भारत, अन्य जी-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की धीमी प्रगति पर जताई ‘गहरी चिंता’
भारत, अन्य जी-4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की धीमी प्रगति पर जताई ‘गहरी चिंता’
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर (भाषा) जी-4 समूह के देशों- ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार को लेकर पिछली अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) के दौरान हुई प्रगति की कमी पर गहरी चिंता जताई है।
ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान डेविड वाडेफुल, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर मुलाकात की।
बैठक के बाद जारी यूएनएससी में सुधार पर जी-4 के संयुक्त मंत्रिस्तरीय बयान में कहा गया कि सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी मूल जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने में फिलहाल सक्षम नहीं है।
बयान में कहा गया कि यूएनएससी की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
जी-4 देशों ने कहा कि इसकी एक प्रमुख वजह करीब आठ दशक पुरानी व्यवस्था है, जो आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती और शांति तथा सुरक्षा के मौजूदा एवं भविष्य की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के प्रयासों में बाधा डालती है।
जी-4 के मंत्रियों ने कहा कि 18 वर्षों की कोशिशों के बावजूद आईजीएन प्रक्रिया यूएनएससी में वास्तविक सुधार की दिशा में कोई ठोस नतीजा देने में काफी हद तक “अप्रभावी” रही है।
उन्होंने पिछली आईजीएन बैठक में भी प्रगति नहीं होने पर गहरी चिंता जताई।
मंत्रियों ने विशेष रूप से लिखित आधार पर बातचीत शुरू होने से पहले ही तथाकथित ‘समझौता प्रस्ताव’ पेश किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई।
जी-4 देशों ने अफसोस जताया कि इस प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद की सदस्यता की दोनों श्रेणियों स्थायी और अस्थायी में विस्तार के पक्ष में स्पष्ट बहुमत वाले सदस्य देशों के विचारों को ध्यान में नहीं रखा गया है।
भाषा
खारी वैभव
वैभव

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