भारत, नीदरलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया, 17 समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत, नीदरलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया, 17 समझौतों पर हस्ताक्षर
(फोटो के साथ)
द हेग, 17 मई (भाषा) वैश्विक भू-राजनीति में बदलावों के बीच भारत और नीदरलैंड ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीदरलैंड के उनके समकक्ष रॉब जेटेन के बीच हुई वार्ता के दौरान रक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 17 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
शनिवार शाम हुई बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने पश्चिम एशिया की स्थिति, विशेष रूप से क्षेत्र और व्यापक विश्व पर इसके गंभीर प्रभावों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की क्योंकि इसके कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार नेटवर्क में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
संयुक्त बयान के अनुसार, मोदी और जेटेन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से स्वतंत्र नौवहन और वैश्विक वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन का आह्वान किया। उन्होंने किसी भी तरह के ‘‘प्रतिबंधात्मक’’ कदमों का विरोध किया और इस संबंध में जारी पहलों के प्रति अपना समर्थन भी दोहराया।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इस संकरे जलमार्ग से 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले के बाद से जहाजों का आवागमन बुरी तरह से बाधित है, जिसके परिणामस्वरूप जवाबी हमले भी हुए।
दोनों नेताओं ने यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की जो रूस के साथ जारी संघर्ष और क्षेत्रीय सुरक्षा घटनाक्रमों से प्रभावित है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों पर आधारित संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन में व्यापक, न्यायपूर्ण और स्थायी शांति प्राप्त करने के प्रयासों का समर्थन जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
बयान के अनुसार, यूक्रेन के विषय पर दोनों पक्षों ने जारी युद्ध पर भी चिंता व्यक्त की जो ‘‘अत्यधिक मानवीय पीड़ा का कारण बन रहा है और इसके वैश्विक परिणाम हैं’’।
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से यूरोप के चार देशों की अपनी यात्रा के तहत शुक्रवार को नीदरलैंड की अपनी दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत की।
मोदी-जेटेन वार्ता के बाद, भारत और नीदरलैंड ने व्यापार एवं निवेश, रक्षा और सुरक्षा तथा सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग सहित महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियों में संबंधों को बढ़ावा देने के लिए एक ‘‘रणनीतिक साझेदारी रूपरेखा’’ की शुरुआत की।
दोनों नेताओं ने ‘‘हरित हाइड्रोजन के विकास पर भारत-नीदरलैंड रूपरेखा’’ की भी शुरुआत की।
मोदी और जेटेन ने रक्षा उपकरणों, रक्षा प्रणालियों, कलपुर्जों और अन्य प्रमुख क्षमताओं का संयुक्त निर्माण सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और संयुक्त उद्यमों की स्थापना के माध्यम से एक रक्षा औद्योगिक रूपरेखा स्थापित करने की संभावनाओं का पता लगाने पर भी सहमति व्यक्त की।
यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक गंतव्यों में से एक नीदरलैंड के साथ द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 27.8 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया।
यह यूरोपीय देश 55.6 अरब अमेरिकी डॉलर के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के साथ भारत का चौथा सबसे बड़ा निवेशक है।
विश्वस्तरीय लॉजिस्टिक नेटवर्क वाला नीदरलैंड मुख्य रूप से रॉटरडैम बंदरगाह के माध्यम से भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का एक रणनीतिक प्रवेश द्वार भी है।
वार्ता में दोनों पक्षों ने विज्ञान और नवाचार, सतत विकास, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा परिवर्तन, समुद्री विकास और लोगों के बीच आपसी संबंध में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच हुए समझौतों से सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, स्वास्थ्य, जल, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और संस्कृति सहित अन्य क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
मोदी-जेटेन की बैठक के बाद हुए एक महत्वपूर्ण समझौते में प्रवासन और आवागमन पर सहमति बनी जिससे उम्मीद है कि रोजगार और शिक्षा के लिए भारतीयों का यूरोपीय देश में आवागमन बढ़ेगा।
संयुक्त बयान के अनुसार, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श करते हुए दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान, नौवहन की स्वतंत्रता और ‘‘दबाव एवं संघर्षों की स्थिति से रहित’’ एक स्वतंत्र, खुले और शांतिपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र का आह्वान किया।
ये टिप्पणियां क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक व्यवहार को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंताओं की पृष्ठभूमि में आई हैं।
निरंतर नवाचार के लिए महत्वपूर्ण खनिजों के रणनीतिक महत्व को स्वीकारते हुए दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने महत्वपूर्ण खनिजों की मूल्य शृंखला में सहयोग को मजबूत करने में अपनी पारस्परिक रुचि व्यक्त की, जिसमें खोज और मूल्य शृंखलाओं का एकीकरण शामिल है।
चीन का वर्तमान में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला में एकाधिकार है। वह न केवल 15 से अधिक आवश्यक खनिजों के खनन को नियंत्रित करता है, बल्कि उनके परिष्करण, प्रसंस्करण और विनिर्माण पर भी उसका नियंत्रण है।
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने ‘डच सेमीकंडक्टर कॉम्पिटेंस सेंटर’ को भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन से जोड़ने की पहल का भी स्वागत किया जिसका उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र को समर्थन और मजबूत करना है।
दोनों देशों के बीच समग्र व्यापार को बढ़ाने के संदर्भ में मोदी और जेटेन ने विशेष रूप से इस वर्ष की शुरुआत में हस्ताक्षरित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से उत्पन्न अवसरों के आलोक में आगे वृद्धि की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार तथा भारत की स्थायी सदस्यता के लिए नीदरलैंड द्वारा निरंतर समर्थन दिए जाने को लेकर जेटेन को धन्यवाद दिया।
संयुक्त बयान के अनुसार, जेटेन ने अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की जिसमें 26 लोग मारे गए थे और सीमा पार आतंकवाद समेत सभी तरह के आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत को अपने देश का अटूट समर्थन जताया।
बयान में कहा गया कि दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने सभी तरह के आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की और आतंकवाद से निपटने के लिए ‘कतई बर्दाश्त नहीं’ की नीति के दृष्टिकोण का आह्वान किया तथा इस खतरे का मुकाबला करने में दोहरे मापदंडों को खारिज किया।
मोदी ने नीदरलैंड के प्रधानमंत्री जेटेन के साथ वार्ता के दौरान अपने शुरुआती संबोधन में कहा, ‘‘पिछले एक दशक में भारत-नीदरलैंड संबंधों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।’’
संबोधन का प्रसारण टेलीविजन पर हुआ।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत नीदरलैंड को अपने सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक मानता है क्योंकि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध ‘‘गहरे’’ हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक मूल्य, बाजार अर्थव्यवस्था और जिम्मेदार व्यवहार हमारी साझा सोच का हिस्सा हैं। जल, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हमारा सहयोग हमारे लोगों के जीवन को बेहतर बना रहा है।’’
मोदी ने भारत की आर्थिक वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि हर क्षेत्र में नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की ‘‘गति एवं कौशल’’ का समन्वय होना चाहिए। मोदी ने कहा, ‘‘हमें नवाचार, निवेश, सतत विकास और रक्षा क्षेत्रों में अपने सहयोग को नयी ऊंचाई पर ले जाने की आवश्यकता है। इसी साझा दृष्टिकोण के तहत हम भारत-नीदरलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जा रहे हैं।’’
भाषा सुरभि नेत्रपाल
नेत्रपाल

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