काठमांडू, 30 अगस्त (भाषा) काठमांडू में त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल के बाहर अपने लापता रिश्तेदारों को ढूंढ रही एक महिला ने वहां जमा हुए पत्रकारों से, पूछा, ‘‘क्या आपके कैमरे हमारे लोगों को वापस ला पाएंगे?’’
‘नेपाली टाइम्स’ समाचार वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला के रिश्तेदारों ने उसे सांत्वना देने की कोशिश की। दिल कुमारी मसरांगी मगर नामक महिला अस्पताल के गेट पर अपने लापता जीजा और भांजे की तस्वीरें लगा रही थी। उनके साथ ही वहां मृतकों की तस्वीरें और अब भी लापता लोगों के नामों की लंबी सूची भी लगी थी।
उसने पत्रकारों से इस उम्मीद में अपनी कहानी साझा करने को कहा कि शायद किसी ने, कहीं न कहीं, उनके रिश्तेदारों को देखा हो।
महिला ने ‘नेपाली टाइम्स’ से कहा, ‘‘उम्मीद करने के अलावा अब कुछ नहीं बचा है। भले ही सिर्फ़ उनके शव ही मिलें, कम से कम हमें पता तो चल जाएगा।’’
गत 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल में आई अचानक बाढ़ के चार दिन बाद, अस्पताल अब सिर्फ़ घायलों के इलाज की जगह नहीं रह गए हैं; बल्कि यहां परिवार अपने लापता लोगों को ढूंढ रहे हैं और फॉरेंसिक टीमें दूर से बहकर आए शवों की पहचान करने में जुटी हैं।
नेपाल बाढ़ में रविवार तक मरने वालों की संख्या 700 के पार पहुंच गई, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में, लापता रिश्तेदारों को ढूंढ रहे परिवार तस्वीरें और दूसरी जानकारी लेकर पहुंचे हैं।
कुछ रिश्तेदारों के लिए, यह खोज कई अस्पतालों तक फैल गई है। ‘माईरिपब्लिका’ के मुताबिक, सिंधुपालचोक के चौतारा की रहने वाली सोनिया केसी अपने लापता भाई शिवराम को ढूंढने के लिए तीन दिन तक काठमांडू के अस्पतालों के चक्कर लगाती रहीं।
उनकी तीन बहनें तथा एक और भाई भी इस खोज में शामिल हो गए, जबकि चितवन में मौजूद रिश्तेदारों से नारायणी नदी के किनारे तलाश करने को कहा गया। केसी ने समाचार पोर्टल से कहा, ‘‘जब तक वे मिल नहीं जाते, तब तक उम्मीद बनी हुई है।’’
एक और रिश्तेदार, लोकमाया योंजन, अपने 35 साल के दामाद सोम बहादुर तमांग को ढूंढ रही थीं, जो स्याफ्रुबेसी से परिवार से संपर्क करने के बाद लापता हो गए थे। उन्होंने न्यूज़ पोर्टल को बताया कि उनके साथ यात्रा कर रहे छह लोगों में से सिर्फ़ एक ने बाद में संपर्क किया था।
भाषा वैभव सुरेश
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