इजराइल को पश्चिम एशिया के रास्ते भारत से लेकर अमेरिका तक व्यापक गठबंधन बनाना चाहिए: रक्षा अधिकारी
इजराइल को पश्चिम एशिया के रास्ते भारत से लेकर अमेरिका तक व्यापक गठबंधन बनाना चाहिए: रक्षा अधिकारी
(हरिंदर मिश्रा)
यरूशलम, एक जुलाई (भाषा) इजराइल को पश्चिम एशिया और यूरोप के रास्ते भारत से लेकर अमेरिका तक एक व्यापक गठबंधन बनाकर नयी क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैयारी करनी चाहिए। इजराइली रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमीर बरम ने बुधवार को यह बात कही।
तेल अवीव स्थित रेचमैन विश्वविद्यालय में आयोजित एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए बरम ने अमेरिका-इजराइल के बीच “ठोस हितों और साझा मूल्यों” पर आधारित एक नये सुरक्षा समझौता ज्ञापन (एमओयू) की भी मांग की।
बरम ने कहा, “इस युद्ध ने क्षेत्र के हर देश को स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की सैन्य ताकत बढ़ने के क्या नतीजे हो सकते हैं। इसने भारत से लेकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), यूनान और साइप्रस तक एक व्यापक गठबंधन बनाने का साझा हित पैदा किया है।”
उन्होंने कहा कि इजराइल को अपनी जरूरत के हिसाब से सेना को मजबूत करना चाहिए, भारत से लेकर यूएई, यूनान और साइप्रस तक विभिन्न देशों को शामिल करते हुए एक व्यापक गठबंधन बनाना चाहिए और अमेरिका-इजराइल के बीच सुरक्षा संबंधी एक नये एमओयू पर जोर देना चाहिए।
प्रस्तावित व्यापक गठबंधन मोटे तौर पर उस ‘भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (आईएमईसी) से भी मेल खाता है, जिसकी घोषणा 2023 में नयी दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान की गई थी। इसका मकसद भारत, खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका के बीच ‘कनेक्टिविटी’ को बेहतर बनाना है।
बरम ने उन घटनाक्रमों के प्रति आगाह किया, जो ईरान की सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “दुनियाभर में जो समझौते आकार ले रहे हैं, उनसे ईरान को अरबों डॉलर हासिल हो सकते हैं, जिसका इस्तेमाल वह अपनी सैन्य शक्ति में इजाफे के लिए कर सकता है।”
बरम वाशिंगटन और तेहरान के बीच हाल में हुए उस एमओयू की तरफ इशारा कर रहे थे, जिसके तहत ईरान की अतीत में ‘फ्रीज’ की गई अरबों डॉलर की राशि को मुक्त करने और देश में सैकड़ों अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली पुनर्निर्माण योजना संचालित करने की सहमति बनी है।
इजराइली अधिकारी ने कहा, “इजराइल को अपनी जरूरत के हिसाब से सेना को मजबूत करना चाहिए और एक नया क्षेत्रीय ढांचा बनाना चाहिए-सबसे पहले अपने रणनीतिक सहयोगी अमेरिका के साथ और फिर दूसरों देशों के साथ भी।”
इजराइल-अमेरिका संबंधों और प्रस्तावित सुरक्षा एमओयू पर टिप्पणी करते हुए बरम ने कहा कि दोनों देशों के बीच अंतर “खतरे को समझने के तरीके में नहीं, बल्कि हमारी प्राथमिकताओं में है।”
उन्होंने कहा, “इजराइल के लिए ईरान उसके अस्तित्व के समक्ष खतरा है; अमेरिका के लिए वह लंबे समय से बरकरार एक क्षेत्रीय चुनौती है, जबकि चीन और हिंद-प्रशांत क्षेत्र उसके लिए चिंता का मुख्य विषय बने हुए हैं।”
भाषा पारुल अविनाश
अविनाश

Facebook


