अस्पतालों में इरानी एजेंटों ने घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज में बाधा डाली

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अस्पतालों में इरानी एजेंटों ने घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज में बाधा डाली

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  • Publish Date - February 27, 2026 / 05:32 PM IST,
    Updated On - February 27, 2026 / 05:32 PM IST

बेरूत, 27 फरवरी (एपी) ईरान में पिछले महीने सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई के दौरान सुरक्षा एजेंटों द्वारा अस्पतालों में घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज में बाधा डालने और डॉक्टरों को गिरफ्तार करने के आरोप सामने आए हैं।

यह दावा एसोसिएटेड प्रेस (एपी) की तीन डॉक्टरों और छह ईरानी चिकित्सा पेशेवरों से हुई बातचीत पर आधारित है।

इसमें कहा गया है कि उत्तरी शहर रश्त के एक डॉक्टर ने बताया कि जब सिर में गोली लगे एक प्रदर्शनकारी को आपात कक्ष में लाया गया तो सादे कपड़ों में हथियारबंद सुरक्षा कर्मियों ने इलाज कर रहे डॉक्टरों को पीछे धकेल दिया। कुछ ही मिनटों में उस व्यक्ति की मौत हो गई और सुरक्षाकर्मी उसका शव अन्य शवों के साथ ले गए।

एक डॉक्टर ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर यह जानकारी देते हुए बताया कि इस तरह की यह एक घटना नहीं थी।

एपी की खबर में कहा गया है कि जनवरी की शुरुआत में कई शहरों के अस्पतालों में सादे कपड़ों में सुरक्षा एजेंट तैनात थे और उन्होंने घायलों की निगरानी की, कुछ मामलों में इलाज रोका, चिकित्साकर्मियों को डराया-धमकाया और मृतकों के शव अपने कब्जे में लिए। दर्जनों डॉक्टरों को हिरासत में लिए जाने की भी बात कही गई है।

इस खबर में मानवाधिकार संगठनों से मिली जानकारी और सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो की पुष्टि के आधार पर ब्यौरे दिए गए हैं। बर्लिन स्थित संस्था ‘म्नेमोनिक’ ने भी अस्पतालों में हिंसा से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की पहचान में सहयोग किया।

ओस्लो स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स सेंटर ने भी बताया है कि सुरक्षा एजेंटों ने अस्पतालों के भीतर इलाज में व्यवधान डाला, मरीजों को वेंटिलेटर से हटाया और डॉक्टरों को हिरासत में लिया। संगठन के प्रमुख अमीरी-मोगद्दम ने इसे “सुनियोजित पैटर्न” बताया है।

ईरान सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपुर ने सरकारी मीडिया के हवाले से कहा कि इलाज रोके जाने या प्रदर्शनकारियों को अस्पतालों से उठाए जाने की खबरें “असत्य” हैं। उन्होंने कहा कि सभी घायलों का “बिना किसी भेदभाव” के उपचार किया गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि कुछ डॉक्टरों ने गिरफ्तारी के डर से गुप्त स्थानों पर घायलों का इलाज किया। तेहरान के एक सर्जन ने दावा किया कि एक निजी क्लिनिक में दर्जनों घायलों का उपचार किया गया और उन्हें अस्पताल भेजने से पहले उनके शरीर से गोलियां निकाल दी गईं, ताकि उन्हें हिरासत में न लिया जाए।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अनुसार, जनवरी में हुई कार्रवाई 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद की सबसे घातक घटनाओं में से एक थी। इंटरनेट पर प्रतिबंध के कारण हताहतों की सटीक संख्या पता नहीं चली। कुछ संगठनों ने हजारों मौतों का दावा किया है, जबकि सरकार ने इससे बहुत कम संख्या स्वीकार की है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 जनवरी के बाद से कम से कम 79 स्वास्थ्यकर्मियों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। कई को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि कुछ पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

एपी मनीषा माधव

माधव