिकारियों ने बताया कि 7,000 नए स्टेशनों के जुड़ने से कुल संख्या 15,849 तक पहुंचने की उम्मीद है। ये चार्जिंग स्टेशन रैपिड रेल और दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर स्थित हैं और इन्हें बिजली वितरण कंपनियों द्वारा स्थापित किया गया है।
उन्होंने बताया कि सरकार सड़कों पर लगने वाले जाम से निपटने के लिए दिल्ली यातायात पुलिस के साथ भी काम कर रही है।
अधिकारियों ने बताया कि यातायात पुलिस ने यातायात पुलिस ने जाम वाले 62 इलाकों की पहचान की है और सुधार के लिए 215 जरूरी उपायों को चिन्हित किया है। इनमें से 83 सुधार कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि 46 कार्यों को सड़क निर्माण या अन्य विकास योजनाओं के चलते फिलहाल ‘मुमकिन’ नहीं माना गया है।
उन्होंने बताया कि लंबित 86 कार्यों में से 50 को अगले एक से छह महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
वाहनों को लाइसेंस देने और उनके पंजीकरण के लिए तैयार किए गए सरकारी वेब पोर्टल पर वर्ष 2023 में इसकी शुरुआत के बाद से कैब सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों, डिलीवरी सेवा प्रदाताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से अब तक लगभग सात लाख वाहन पंजीकृत कराए जा चुके हैं।
भाषा
सुमित संतोष
संतोष