समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कोलकाता, मुंबई में लाखों लोगों पर खतरा : संरा
समुद्र का जलस्तर बढ़ने से कोलकाता, मुंबई में लाखों लोगों पर खतरा : संरा
संयुक्त राष्ट्र, एक सितंबर (भाषा) कोलकाता और मुंबई में लाखों लोग समुद्र का जलस्तर बढ़ने और हमेशा के लिए पानी में डूब जाने के कारण अपने घर खोने के “तात्कालिक खतरे” का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट ‘समुद्र के जलस्तर में वृद्धि से जुड़ी चुनौतियां तथा उनसे निपटने के तरीके और उपाय’ में कहा गया है, “समुद्र का बढ़ता जलस्तर अब कोई दूर की बात या भविष्य का खतरा नहीं रह गया है; यह अभी हो रहा है और दर्ज इतिहास में किसी भी समय की तुलना में तेजी से हो रहा है। इसकी रफ्तार भी बढ़ रही है, जिससे समुद्र के जलस्तर में वृद्धि दुनिया भर की आबादी के लिए-चाहे वे विकसित देश हों या विकासशील-सबसे गंभीर खतरों में से एक बन गई है।”
सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से शहरी बुनियादी ढांचे, जल प्रणालियों, परिवहन नेटवर्क, ऊर्जा ग्रिड, इमारतों और भूजल संसाधनों को पहले ही नुकसान पहुंच रहा है। इसके दूरगामी परिणाम हो रहे हैं, जिनसे मानवाधिकारों के प्रभावी उपभोग, दीर्घकालिक विकास और वित्तीय स्थिरता पर खतरा मंडरा रहा है।
इसमें बताया गया है कि इन जोखिमों का स्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग होता है।
अमेरिका के मियामी और न्यूयॉर्क और चीन के ग्वांगझू जैसे ज्यादा आय वाले शहरों में, इसका मुख्य असर तटीय बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाला भारी वित्तीय जोखिम है; अनुमान है कि इसमें 2 हजार अरब से 3.5 हजार अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति खतरे में है।
रिपोर्ट में कहा गया, “दक्षिण एशिया के निचले डेल्टा इलाकों में, और भारत के कोलकाता व मुंबई तथा ढाका जैसे शहरों में, सबसे बड़ा असर लोगों के विस्थापन का है; यहां 1.4 करोड़ से ज्यादा लोगों के घर हमेशा के लिए पानी में डूबने का तुरंत खतरा है।”
इसमें यह भी कहा गया है कि यह अंतर तटीय इलाकों की कमजोरी और जोखिम का आकलन करने वाले पैमानों को मजबूत और व्यापक बनाने की जरूरत को रेखांकित करता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इंसानी जिंदगी और विस्थापन के रूप में मापे जाने वाले सामाजिक जोखिमों को भी वित्तीय रूप से आंके जाने वाले जोखिमों के बराबर ही प्राथमिकता मिले।
इसमें कहा गया है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से जन-स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। इसके कारण तटीय इलाकों में स्वास्थ्य और साफ-सफाई के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचता है, पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ता है, साफ-सफाई की व्यवस्था बाधित होती है, चोट लगने और मौत का जोखिम बढ़ता है, और मानसिक तनाव भी बढ़ता है।
समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी और जमीन के धंसने के मिले-जुले असर से बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है, तटीय पारितंत्र खराब हो रहे हैं और जान-माल, आजीविका और जरूरी जलीय परिस्थितिकी तंत्र सेवाओं व आवासों का नुकसान भी बढ़ रहा है। भाषा प्रशांत दिलीप
दिलीप

Facebook


