अमेरिका में डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से अरबों डॉलर के शुल्क वापस करने की मांग की

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से अरबों डॉलर के शुल्क वापस करने की मांग की

अमेरिका में डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप प्रशासन से अरबों डॉलर के शुल्क वापस करने की मांग की
Modified Date: February 24, 2026 / 11:24 am IST
Published Date: February 24, 2026 11:24 am IST

वाशिंगटन, 24 फरवरी (एपी) अमेरिका के उच्च सदन ‘सीनेट’ में डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसद सरकार से लगभग 175 अरब अमेरिकी डॉलर के शुल्क की रिफंड (धनराशि वापस करना) प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं।

अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि ये शुल्क राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अवैध तरीके से जारी आदेशों के आधार पर लिए गए थे।

ओरेगन प्रांत से सीनेटर रॉन वायडेन, मैसाचुसेट्स से एड मार्की और न्यू हैम्पशायर से जीन शाहीन सोमवार को एक विधेयक पेश करने वाले हैं। इस विधेयक में यह प्रावधान प्रस्तावित है कि अमेरिका के सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग को 180 दिन के भीतर शुल्क लौटाना होगा और इस राशि पर ब्याज भी देना होगा।

इस विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि रिफंड देने में छोटे व्यवसायों को प्राथमिकता दी जाए और आयातकों, थोक विक्रेताओं और बड़ी कंपनियों को अपने ग्राहकों तक यह रिफंड पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।

वायडेन ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप के अवैध शुल्क ने पहले ही अमेरिकी परिवारों, छोटे व्यवसायों और विनिर्माताओं को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाया है, जो ट्रंप द्वारा एकाएक लगाए गए शुल्कों से लगातार प्रभावित हुए हैं।’’

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस समस्या को दूर करने का “सबसे महत्वपूर्ण व पहला कदम” यह होगा कि छोटे व्यवसायों व विनिर्माताओं को जल्द से जल्द रिफंड दिया जाए।

इस विधेयक के कानून बनने की संभावना कम है, लेकिन यह दर्शाता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने ट्रंप प्रशासन पर सार्वजनिक रूप से दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

शाहीन ने कहा कि शुल्कों के कारण हुई किसी भी क्षति की पूर्ति तभी हो सकती है जब “राष्ट्रपति ट्रंप अवैध रूप से वसूले गए शुल्क वापस करें, जिन्हें अमेरिकियों को मजबूरन देना पड़ा।”

मार्की ने भी इस बात पर जोर दिया कि छोटे व्यवसायों के पास “नाममात्र संसाधन ही” होते हैं और “रिफंड प्रक्रिया कंपनियों के लिए बेहद कठिन और समय लेने वाली” हो सकती है।

ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि उसके हाथ बंधे हैं, क्योंकि ऐसा कोई भी भुगतान अदालत में चल रही सुनवाई पर असर डाल सकता है।

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने पिछले शुक्रवार को छह-तीन के बहुमत से फैसला दिया कि ट्रंप का आपातकालीन शक्तियों के कानून (आईईईपीए, 1977) के तहत दूसरे देशों पर आयात शुल्क लगाने का कदम वैध नहीं था। इस कानून के तहत राष्ट्रपति के पास आयात पर कर लगाने का अधिकार नहीं था।

अमेरिकी सीमा शुल्क एजेंसी ने दिसंबर तक आईईईपीए के तहत जारी शुल्क आदेशों के तहत कुल 133 अरब डॉलर वसूल किए हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस राशि का रिफंड आयातकों को मिल सकता है, लेकिन आम लोगों को यह रिफंड मिलना मुश्किल है, क्योंकि कंपनियों ने बढ़े हुए शुल्क का बोझ कीमत वृद्धि के रूप में उपभोक्ताओं पर डाल दिया था।

एपी खारी वैभव मनीषा

मनीषा


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