बाढ़ से नेपाल-चीन व्यापार मार्ग बाधित, त्योहारों के मौसम से पहले सामान की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी

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बाढ़ से नेपाल-चीन व्यापार मार्ग बाधित, त्योहारों के मौसम से पहले सामान की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 03:22 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 03:22 PM IST

काठमांडू, नौ सितंबर (भाषा) नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई भीषण बाढ़ से चीन के साथ व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है और त्योहारों के मौसम से पहले चीन से आने वाले सामान की समय पर आपूर्ति और उनकी कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बुधवार को जारी एक मीडिया रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।

द राइजिंग नेपाल अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ से सीमा पर बनी बुनियादी सुविधाओं और संपर्क सड़कों को नुकसान पहुंचा है। इससे चीन से आयातित सामान लेकर आने वाले मालवाहक ट्रकों की आवाजाही बाधित हो गई है।

इस वजह से व्यापारियों को दूसरे रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब दशैन, तिहार और छठ जैसे त्योहारों से पहले उपभोक्ता सामान की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

नेपाल ट्रांस-हिमालयन सीमा वाणिज्य संघ के अध्यक्ष राम हरि कार्की ने कहा कि तत्काल मांग को पूरा करने के लिए चीन से सामान मंगाना चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि इस बाधा से त्योहारों से जुड़े सामान की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और परिवहन लागत बढ़ सकती है।

उन्होंने कहा, “तीज, दशैन, तिहार और छठ के लिए सामान लेकर 500 से 600 से अधिक कंटेनर चीन से केरुंग की ओर जा रहे थे। रसुवागढ़ी सीमा को नुकसान पहुंचने के बाद इनमें से कई मालवाहक कंटेनर रास्ते में फंस गए हैं।”

इस बीच, बाढ़ में 200 से अधिक नेपाली कंटेनर बह गए। उन्होंने कहा, “बाढ़ में 200 कंटेनर बह गए, जबकि कारोबारियों को कम से कम दो अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है।”

रसुवागढ़ी चीन के साथ नेपाल के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है और यहां से बड़ी मात्रा में चीन के सामान का आयात होता है।

कार्की के अनुसार, करीब 176 मालवाहक ट्रकों को पहले ही कोराला की ओर मोड़ दिया गया है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक स्थिति, अधिक ऊंचाई और लंबा परिवहन समय होने के कारण यह मार्ग सालभर रसुवागढ़ी के व्यावहारिक विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

कार्की ने कहा, “कोराला सीमा का इस्तेमाल करना हमारी मजबूरी है, और कोई विकल्प नहीं है।”

कोराला के रास्ते माल भेजने से परिवहन में लगने वाला समय और आयात लागत, दोनों बढ़ने की आशंका है।

कार्की ने कहा कि कोराला मार्ग से चीन से नेपाल और फिर वापस माल पहुंचाने में कम से कम 10 से 12 दिन लग सकते हैं। इससे पहले व्यापारी अपेक्षाकृत छोटे रास्तों का इस्तेमाल करते थे।

भाषा तान्या मनीषा

मनीषा