मिशन आर्टेमिस-दो : चांद के अवलोकन और फोटोग्राफी के लिए कैसे तैयार हुआ दल
मिशन आर्टेमिस-दो : चांद के अवलोकन और फोटोग्राफी के लिए कैसे तैयार हुआ दल
( गार्डन ओसिन्स्की, वेस्टर्न यूनिवर्सिटी )
लंदन, आठ अप्रैल (द कन्वरसेशन) मिशन आर्टेमिस-दो के दल ने अब तक का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तक मानव की यात्रा का यह रिकॉर्ड पहले अपोलो-13 के नाम था। मिशन आर्टेमिस-दो के दल ने चंद्रमा के दूरस्थ हिस्से का चक्कर (फ्लाईबाय) भी पूरा किया और चंद्रमा की सतह की शानदार तस्वीरें भेजीं।
मैं एक प्रोफेसर, अन्वेषक और ग्रह भूवैज्ञानिक हूं, जो उल्कापिंड प्रभाव संरचनाओं के अध्ययन में विशेषज्ञता रखता हूं। मैं प्रथम आर्टेमिस लूनर सरफेस साइंस टीम का सदस्य भी हूं और आर्टेमिस अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भूविज्ञान प्रशिक्षण विकसित करने में नासा का सहयोग कर रहा हूं।’’
यह फ्लाईबाय विशेष रूप से रोमांचक था क्योंकि इसने चंद्रमा की सतह का एक नया और अद्भुत दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। इसने ह्यूस्टन, टैक्सास स्थित नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर में मिशन कंट्रोल के नए विज्ञान दल और ‘साइंस इवैल्यूएशन रूम (एसईआर)’ के संचालन का पहला परीक्षण भी किया।
मिशन आर्टेमिस-दो के दल को चंद्रमा की सतह पर भू-आकृतिक संरचनाओं का अवलोकन करते और उनकी तस्वीरें लेते देखना बेहद शानदार था। वे मेरे साथ उत्तरी लैब्राडोर में मुशुआउ इनु फर्स्ट नेशन के क्षेत्र में स्थित कामेस्टास्टिन झील प्रभाव संरचना में प्राप्त अपने प्रशिक्षण को व्यवहार में लागू कर रहे थे।
चंद्रमा का नया दृश्य
अपोलो मिशनों में यान चंद्रमा की सतह से लगभग 110 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करते थे। इसके विपरीत आर्टेमिस-दो कहीं अधिक ऊंचाई यानी चंद्रमा की सतह से लगभग 6,545 किलोमीटर पर था।
इस अधिक दूरी के कारण दल चंद्रमा को एक पूर्ण डिस्क के रूप में देख पाया जिसमें उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के निकट के क्षेत्र भी शामिल थे।
दल आर्टेमिस-दो विज्ञान कार्यक्रम के तहत चंद्रमा की सतह की विभिन्न भू-आकृतिक संरचनाओं की लक्षित तस्वीरें लेने में भी सक्षम रहा। इन अध्ययनों का एक प्रमुख उद्देश्य भविष्य के मिशनों, विशेष रूप से 2028 तक प्रस्तावित आर्टेमिस-चार के साथ चंद्रमा की सतह पर वापसी के लिए जानकारी उपलब्ध कराना है।
नयी विज्ञान टीम
मिशन के दौरान नासा के लाइवस्ट्रीम कार्यक्रम की एक प्रमुख झलक दो अच्छे मित्रों—कनाडाई अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन और विज्ञान अधिकारी केल्सी यंग—के बीच सीधी बातचीत रही।
विज्ञान अधिकारी वे वरिष्ठ फ्लाइट कंट्रोलर होते हैं जो आर्टेमिस मिशनों के दौरान चंद्र विज्ञान और भूविज्ञान से जुड़े उद्देश्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
वे मिशन कंट्रोल की व्यापक टीम और आर्टेमिस-दो विज्ञान टीम के बीच मुख्य कड़ी के रूप में काम करते हैं। यह विज्ञान टीम एक अलग कक्ष में होती है, जिसे ‘साइंस इवैल्यूएशन रूम (एसईआर)’ कहा जाता है।
विज्ञान अधिकारी और यह मूल्यांकन कक्ष दोनों ही नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम में नए हैं; अपोलो कार्यक्रम के दौरान ये मौजूद नहीं थे।
हम चंद्रमा की सतह पर पहले आर्टेमिस मिशन के लिए एसईआर की संरचना और भूमिकाएं तैयार कर रहे हैं, लेकिन वास्तविक मिशन जैसा अनुभव इन व्यवस्थाओं को परखने और बेहतर बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है।
चंद्र भूविज्ञान का त्वरित प्रशिक्षण
यदि आपने नासा के लाइवस्ट्रीम में अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा दी गई भूवैज्ञानिक व्याख्याएं सुनी होंगी, तो आप प्रभावित हुए होंगे। मैं भी हुआ था। उनका ज्ञान इस बात का प्रमाण है कि चयन के बाद से नासा ने उन्हें कितना गहन प्रशिक्षण दिया है।
सबसे पहले, दल ने “लूनर फंडामेंटल्स” नामक एक सप्ताह का पाठ्यक्रम किया। इस कक्षा-आधारित प्रशिक्षण में उन्हें चंद्र भूविज्ञान की मूल बातें और चंद्रमा की सतह को आकार देने वाली प्रक्रियाओं, मुख्य रूप से उल्कापिंड टकराव और ज्वालामुखीय गतिविधियों के बारे में बताया गया।
बीस वर्षों से अधिक समय तक पढ़ाने के अनुभव से मैं जानता हूं कि भूविज्ञान सीखने के लिए सबसे अच्छी जगह फील्ड है। यही कारण है कि नासा ने अंतरिक्ष यात्रियों को अमेरिका, आइसलैंड और कनाडा के विभिन्न स्थलों पर भी प्रशिक्षण दिया।
सितंबर 2023 में प्रशिक्षण के शुरुआती चरण में, दल के तीन सदस्यों हैनसेन, क्रिस्टिना कोच और बैकअप सदस्य जेनी गिब्बन्स ने उत्तरी लैब्राडोर में कामेस्टास्टिन झील प्रभाव संरचना पर प्रशिक्षण लिया। बाद में अगस्त 2024 में पूरा दल आइसलैंड भी गया।
कामेस्टास्टिन झील प्रशिक्षण अभियान
कामेस्टास्टिन झील का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह चंद्र सतह जैसा परिदृश्य प्रस्तुत करती है।
यह क्रेटर लगभग 3.5 करोड़ वर्ष पहले एक से दो किलोमीटर व्यास वाले क्षुद्रग्रह के टकराने से बना था। यहां ‘ब्रेशिया’ और ‘इम्पैक्ट मेल्ट’ जैसी चट्टानें अच्छी तरह संरक्षित हैं। साथ ही यह क्रेटर ‘एनोर्थोसाइट’ नामक चट्टान से बना है जो चंद्रमा के उच्चभूमि क्षेत्रों में पाई जाती है।
इस प्रशिक्षण के दौरान मैंने न केवल भूविज्ञान प्रशिक्षण में भाग लिया, बल्कि अभियान की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी संभाली।
कामेस्टास्टिन उत्तरी लैब्राडोर के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित है, इसलिए हम ट्विन ऑटर विमान से वहां पहुंचे और अस्थायी बेस कैंप स्थापित किया। तंबू, भोजन और अन्य आवश्यक सामान सहित 16 लोगों के लिए सभी व्यवस्थाएं करनी पड़ीं। इसके बाद हमने नावों के जरिए क्रेटर के आसपास भ्रमण किया।
इनु समुदाय की चंद्रमा से जुड़ी मान्यताएं
कामेस्टास्टिन झील और इसके आसपास का क्षेत्र मुशुआउ इनु फर्स्ट नेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रशिक्षण के दौरान इस समुदाय के साथ समन्वय करना मेरी भूमिका का महत्वपूर्ण हिस्सा था।
मेरे लिए एक खास अनुभव वह था जब हमने एक रात आग के पास बैठकर इनु समुदाय के संरक्षकों से चंद्रमा के उनके लिए महत्व के बारे में सुना—जैसा कि दुनिया भर के कई आदिवासी समुदायों के लिए होता है।
उन्होंने ‘त्शाकेपेश’ नामक एक इनु युवक की कहानी भी सुनाई, जो सिखाती है कि साहस, कड़ी मेहनत और दृढ़ता से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है।
जब आर्टेमिस-दो दल अपनी यात्रा से लौट रहा है, तो मुझे इन मूल्यों के साथ इसकी समानता स्पष्ट दिखती है। इस दल ने दुनिया को दिखाया है कि यदि हम साहस, कड़ी मेहनत, धैर्य और विनम्रता के साथ एक साझा लक्ष्य की दिशा में काम करें, तो असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव
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