नेपाल ने संकट के समय भारत के प्रयासों की सराहना की, प्रधानमंत्री मोदी को बताया ‘अत्यंत उदार’
नेपाल ने संकट के समय भारत के प्रयासों की सराहना की, प्रधानमंत्री मोदी को बताया ‘अत्यंत उदार’
(दीपक रंजन)
देवीघाट(नेपाल) 29 अगस्त (भाषा) नेपाल ने देश में आयी विनाशकारी बाढ़ और 600 से अधिक लोगों की जान जाने के कारण उत्पन्न संकट के समय मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ‘अत्यंत उदार’ बताया।
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने ‘पीटीआई वीडियो’ से बातचीत में कहा कि भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह पुनर्निर्माण कार्यों के लिए उदारता से सहायता देगी।
नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिम नद के तटबंध तोड़ देने के कारण बुधवार को मध्य नेपाल में भीषण जल प्रवाह और मलबा बहकर आने से कई बस्तियां और गांव, सैकड़ों मकान, वाहन, सड़क, पुल के साथ साथ कई पन बिजली परियोजनाएं भी बह गयीं।
इस त्रासदी में 2400 से अधिक लोग अभी तक लापता हैं और करीब 2500 लोगों को बचावकर्ताओं ने बचाया है। बचावकर्ता मौसम की मार के बीच लगातार प्रयास कर रहे हैं।
भारत ने बुधवार से नेपाल के बाढ़ पीड़ित इलाकों में 57.6 टन राहत सामग्री भिजवाई है। काठमांडू के अनुरोध के बाद 11 सदस्यीय भारतीय दल पहुंच चुका है जिसमें चिकित्सा अधिकारी एवं सुरंग से बचाव करने के कार्यों में विशेषज्ञ शामिल हैं जो स्थानीय अधिकारियों की मदद करेंगे।
बाढ़ की स्थिति और पुनर्निर्माण के बारे में पूछे जाने पर नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा, ‘हम इस संकट से चरणों में निपट रहे हैं। हमारी फौरी प्राथमिकता उन लोगों को बचाना है जिन्हें बचाया जा सकता है, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पनबिजली संयंत्रों में फंसे हुए हैं। नेपाली सेना ने 1,930 लोगों को, जिनमें कई विदेशी भी शामिल हैं, सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।’
उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान धुनचे, रसुवा और स्याफ्रु बेसी जैसे इलाकों में हवाई रास्ते से राहत सामग्री पहुँचाने पर भी है, क्योंकि सड़कें बंद होने की वजह से ये इलाके कट गए हैं।
नेपाल के वित्त मंत्री का कहना है कि एक बड़ी चुनौती उन शवों को संभालना है जो बहकर चितवन और नवलपुर की ओर और शायद सीमा के पार चले गए हैं। अगले चरण में जल्द संकट से उबरने पर ध्यान दिया जाएगा, जिसमें अस्थायी आश्रय और ‘काम के बदले नकद’ (कैश-फॉर-वर्क) जैसे कार्यक्रम शामिल होंगे; इसके बाद पुनर्निर्माण का मुश्किल काम होगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या नेपाल दूसरे देशों से मदद लेगा, तो वागले ने कहा, ‘बिल्कुल। भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी बहुत उदार रहे हैं। 2015 में जब भूकंप आया था, तब मैं सरकार में था और मुझे याद है कि भारत सरकार की उदारता वास्तव में सराहनीय थी।’’
उन्होंने कहा कि इस समय नयी दिल्ली से विशिष्ट सामान भी हवाई जहाज़ से मंगाया गया है।
वागले ने कहा कि पुनर्निर्माण के लिए भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह उदारता से मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि सभी पड़ोसी देशों से भी ऐसी ही मदद मिल रही है।
भाषा दीपक दिलीप माधव
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