(बिजय कुमार सिंह)
नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम ने सोमवार को कहा कि भारत कारोबार करने और वित्तपोषण की लागत कम करने के लिए संरचनात्मक सुधारों में तेजी लाकर आठ से नौ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल कर सकता है।
उन्होंने भूमि, श्रम और पूंजी जैसे कारक बाजारों में सुधारों के साथ-साथ न्यायिक और नौकरशाही सुधार लागू करने की वकालत की।
सुब्रमण्यम ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘वृहद आर्थिक स्थिरता ने भारत को सात प्रतिशत वृद्धि तक पहुंचाया। संस्थागत सुधार भारत को नौ प्रतिशत वृद्धि तक ले जा सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब निजी निवेश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सा 30 प्रतिशत से अधिक था, तब भारत ने आठ प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हासिल की थी। अभी यह लगभग 22-23 प्रतिशत है, यानी लक्ष्य से सात से आठ प्रतिशत कम।’’
सुब्रमण्यम ने कहा, ‘‘तब हम सात प्रतिशत से नौ प्रतिशत वृद्धि की छलांग लगाएंगे।’’
उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों के सार्वजनिक पूंजीगत व्यय ने वह बुनियादी ढांचा तैयार किया है, जिसके बाद निजी निवेश आता है। साथ ही, सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) कई दशक के निचले स्तर के करीब होने से बैंकिंग प्रणाली भी इसे समर्थन देने के लिए तैयार है।
वर्ष 2018 से 2021 तक भारत के 17वें मुख्य आर्थिक सलाहकार रहे और बाद में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) में कार्यकारी निदेशक रहे सुब्रमण्यम हाल में शिकागो विश्वविद्यालय के 85 वर्षीय इतिहास में ‘एलुमनाई अवॉर्ड फॉर प्रोफेशनल अचीवमेंट’ पाने वाले पहले भारतीय अर्थशास्त्री बने हैं।
यह सम्मान पहले कम से कम 12 नोबेल पुरस्कार विजेताओं और अन्य प्रतिष्ठित वैश्विक हस्तियों को दिया जा चुका है।
प्रख्यात अर्थशास्त्री ने कहा कि भारत की व्यापक आर्थिक बुनियाद मजबूत है और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निकट अवधि में अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘…हमें सात प्रतिशत से नौ प्रतिशत वृद्धि तक पहुंचाने वाली अगली लहर भूमि, श्रम और पूंजी जैसे कारक बाजारों के साथ न्यायिक और नौकरशाही सुधारों की होगी, जो कारोबार करने और वित्तपोषण की लागत कम करें।’’
इस महीने की शुरुआत में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने पश्चिम एशिया संकट से ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका के चलते चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया था।
कृत्रिम मेधा (एआई) के बारे में सुब्रमण्यम ने ओपन-सोर्स फ्रंटियर मॉडल को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत को अगला चैटजीपीटी बनाने की जरूरत नहीं है। भारत को स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, एमएसएमई और सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक प्रशासन एवं नियमन में एआई का दुनिया का सबसे प्रभावी उपयोगकर्ता बनना चाहिए। एआई का तेज और व्यापक इस्तेमाल ही उत्पादकता वृद्धि तय करेगा। भारत को यही दौड़ जीतनी है।’’
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और पोर्टफोलियो निवेश में तेज गिरावट पर सुब्रमण्यम ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आक्रामक मौद्रिक सख्ती से सभी उभरते बाजारों से पूंजी डॉलर परिसंपत्तियों की ओर चली गई।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन वह संदर्भ था, बहाना नहीं। घरेलू कारण अधिक महत्वपूर्ण हैं और उन पर कार्रवाई की जा सकती है।’’
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