ईरान का अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला, इजराइल ने चेताया कि ईरानी मिसाइल उसके क्षेत्र में गिर सकती हैं

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ईरान का अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला, इजराइल ने चेताया कि ईरानी मिसाइल उसके क्षेत्र में गिर सकती हैं

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  • Publish Date - July 19, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - July 19, 2026 / 08:32 PM IST

दुबई, 19 जुलाई (एपी) अमेरिका ने रविवार को ईरान में हवाई हमले किए। वहीं ईरान की ओर से जॉर्डन की तरफ दागी गई मिसाइल के कारण संघर्ष के पड़ोसी देश इजराइल तक फैलने का खतरा बढ़ गया है।

अमेरिकी सेना ने कहा कि ताजा हमलों में ईरान के अर्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड को निशाना बनाया गया और यह कार्रवाई जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लेने के लिए की गई।

पिछले महीने हुए अस्थायी समझौते के विफल होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पों से संघर्ष और तेज हो गया है।

यह अभियान अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इसकी शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष से हुई थी। अमेरिका ने ईरान में पुलों, बिजली प्रतिष्ठानों और अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया है, जबकि तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमले करके जवाबी कार्रवाई की है।

कुवैत, जॉर्डन और बहरीन ने रविवार सुबह फिर से अपनी वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दीं और ईरानी ड्रोन तथा मिसाइल के आने की चेतावनी जारी की। इजराइल ने चेतावनी दी कि संघर्ष दोबारा शुरू होने के बाद जॉर्डन की ओर दागी गई ईरानी मिसाइल पहली बार उसके क्षेत्र में गिर सकती है।

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान ने अपने बयान में कहा कि उसने ‘ईरानी सैन्य तटीय निगरानी और वायु रक्षा प्रतिष्ठानों, समुद्री क्षमताओं तथा मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों’ को निशाना बनाया। उसने कहा कि हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की नियंत्रण क्षमता को कमजोर करना और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) को जवाब देना था, जो ईरान की सत्ता व्यवस्था में एक प्रमुख शक्ति है और बैलिस्टिक मिसाइल के भंडार को नियंत्रित करता है।

अमेरिकी सेना द्वारा जारी फुटेज में लड़ाकू विमानों और समुद्र से दागी गई टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से किए गए हमले दिखाई दिए। एक लक्ष्य पहाड़ी क्षेत्र की घाटी में स्थित प्रतीत हुआ। रिवोल्यूशनरी गार्ड अक्सर पहाड़ी इलाकों में मिसाइल अड्डे और सैन्य उपकरण छिपाकर रखता है।

अमेरिकी सेना ने शनिवार को बताया कि जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिक मारे गए, एक लापता है और चार अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 16 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और 430 से अधिक घायल हुए हैं।

ईरानी अधिकारियों ने रविवार को कहा कि हालिया अमेरिकी हमलों में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई है और 517 लोग घायल हुए हैं।

ईरान ने अमेरिकी अभियान में अपने सैन्य नुकसान की कुल जानकारी साझा नहीं की है। यह अभियान अब आठवें दिन में प्रवेश कर चुका है और दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर आमने-सामने हैं। यह वही संकरा समुद्री मार्ग है, जिससे सामान्य समय में दुनिया के कुल तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है।

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने ईरान की परमाणु ऊर्जा एजेंसी के हवाले से बताया कि रविवार सुबह हुए अमेरिकी हमलों में दक्षिण-पश्चिम ईरान में प्रस्तावित परमाणु ऊर्जा संयंत्र के निर्माण स्थल को निशाना बनाया गया।

प्लैनेट लैब्स पीबीसी की उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, डार्खोविन परमाणु ऊर्जा संयंत्र के प्रस्तावित स्थल पर नौ जुलाई तक केवल जमीन साफ करने का काम हुआ था और बहुत कम निर्माण हुआ था। इस स्थल पर किसी रेडियोधर्मी सामग्री की मौजूदगी की जानकारी नहीं है।

अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगी देशों ने रविवार को अपनी वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दीं या ईरानी हमलों की सूचना दी।

जॉर्डन की सेना ने बाद में कहा कि उसने कई ईरानी मिसाइल मार गिरायीं। जॉर्डन में अमेरिका के प्रमुख सैन्य अड्डे हैं और वह अमेरिकी वायु रक्षा प्रणालियों पर निर्भर है। जॉर्डन की सेना के अनुसार, इन मिसाइल से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इससे युद्ध के इजराइल तक फैलने का खतरा पैदा हो गया।

इजराइली सेना ने कहा कि जॉर्डन के सीमावर्ती बंदरगाह शहर अकाबा की ओर दागी गई ईरानी मिसाइल उसके क्षेत्र में पहुंच सकती हैं। सेना ने लोगों को कई हफ्तों बाद पहली बार हवाई हमले के सायरन सुनाई देने के लिए तैयार रहने को कहा।

हालिया संघर्ष में ईरान ने इजराइल के बजाय अमेरिका के सहयोगी अरब देशों को अधिक निशाना बनाया है। इससे पहले 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका ने मिलकर युद्ध अभियान शुरू किया था।

कुवैत ने रविवार को कहा कि उसके एक बिजली और समुद्री जल को मीठा बनाने के संयंत्र पर दो दिनों में दूसरी बार हमला हुआ, जिससे आग लग गई। कुवैत के बिजली, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि बिजली ग्रिड स्थिर है। यह हमला लाखों लोगों के लिए जरूरी नागरिक बुनियादी ढांचे के प्रभावित होने का नवीनतम उदाहरण है।

कुवैत में लगभग 90 प्रतिशत पेयजल समुद्री जल को मीठा बनाने के संयंत्रों से आता है।

खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) महासचिव जसिम मोहम्मद अल-बुदैवी ने बुनियादी ढांचे और नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमलों के लिए ईरान पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक ढांचों को आमतौर पर हमलों से सुरक्षा प्राप्त होती है, हालांकि सैन्य इस्तेमाल होने पर यह सुरक्षा समाप्त हो सकती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाने की धमकी दी थी, ताकि तेहरान को होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ कमजोर करने के लिए मजबूर किया जा सके।

अमेरिका ने पिछले सप्ताह ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी फिर लागू की थी ताकि कच्चे तेल के निर्यात को रोका जा सके।

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने शनिवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमले जारी रखे तो उसे ‘भूल न सकने वाले सबक’ मिलेंगे।

एक ईरानी वार्ताकार ने कहा कि तेहरान ने करीब एक महीने पहले हुए अस्थायी समझौते के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं निलंबित कर दी हैं, जिसका उद्देश्य संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करना था।

ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि अमेरिका की ‘लालच, धमकी, निरंकुशता या क्रूरता’ का जवाब ‘विनाशकारी प्रतिक्रिया’ से दिया जाएगा।

एपी अमित संतोष

संतोष