हाजी ओमेरान (इराक), 16 मार्च (एपी) युद्ध के कारण लंबे समय से बंद रही सीमा खुलने के बाद रविवार को दर्जनों ईरानी नागरिक सस्ती खाद्य सामग्री खरीदने, इंटरनेट का उपयोग करने, परिजनों से संपर्क साधने और काम की तलाश में उत्तरी इराक में दाखिल हुए।
यात्रियों ने बताया कि लगातार हो रहे हवाई हमलों और खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने ईरान में जीवन बेहद कठिन बना दिया है।
इराक के कुर्द क्षेत्र से माल से लदे ट्रक हाजी ओमेरान सीमा चौकी के रास्ते ईरान की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे ईरान में बढ़ती कीमतों से जूझ रहे लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध शुरू होने से पहले भी ईरानी कुर्द अक्सर इराकी कुर्दिस्तान में आते-जाते रहे हैं। दोनों क्षेत्रों के बीच पारिवारिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध गहरे हैं तथा खुली सीमा के कारण व्यापार और आवागमन नियमित रहा है। अब युद्धग्रस्त क्षेत्र में ईरानियों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का अहम जरिया इराक का कुर्द क्षेत्र बन गया है।
ईरान की ओर सामान लेकर जा रहे ट्रक चालक खिदेर चोमानी ने कहा, ‘‘जब यह सीमा बंद थी, तब इसका असर गरीबों, अमीरों और मजदूरों सभी पर पड़ा।’’
क्षेत्रीय सैन्य तनाव बढ़ने के बाद इस सीमा को बंद कर दिया गया था। इराकी कुर्द प्रशासन लंबे समय से अपने ईरानी समकक्षों द्वारा इसे फिर से खोलने का इंतजार कर रहा था।
एपी से बात करने वाले लगभग सभी ईरानी कुर्दों ने अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध करते हुए कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर है और उन्हें संदेह है कि ईरानी खुफिया एजेंसियां मीडिया से बात करने वालों पर नजर रखती हैं।
उन्होंने दावा किया कि कई ईरानी सैन्य ठिकाने, खुफिया कार्यालय और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठान हमलों में नष्ट हो गए हैं। बमबारी के कारण सुरक्षा बलों की गतिविधियां भी सीमित हो गई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, कई सुरक्षाकर्मी सरकारी इमारतों से दूर रहकर स्कूलों और अस्पतालों जैसे नागरिक ठिकानों में शरण ले रहे हैं या फिर कार्यालयों में रिपोर्ट करने के बजाय वाहनों में ही घूमते रहते हैं।
ईरान के पिरानशहर शहर की एक कुर्द महिला रविवार को अपने रिश्तेदारों से संपर्क करने और जरूरी सामान खरीदने के लिए सीमा पार कर आई। उसने बताया कि वह 15 किलोमीटर की यात्रा करके यहां पहुंची।
उसने कहा, ‘‘ मैं यहां फोन करने आई हूं। ईरान के अधिकतर हिस्सों में इंटरनेट नहीं है। पिछले 16 दिनों से मेरे रिश्तेदारों को मेरी कोई खबर नहीं मिली है और वे चिंतित हैं।’’
महिला ने बताया कि देशभर में इंटरनेट बाधित होने के कारण कई ईरानी इराकी सिम कार्ड खरीदते हैं और सीमा के पास जाकर विदेश में रह रहे अपने परिजनों और दोस्तों से संपर्क करते हैं।
वह सीमा के पास स्थित बाजार में अपने शहर पिरानशहर की तुलना में कम कीमत पर चावल और खाने का तेल जैसे जरूरी सामान खरीदने गई थी। उसके अनुसार, युद्ध के कारण महंगाई बढ़ने से ईरान में इन बुनियादी वस्तुओं की कीमतें बहुत अधिक हो गई हैं।
उसने कहा, “ईरान में हालात बहुत खराब हैं। लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे, चीजें महंगी हैं और लोग घरों से निकलना नहीं चाहते।”
करीब आधे घंटे बाद वह दो प्लास्टिक बैग में सामान लेकर जल्दी-जल्दी वापस ईरान लौट गई। उसने बताया कि उसके बच्चे घर पर उसका इंतजार कर रहे हैं।
इसी दौरान काली शॉल में लिपटी एक बुजुर्ग महिला बारिश में अकेले सीमा पार करती दिखाई दी। उसने बताया कि वह ईरान के पश्चिम अजरबैजान प्रांत के सरदश्त से आई है और इराकी कुर्द क्षेत्र के चोमान शहर जा रही है, जो सीमा से करीब 40 किलोमीटर दूर है। वहां उसके कुछ दूर के रिश्तेदार रहते हैं, जिनसे वह मदद की उम्मीद कर रही है।
उसने बताया कि उसका बेटा 14 महीने पहले ईरानी सैनिकों की गोली से मारा गया था। वह सीमा पार सिगरेट और अन्य सामान की तस्करी करता था, जो इस इलाके में आजीविका का आम जरिया है। बेटे की मौत के बाद परिवार के पास आय का कोई साधन नहीं बचा और वह तीन छोटे बच्चों की देखभाल कर रही है, जिनमें सबसे बड़ा पांच साल का है।
महिला ने कहा कि खाद्य कीमतें बढ़ने से बच्चों का पेट भरना मुश्किल हो गया है और दो महीने का लगभग 200 डॉलर किराया भी बकाया है। उसने रोते हुए कहा, “मेरी मदद करने वाला वहां कोई नहीं है। युद्ध ने हालात और खराब कर दिए हैं। सब कुछ और महंगा हो गया है।”
वह अपने रिश्तेदारों को पहले से सूचना भी नहीं दे सकी थी और उम्मीद कर रही थी कि वे उसकी मदद करेंगे। उसने कहा, “मैं बेबस हूं, लेकिन बच्चे भूखे हैं और मुझे उनके लिए पूरी कोशिश करनी होगी।”
इस बीच तीन ईरानी मजदूर एक टैक्सी में सवार होकर इराकी कुर्द क्षेत्र में अपने काम पर लौट रहे थे। उन्होंने बताया कि वे एक ही निर्माण कंपनी में काम करते हैं और बढ़ती महंगाई से निपटने के लिए एक महीने तक काम करके पैसे कमाने का इरादा रखते हैं।
उनमें से एक मजदूर ने कहा, “हालात और खराब होंगे और इसका असर आम लोगों पर ही पड़ेगा। हम अपने बच्चों और पत्नियों को छोड़कर यहां काम करने आए हैं, वरना उन्हें अकेला नहीं छोड़ते।”
ईरान के उरमिया शहर में रहने वाले और इराक के इरबिल में काम करने वाले एक पेंटर ने बताया कि लगातार बमबारी अब रोजमर्रा की हकीकत बन गई है। वह हाल ही में विस्फोटों से डरी अपनी मां को सांत्वना देने के लिए घर लौटा था।
इराकी कुर्द क्षेत्र में काम करने वाले एक अन्य ईरानी कुर्द फैक्टरी मजदूर ने बताया कि हालात इतने खराब हैं कि उसने उरमिया में रह रहे अपने परिवार-पत्नी और तीन बच्चों को भी यहां आकर रहने के लिए बुला लिया। वे रविवार को यहां पहुंचे और सड़क किनारे एक रेस्तरां में आराम करते देखे गए।
उसने कहा कि लगातार हमलों के कारण सुरक्षा बल अब अपने ठिकानों में नहीं रुकते। कई सैन्य, खुफिया और पुलिस ठिकाने खंडहर में बदल चुके हैं।
उसने कहा, “वे अब अपने दफ्तरों में नहीं रहते। वे कारों में, पुलों के नीचे, स्कूलों और अस्पतालों में रहते हैं और लगातार इधर-उधर घूमते रहते हैं। उनके ठिकाने नष्ट हो चुके हैं।”
एपी मनीषा शोभना
शोभना