तमिल भाषा के प्रति ‘साझा स्नेह’ से जुड़े हुए हैं भारत और मलेशिया: प्रधानमंत्री मोदी
तमिल भाषा के प्रति ‘साझा स्नेह’ से जुड़े हुए हैं भारत और मलेशिया: प्रधानमंत्री मोदी
कुआलालंपुर, आठ फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत और मलेशिया तमिल भाषा के प्रति साझा स्नेह से जुड़े हुए हैं।
मोदी ने देश में शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में इस भाषा की मजबूत उपस्थिति को रेखांकित किया।
मलेशिया में भारतीय मूल के लगभग 30 लाख लोग रहते हैं, जो विश्व में दूसरा सबसे बड़ा जनसंख्या समूह है।
इनमें से अधिकांश तमिल मूल के हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “भारत और मलेशिया तमिल भाषा के प्रति साझा स्नेह से भी जुड़े हुए हैं। मलेशिया में शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में तमिल की मजबूत व जीवंत उपस्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।”
उन्होंने कहा, “मुझे विश्वास है कि आज का यह ऑडियो-विजुअल समझौता फिल्मों और संगीत, विशेषकर तमिल सिनेमा के माध्यम से हमारे दिलों को और भी करीब लाएगा।”
इससे पहले दिन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “उनके मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम भारत में हममें से कई लोगों की तरह, एमजीआर (अभिनेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचन्द्रन )के “बहुत बड़े प्रशंसक” हैं। ”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में आयोजित दोपहर के भोजन के दौरान तमिल अभिनेता की फिल्म ‘नालाई नमाधे’ का एक गीत प्रस्तुत किया गया। एमजी रामचन्द्रन, एक लोकप्रिय भारतीय अभिनेता, निर्देशक और निर्माता थे।
उन्होंने तमिलनाडु में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) पार्टी की स्थापना की और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।
रामचन्द्रन का निधन 1987 में हुआ था।
‘नालाई नमाधे’ अभिनेता रामचन्द्रन की कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक है, जो 1975 में रिलीज़ हुई थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “मेरे मित्र, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा आयोजित भोज में गाए गए गीतों में से एक ‘नालाई नमाधे’ था, जो महान एमजीआर अभिनीत फिल्म का गीत है!”
मोदी ने कहा, “प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, भारत में हममें से कई लोगों की तरह, एमजीआर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं!”
मोदी ने शनिवार को एक सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि भारतीय प्रवासी भारत और मलेशिया के बीच एक मजबूत सेतु का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस इतिहास से प्रेरित होकर भारत ने मलाया विश्वविद्यालय में तिरुवल्लुवर चेयर की स्थापना की है और अब साझा विरासत को मजबूत करने के लिए एक तिरुवल्लुवर केंद्र स्थापित करेगा।
भाषा जितेंद्र रंजन
रंजन

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