नेपाल: विपक्ष ने पुनर्वास की व्यवस्था किए बगैर बस्तियों को तोड़ने को लेकर सरकार को घेरा
नेपाल: विपक्ष ने पुनर्वास की व्यवस्था किए बगैर बस्तियों को तोड़ने को लेकर सरकार को घेरा
(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 11 मई (भाषा) नेपाल में विपक्षी सांसदों ने बालेंद्र शाह नीत सरकार द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में भूमिहीन लोगों की अस्थायी बस्तियों (झुग्गी-झोपड़ी बस्ती) को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के ध्वस्त किये जाने के कदम की सोमवार को आलोचना की।
सरकार ने पिछले दो सप्ताह में काठमांडू में 15,000 से अधिक भूमिहीन लोगों को बेदखल करते हुए करीब 4,000 ढांचों को ध्वस्त किया है। सरकार का कहना है कि ये निर्माण सरकारी जमीन और नदी किनारे के इलाकों में अवैध रूप से किए गए थे।
विपक्षी दलों के मुख्य सचेतकों ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष डोल प्रसाद अर्याल से मुलाकात की। इसके बाद संसद के बजट सत्र की पहली बैठक में विपक्षी सांसदों ने सरकार की कार्रवाई की तीखी आलोचना की।
राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की सांसद खुशबू ओली ने भूमिहीन लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना बस्तियां तोड़े जाने का विरोध किया।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद युवराज दुलाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने प्रभावित लोगों को समय पर सूचना दिए बिना अंधाधुंध तरीके से बुलडोजर चलाए।
उन्होंने कहा, “भूमिहीन लोगों की बेदखली के मामले में सरकार पर क्यों नहीं आत्महत्या के लिए उकसाने का अभियोग तय किया जाना चाहिए?”
नेपाल के 28 प्रमुख नागरिकों द्वारा जारी संयुक्त बयान के अनुसार, बेदखली अभियान के कारण अब तक दो लोगों ने आत्महत्या कर ली है जबकि गर्भवती महिलाओं और बच्चों समेत हजारों लोग बेघर हो गए हैं तथा स्वास्थ्य सेवा व शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
नेपाली कांग्रेस के सांसद निष्कल राय ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई।
इससे पहले भी विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समाज संगठनों ने तोड़फोड़ अभियान को लेकर सरकार की आलोचना की थी।
पिछले सप्ताह नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी कर सरकार को निर्देश दिया था कि उचित पुनर्वास योजना के बिना भूमिहीन लोगों को न हटाया जाए।
भाषा खारी संतोष
संतोष

Facebook


