नेपाल बाढ़: बचाव और राहत अभियानों में शामिल हुए जिंदा बचे लोग

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नेपाल बाढ़: बचाव और राहत अभियानों में शामिल हुए जिंदा बचे लोग

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  • Publish Date - September 5, 2026 / 03:10 PM IST,
    Updated On - September 5, 2026 / 03:10 PM IST

नुवाकोट, पांच सितंबर (भाषा) नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ में अपने प्रियजन को खोने और लापता परिजन की तलाश के बीच जिंदा बचे कई लोग अब प्रभावित दूसरे लोगों की मदद के लिए राहत कार्यों में जुट गए हैं।

सुदीप कुमार न्यौपाने (31) पिछले महीने आई बाढ़ में बच गए, हालांकि उनके छोटे भाई और एक करीबी सहयोगी पानी में बह गए।

दो दिन तक शोक मनाने के बाद वह राहत कार्यों में शामिल हो गए और रासुवा में विस्थापित लोगों को भोजन व अन्य सहायता बांटने में मदद करने लगे। काठमांडू पोस्ट समाचार पत्र ने शनिवार को यह जानकारी दी।

नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई शहरों व गांवों को तबाह कर दिया। इस आपदा में 1,300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 4,900 लोग अब भी लापता हैं।

न्यौपाने बाढ़ के बारे में ग्रामीणों का आगाह करने में मदद कर रहे थे, तभी वह अपने 27 वर्षीय भाई प्रदीप और करीबी जनक के साथ बाढ़ की तेज धारा में फंस गए।

तीनों लोग सुरक्षित स्थान की ओर वापस जा रहे थे, क्योंकि उन्हें बाढ़ आने की चेतावनी मिल गई थी। इसके कुछ ही देर बाद बाढ़ ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया और प्रदीप तथा जनक बह गए। न्यौपाने ऊपर की ओर भागकर अपनी जान बचाने में सफल रहे।

दो दिन शोक मनाने के बाद न्यौपाने फिर राहत कार्यों में लौट आए क्योंकि विस्थापित लोगों को भोजन और आश्रय की जरूरत थी तथा स्थानीय प्रशासन के पास कर्मचारियों की कमी थी।

समाचार पत्र की खबर के अनुसार उन्होंने कहा, “मैं किस्मत से बच गया। जब तक जीवित रहूंगा, समाज और लोगों की सेवा करता रहूंगा।”

पड़ोसी जिले नुवाकोट में सुचित जोशी भी तलाश और बचाव अभियान में लगातार मदद कर रहे हैं, जबकि उनके परिवार के चार सदस्य- पत्नी, सात साल की बेटी, भाभी और भतीजा—अब भी लापता हैं। ‘ऑनलाइनखबर’ पोर्टल ने यह जानकारी दी।

तलाश अभियान के दौरान जोशी को अपने चाचा और एक भतीजे का पता चला। इसके बाद बचाव कार्य में जुट गए और पांच अन्य लोग उनकी टीम में शामिल हो गए।

इस समूह ने बाढ़ में फंसे लोगों की मदद की और एक बुजुर्ग महिला को भी बचाया, जो अपने घर के सामने बाढ़ के पानी में फंस गई थी। उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

जोशी सुरक्षा कर्मियों के साथ मिलकर अपने लापता परिजन की तलाश भी कर रहे हैं। एक तलाश अभियान के दौरान त्रिशूली नदी से तीन शव बरामद किए गए, लेकिन वे बुरी तरह क्षत-विक्षत थे और उनकी पहचान नहीं हो सकी।

अपने प्रियजनों की तलाश के बीच भी जोशी आपदा से प्रभावित लोगों की मदद करते रहे।

समाचार पोर्टल के अनुसार उन्होंने कहा, “मैं इसे सहन कर रहा हूं और अब भी बचाव कार्य जारी रखे हुए हूं।”

भाषा जोहेब अविनाश

अविनाश