जयशंकर ने पश्चिम एशिया में शांति की शीघ्र वापसी का आह्वान किया
जयशंकर ने पश्चिम एशिया में शांति की शीघ्र वापसी का आह्वान किया
पोट लुईस, 10 अप्रैल (भाषा) भारत ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया में शांति की शीघ्र बहाली की आवश्यकता पर जोर दिया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संकट को ‘‘चिंताजनक’’ बताया और नागरिकों, बुनियादी ढांचे और वैश्विक व्यापार मार्गों को निशाना बनाने के खिलाफ भारत के अडिग रुख को रेखांकित किया।
जयशंकर ने हिंद महासागर सम्मेलन में अपने संबोधन में संघर्ष के आर्थिक प्रभाव, विशेष रूप से ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर भी चिंता व्यक्त की।
विदेश मंत्री की यह टिप्पणियां उस पृष्ठभूमि में आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हुए दो सप्ताह के युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है, खासकर लेबनान पर इजराइली हमलों के बाद।
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी इस संघर्ष को लेकर बेहद चिंतित हैं और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल होते देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम नागरिकों, बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने का कड़ा विरोध करते हैं।’’
उन्होंने हिंद महासागर के कई देशों के विदेश मंत्रियों की मौजूदगी में कहा, ‘‘यह आवश्यक है कि नौवहन सुरक्षित और निर्बाध बना रहे। यहां प्रासंगिक बात यह है कि हम सभी ने इस संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को बहुत गहराई से महसूस किया है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘जब ऊर्जा महंगी होती है, तो इसका पूरे समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।’’
होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन में व्यवधान को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ रही हैं। ईरान ने अपने मित्र देशों के जहाजों को जलमार्ग से गुजरने की अनुमति दी है।
जयशंकर ने कहा कि जब व्यापार प्रतिबंधित होता है, तो इसका प्रभाव व्यवसाय के अलावा कई अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब उर्वरकों की उपलब्धता मुश्किल हो जाती है, तो इसका खाद्य सुरक्षा पर असर साफ दिखाई देता है। लेकिन कुछ मूलभूत मुद्दे भी हैं, जिन पर हमें ध्यान देना होगा, क्योंकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ऐसे हालात फिर से नहीं बनेंगे।”
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव

Facebook


