भारतीय राजदूत ने रूस से तेल खरीद कम करने की जानकारी दी: अमेरिकी सीनेटर
भारतीय राजदूत ने रूस से तेल खरीद कम करने की जानकारी दी: अमेरिकी सीनेटर
(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, पांच जनवरी (भाषा) अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने दावा किया कि अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने उन्हें नयी दिल्ली के रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने की जानकारी दी और आग्रह किया कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस बारे में सूचित करें तथा भारतीय वस्तुओं पर लगाया गया “टैरिफ घटाने को कहें।”
‘एयर फोर्स वन’ विमान में ट्रंप के साथ मौजूद ग्राहम ने रविवार को उनके टैरिफ बिल के बारे में बात की, जिसमें रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों से आयातित वस्तुओं पर 500 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
ग्राहम ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष के खात्मे के लिए मॉस्को के साथ कारोबार करने वालों पर दबाव बनाना जरूरी है। ट्रंप ने कहा कि प्रतिबंधों से रूस को बहुत नुकसान हो रहा है। उन्होंने भारत का भी जिक्र किया।
ग्राहम ने कहा कि अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारतीय वस्तुओं के आयात पर 25 फीसदी टैरिफ (शुल्क) लगाया।
उन्होंने कहा, “मैं लगभग एक महीने पहले भारतीय राजदूत के आवास पर था। इस दौरान वह केवल एक ही बात करना चाह रहे थे कि कैसे भारत ने रूस से तेल खरीद कम कर दी है।”
ग्राहम ने दावा किया कि भारतीय राजदूत ने उनसे कहा, “क्या आप राष्ट्रपति से ‘टैरिफ’ में कमी करने के लिए कहेंगे?”
अमेरिकी सीनेटर के इस दावे पर भारतीय अधिकारियों की तरफ से फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ग्राहम ने कहा, “यह रणनीति कारगर है… लेकिन अगर आप सस्ता रूसी तेल खरीदकर पुतिन की युद्ध मशीन को चालू रखने में मदद करते हैं, तो हम राष्ट्रपति को ‘टैरिफ’ के रूप में ऐसी शक्ति देने की कोशिश कर रहे हैं, जो इसे ऐसा विकल्प बनाए, जिसके कठोर परिणाम हों। मेरा मानना है कि ट्रंप ने भारत के साथ जो किया, मुख्यत: उसी की वजह से भारत अब रूस से काफी कम तेल खरीद रहा है।”
इसके बाद ट्रंप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जानते हैं कि वह (ट्रंप) रूस से कच्चे तेल की खरीद के भारत के कदम से खुश नहीं हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लागू टैरिफ “बहुत जल्द” बढ़ा सकता है, जो “उनके लिए बहुत बुरा” होगा।
ट्रंप ने कहा, “वे (भारत) दरअसल मुझे खुश करना चाहते थे। मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं; वह नेक दिल हैं। उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं हूं और मुझे खुश करना उनके लिए महत्वपूर्ण था। वे (भारत) व्यापार कर रहे हैं और हम बहुत जल्द उन पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। यह उनके लिए बहुत बुरा होगा।”
क्वात्रा ने पिछले महीने वाशिंगटन डीसी में भारत के राजदूत के आधिकारिक आवास ‘इंडिया हाउस’ में ग्राहम, रिचर्ड ब्लूमंथल, शेल्डन व्हाइटहाउस, पीटर वेल्च, डैन सुलिवन और मार्कवेन मुलिन सहित कुछ अमेरिकी सीनेटर की मेजबानी की थी।
उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा था, “ऊर्जा और रक्षा सहयोग से लेकर व्यापार और महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाक्रमों तक, भारत-अमेरिका साझेदारी पर सार्थक बातचीत हुई। मजबूत भारत-अमेरिका संबंधों के लिए समर्थन के वास्ते उनका आभारी हूं।”
ट्रंप ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारतीय वस्तुओं के आयात पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इससे भारतीय वस्तुओं पर लागू कुल शुल्क बढ़कर 50 फीसदी हो गया था, जो किसी भी अन्य देश के मुकाबले अधिक है।
भारत 88 फीसदी कच्चा तेल विदेशी बाजारों से खरीदता है। भारत की ओर से 2021 तक आयात किए गए कुल कच्चे तेल में रूसी तेल की हिस्सेदारी बमुश्किल 0.2 फीसदी थी।
हालांकि, यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद पश्चिमी देशों की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध था और भारतीय रिफाइनरी ने तुरंत इसकी खरीद तेज कर दी।
रियल-टाइम डेटा एनालिटिक्स कंपनी ‘केप्लर’ ने कहा था कि दिसंबर 2025 में भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात नवंबर के 18.4 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) से घटकर लगभग 12 लाख बीपीडी होने का अनुमान है, जो दिसंबर 2022 के बाद से सबसे कम है।
भाषा पारुल वैभव
वैभव

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