क्या चैटजीपीटी को “कृपया” और “धन्यवाद” कहना सच में ऊर्जा बर्बाद करना है?

क्या चैटजीपीटी को “कृपया” और “धन्यवाद” कहना सच में ऊर्जा बर्बाद करना है?

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 04:44 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 04:44 PM IST

( रिचर्ड मॉरिस, लिंकन यूनिवर्सिटी, न्यूजीलैंड )

वेलिंगटन, 15 जनवरी (द कन्वरसेशन) यदि आप अगली बार चैटजीपीटी से सवाल करते समय “कृपया” और “धन्यवाद” शब्द हटा देंगे, तो आप अपने ‘पृथ्वी’ ग्रह को बचाने में मदद करेंगे।

ऑनलाइन बातचीत में कहा जाता है कि चैटजीपीटी से सवाल करते समय “कृपया” और “धन्यवाद” शब्द का उपयोग न करने का मतलब ‘पृथ्वी’ को बचाने में मदद करना है।

यह विचार सुनने में कुछ हद तक सही लगता है क्योंकि एआई सिस्टम टेक्स्ट को क्रमिक रूप से प्रोसेस करते हैं: लंबा प्रॉम्प्ट अधिक कम्प्यूटेशन मांगता है इसलिए अधिक ऊर्जा खर्च होती है।

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी माना है कि अरबों प्रॉम्प्ट के पैमाने पर यह ऑपरेटिंग लागत बढ़ाता है।

फिर भी, यह कहना कि एआई को शिष्टाचार के साथ इस्तेमाल करने से पर्यावरण पर महत्वपूर्ण असर पड़ता है, सही नहीं है। कुछ अतिरिक्त शब्दों का असर उस ऊर्जा की तुलना में नगण्य है जो डेटा सेंटर के संचालन में लगता है।

– एआई का वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव

कृत्रिम बुद्धिमत्ता बड़े डेटा सेंटर पर निर्भर करती है, जिनमें उच्च-घनत्व कंप्यूटिंग अवसंरचना होती है। ये केंद्र भारी बिजली का उपयोग करते हैं, लगातार ठंडे रखे जाते हैं, और ऊर्जा आपूर्ति, जल और भूमि उपयोग जैसे व्यापक सिस्टम में जुड़े होते हैं।

एआई के अधिक उपयोग के साथ, यह आधारभूत पर्यावरणीय प्रभाव भी बढ़ाता है। इसलिए महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि हम प्रॉम्प्ट में शब्द कैसे चुनते हैं, बल्कि यह है कि ये सिस्टम कितनी बार और कितनी तीव्रता से उपयोग किए जाते हैं।

– प्रत्येक एआई प्रॉम्प्ट का ऊर्जा खर्च

सामान्य डिजिटल सेवाओं और एआई में एक महत्वपूर्ण अंतर है। जब हम कोई दस्तावेज़ खोलते हैं या वीडियो स्ट्रीम करते हैं, तो मुख्य ऊर्जा लागत पहले ही हो चुकी होती है। सिस्टम केवल मौजूद डेटा को पुनः प्राप्त करता है।

इसके विपरीत, एआई मॉडल को हर बार नए सिरे से गणना करनी पड़ती है। तकनीकी रूप से, प्रत्येक प्रॉम्प्ट एक नया “इनफेरेंस” ट्रिगर करता है – यानी मॉडल के पूरे कंप्यूटेशनल पास के लिए ऊर्जा खर्च होती है। यही वजह है कि एआई पारंपरिक सॉफ़्टवेयर की तरह नहीं बल्कि भौतिक अवसंरचना की तरह व्यवहार करता है।

– वैश्विक पैमाने पर प्रभाव –

‘साइंस’ जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार, डेटा सेंटर पहले ही वैश्विक बिजली खपत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, और एआई वर्कलोड के बढ़ने के साथ यह तेजी से बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मौजूदा विकास दर पर, दशक के अंत तक डेटा सेंटर की बिजली मांग दोगुनी हो सकती है।

इसके अलावा, डेटा सेंटर को ठंडा करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की भी आवश्यकता होती है और इनके निर्माण और संचालन में भूमि, सामग्री और लंबे समय तक चलने वाली संपत्तियां शामिल हैं। ये प्रभाव स्थानीय स्तर पर महसूस किए जाते हैं, भले ही सेवा वैश्विक हो।

– “कृपया” मिथक क्यों महत्वपूर्ण है –

प्रॉम्प्ट में शब्द जोड़ने या हटाने पर ध्यान केंद्रित करना असली संरचनात्मक मुद्दों से ध्यान हटाता है। असली सवाल यह है कि एआई अवसंरचना को ऊर्जा नियोजन, जल प्रबंधन, भूमि उपयोग प्राथमिकताओं और अन्य सामाजिक जरूरतों के साथ कैसे जोड़ा जाता है।

इसका मतलब यह नहीं कि एआई को नकारा जाए। एआई पहले ही अनुसंधान, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स और अन्य क्षेत्रों में अहम भूमिका निभा रहा है। लेकिन, किसी भी अवसंरचना की तरह, इसके उपयोग के फायदे और लागत दोनों हैं।

“कृपया” मिथक की लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि लोग जानते हैं कि एआई की अपनी एक भौतिक और पर्यावरणीय मौजूदगी है, भले ही इसे व्यक्त करने की भाषा अभी विकसित हो रही हो। इस संकेत को गंभीरता से लेने से एआई के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव पर अधिक यथार्थवादी चर्चा की राह खुलती है।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा नरेश

नरेश