High Court Decision on Guest Teacher Decision || Image- IBC24 News File
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के हजारों गेस्ट टीचर्स को बड़ी राहत देते हुए अहम फैसला सुनाया है। (High Court Decision on Guest Teacher) अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी शैक्षणिक संस्थान में नियमित (परमानेंट) शिक्षक की नियुक्ति होने के बाद केवल इसी आधार पर गेस्ट टीचर की सेवाएं समाप्त नहीं की जा सकतीं।
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हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि नियमित शिक्षक की नियुक्ति के बाद संबंधित संस्थान में गेस्ट टीचर की आवश्यकता नहीं रह जाती है, तो सरकार की जिम्मेदारी होगी कि ऐसे गेस्ट टीचर को किसी अन्य संस्थान या विभाग में समायोजित कर कार्य दिया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गेस्ट टीचर सरकार द्वारा दिए गए वैकल्पिक पद या स्थान को स्वीकार करने से इनकार करता है, तभी उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
यह फैसला रीवा के शासकीय आईटीआई में कार्यरत गेस्ट टीचर सुमन वर्मा की याचिका पर सुनाया गया। सुमन वर्मा को संस्थान में नियमित शिक्षक की नियुक्ति के बाद हटाया जा रहा था, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
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सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने गेस्ट फैकल्टी की सेवा शर्तों का हवाला देते हुए कहा कि केवल नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने के कारण गेस्ट टीचर को नौकरी से हटाना नियमों के अनुरूप नहीं है। (High Court Decision on Guest Teacher) अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में पहले वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। हाईकोर्ट के इस फैसले को प्रदेश के हजारों गेस्ट टीचर्स के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे भविष्य में नियमित नियुक्तियों के बाद भी गेस्ट टीचर्स के रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित होने की उम्मीद बढ़ गई है।
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