नेपाल ने लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया

नेपाल ने लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया

नेपाल ने लोकतंत्र और स्वतंत्रता के लिए प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया
Modified Date: January 30, 2026 / 02:52 pm IST
Published Date: January 30, 2026 2:52 pm IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, 30 जनवरी (भाषा) नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों और आम जनता से नागरिक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों की आकांक्षाओं को साकार करने की दिशा में अपने प्रयास समर्पित करने का आग्रह किया।

नेपाल में हर वर्ष स्थानीय विक्रम संवत कैलेंडर के अनुसार माघ माह की 10 से 16 तारीख तक शहीद सप्ताह मनाया जाता है और अंतिम दिन शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष शहीद दिवस शुक्रवार यानी 30 जनवरी को पड़ा।

इस दिन शुक्रराज शास्त्री, धर्मभक्त, दशरथ चंद और गंगालाल श्रेष्ठ सहित उन सभी शहीदों के बलिदान को याद किया जाता है, जिन्होंने उस समय के निरंकुश राणा शासकों के खिलाफ संघर्ष किया था। इन चारों ने 1941 में अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिसके परिणामस्वरूप 1950 में देश में लोकतंत्र की स्थापना हुई।

यह सितंबर 2025 में ‘जेन जेड’ के नेतृत्व में हुए आंदोलनों के बाद पहला शहीद दिवस है, जिनके कारण केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी।

राष्ट्रपति पौडेल ने अपने संदेश में राजनीतिक दलों, आम जनता और सभी संबंधित पक्षों से नागरिक स्वतंत्रता, लोकतंत्र और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए शहीद हुए लोगों के सपनों को साकार करने के लिए ईमानदारी से प्रयास करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि शहीदों के बलिदान से प्राप्त संघीय लोकतांत्रिक गणतांत्रिक शासन व्यवस्था के माध्यम से सतत शांति, सुशासन, विकास और समृद्धि की आकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।’’

प्रधानमंत्री सुशीला कार्की, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और अन्य कई लोगों ने काठमांडू के लैनचौर स्थित शहीद स्मारक पर चार प्रमुख शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

पांच मार्च को होने वाले आम चुनावों से पहले अंतरिम सरकार का नेतृत्व कर रहीं कार्की ने कहा कि शहीदों के साहस, जागरूकता और संकल्प के कारण देश आज बदलाव के ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है।

कार्की ने कहा, ‘‘जेन जेड आंदोलन में शहीद हुए वीर योद्धाओं को सलाम। इस आंदोलन ने न्याय, समानता, जवाबदेह शासन और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदों को फिर से जगाया है। शासन के मूल्यों, नैतिकता और नागरिकों के सम्मान पर आधारित राष्ट्र-निर्माण की जिम्मेदारी हर शासक की स्मृति में सदैव बनी रहनी चाहिए।’’

भाषा गोला अविनाश

अविनाश


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