भारत ने संरा महासचिव पद की उम्मीदवार बाचेलेत से सुरक्षा परिषद सुधार के लक्ष्यों पर सवाल किए
भारत ने संरा महासचिव पद की उम्मीदवार बाचेलेत से सुरक्षा परिषद सुधार के लक्ष्यों पर सवाल किए
(योषिता सिंह)
संयुक्त राष्ट्र, 22 अप्रैल (भाषा) भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और ‘ग्लोबल साउथ’ के विकास लक्ष्यों का मुद्दा उठाते हुए चिली की पूर्व राष्ट्रपति तथा संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद की उम्मीदवार मिशेल बाचेलेत से पूछा कि अगर वह इस वैश्विक संगठन के नेतृत्व के लिए चुनी जाती हैं तो इन मुद्दों पर उनकी क्या योजना होगी।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकी बाचेलेत संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव पद की दौड़ में शामिल चार उम्मीदवारों में से एक हैं।
वर्तमान संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुतारेस 31 दिसंबर को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। उन्होंने लगातार दो पांच वर्षीय कार्यकाल तक दुनिया के शीर्ष राजनयिक के रूप में सेवा दी है।
मंगलवार को यहां तीन घंटे चले संवाद सत्र में बाचेलेत से सदस्य देशों और सिविल सोसायटी ने अगले महासचिव पद को लेकर उनकी सोच के बारे में तथा यह पूछा कि वह इस पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार क्यों हैं।
विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) राजदूत सिबी जॉर्ज ने संवाद के दौरान कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र का नौवां दशक नेतृत्व और आशा का होना चाहिए। सदस्य देशों के सामने अपनी दृष्टि और कार्ययोजना रखने के आपके प्रयासों की हम सराहना करते हैं।’’
भारत ने दो मुद्दे उठाए और उन पर बाचेलेत का दृष्टिकोण जानना चाहा।
जॉर्ज ने कहा, ‘‘यह स्पष्ट है कि आज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना एक अलग युग की वास्तविकताओं को दर्शाती है। आपके दृष्टिपत्र में संयुक्त राष्ट्र में जारी सुधारों को बनाए रखने और आगे बढ़ाने की बात कही गई है। कृपया बताएं कि इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए आप कौन से कदम उठाएंगी।’’
दूसरा सवाल रखते हुए उन्होंने कहा कि बाचेलेत के दृष्टिपत्र में सतत विकास के संदर्भ में छोटे द्वीपीय विकासशील देशों, अल्पविकसित देशों और भूमि से घिरे विकासशील देशों (विकासशील देश जिनकी समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं होती) पर विशेष ध्यान दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम ग्लोबल साउथ के विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आपके विचार और दृष्टिकोण के बारे में अधिक जानना चाहते हैं।’’
ब्राजील और मैक्सिको द्वारा संयुक्त रूप से नामित बाचेलेत ने कहा कि उनके लिए यह महत्वपूर्ण है कि महासचिव विभिन्न वास्तविकताओं को समझे और सर्वोत्तम तरीके से काम करने के रास्ते खोज सकें।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए स्पष्ट है कि यूएन80 प्रक्रिया वास्तव में मौजूदा परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करे और उसे लागू किया जा सके।”
’यह पहल गुतारेस ने 80 वर्ष पुराने संयुक्त राष्ट्र को वर्तमान भू-राजनीतिक चुनौतियों के अनुरूप अधिक प्रभावी और सक्षम बनाने के लिए शुरू की है।
बाचेलेत ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी विकासशील देशों को संयुक्त राष्ट्र तथा सचिवालय के विभिन्न निर्णयकारी पदों पर उचित प्रतिनिधित्व मिले, ताकि उनकी आवाज केवल कुछ समूहों में नहीं बल्कि रोजाना सुनी जाए।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि मेरा चयन होता है तो संरचनात्मक सुधार, जो दक्षता बढ़ाएं और सदस्य देशों की सेवा क्षमता को मजबूत करें, ये मेरे कार्यकाल का अहम हिस्सा होंगे। साथ ही ग्लोबल साउथ की जरूरतों को प्राथमिकता दी जाएगी।’’
‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।
बाचेलेत के अलावा संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन की महासचिव और कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रेबेका ग्रिन्सपैन संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए दूसरी महिला उम्मीदवार हैं।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी और सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी साल भी इस पद की दौड़ में हैं।
संवाद सत्र के बाद पत्रकारों से बातचीत में बाचेलेत ने कहा कि 2016 के महासचिव चुनाव में महिला उम्मीदवार के समर्थन में माहौल बना था और कई महिला उम्मीदवार मैदान में थीं, जिन्हें कई देशों का समर्थन भी मिला था।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अंत में ऐसा नहीं हो सका। यदि मैं विनम्रता से कहूं, तो दुनिया इसके लिए तैयार नहीं थी। क्या अब तैयार है? मुझे उम्मीद है। यह बहुत अच्छा संकेत होगा… और यह कई लोगों के लिए उम्मीद जगाएगा, क्योंकि यह कुछ अलग होगा।’’
भाषा गोला वैभव
वैभव

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