Petroleum Price Reduce News: 10 प्रतिशत तक सस्ती हो जाएगी पेट्रोल और डीजल की कीमत!.. भीषण युद्ध के बीच किसने किया 5 अरब यूरो के पैकेज का ऐलान..
Petrol and Diesel Price Reduce News: ईरान-अमेरिका तनाव से ऊर्जा संकट, स्पेन ने 5 अरब यूरो पैकेज मंजूर कर पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत दी
Petrol and Diesel Price Reduce News || Image- SAG Infotech Official Blog for Tax & GST file
- ऊर्जा संकट से बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
- स्पेन ने 5 अरब यूरो राहत पैकेज दिया ईंधन पर टैक्स और कीमतें घटाईं गईं
- ईंधन पर टैक्स और कीमतें घटाईं जाएगी
मैड्रिड: मध्य एशिया में जारी ईरान-अमेरिकी युद्ध के चलते दुनियाभर के ऊर्जा सेक्टर में बड़ा असर देखने को मिल रहा है। (Petrol and Diesel Price Reduce News) पेट्रोलियम की आपूर्ति में बाधा की वजह से कई देशों में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसे जरूरी ईंधनों के दाम में बडा इजाफा देखने को मिला है।
5 अरब यूरो के आपातकालीन पैकेज को मंजूरी
इस ऊर्जा संकट के बावजूद कई देश अपने लोगों को राहत पहुँचने के लिए बड़े ऐलान कर रहे हैं। साथ ही कूटनीतिक तरीके से इस संकट को दूर करने और जरूरी सामानों के आपूर्ति को बहाल करने के प्रयास में जुटे हुए है। बात करें स्पेन देश की तो यहां भी ऊर्जा का संकट छाया हुआ है लिहाजा ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में आए झटकों से निपटने के लिए स्पेन ने 5 अरब यूरो के आपातकालीन पैकेज (लगभग 80 उपाय) को मंजूरी दी है।
क्या उठाये जायेंगे प्रमुख कदम?
प्रमुख कदमों में ईंधन और ऊर्जा पर वैट को घटाकर 10% करना (जिससे ईंधन 0.30 यूरो प्रति लीटर तक सस्ता हो जाएगा), बिजली करों में लगभग 60% की कमी करना और परिवहन, (Petrol and Diesel Price Reduce News) कृषि और मत्स्य पालन क्षेत्रों को 0.20 यूरो प्रति लीटर की सब्सिडी प्रदान करना शामिल है। इस योजना का लक्ष्य 2 करोड़ परिवारों और 3 करोड़ कंपनियों को लाभ पहुंचाना है।
Spain approved a €5 billion emergency package (~80 measures) to offset energy price shocks from Iran War.
Key steps include cutting VAT on fuel and energy to 10% (up to €0.30/litre cheaper fuel), reducing electricity taxes by ~60%, and providing a €0.20/litre subsidy for… pic.twitter.com/sm4dGSzifU
— Clash Report (@clashreport) March 20, 2026
जापान के सामने ईरान की शर्त
व्यापारिक दृष्टिकोण से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ में कई देशों के जहाज फंस हुए है। अलग-अलग देश ईरान से संपर्क में है और अपने जहाज़ों के सुरक्षित निकासी के लिए वार्ता कर रहे है। इनमें भारत के भी करीब 22 जहाज शामिल है। इन 22 में से 6 जहाज एलपीजी कैरियर है। (Petrol and Diesel Price Reduce News) भारत सरकार भी ईरानी सरकार से इस संबंध में चर्चा कर रही है। हालाँकि इससे पहले भारत के शिवालिक और नंदा समेत तीन जहाजों को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से हरी झंडी मिल गई थी और वे स्वदेश पहुँच चुके है।
इस बीच ईरानी सरकार ने जापान के सामने सशर्त निकासी का विकल्प रखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास आराघ्ची ने कहा है कि, अगर जापान तेहरान से समन्वय स्थापित करता है तो उनके जहाज़ों को भी स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से सुरक्षित तरीके से रवाना होने दे दिया जाएगा।
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi says Iran will help Japanese ships safely pass through the Strait of Hormuz if they coordinate with Tehran.
Source: Kyodo News pic.twitter.com/e1YgBXOain
— Clash Report (@clashreport) March 21, 2026
ट्रंप नहीं चाहते ईरान के साथ सीजफायर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ चल रहे युद्ध में फिलहाल युद्धविराम (सीजफायर) नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जब एक पक्ष दूसरे पर बढ़त बना रहा हो, तब सीजफायर का कोई मतलब नहीं होता। पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि “हम बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मैं सीजफायर नहीं चाहता।”
“खुद ही खुल जाएगा” स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज को लेकर कहा कि यह एक समय पर “खुद ही खुल जाएगा।” (Petrol and Diesel Price Reduce News) उन्होंने यह भी कहा कि इस रास्ते को सुरक्षित बनाने के लिए कई देशों की मदद की जरूरत है और अगर चीन और जापान जैसे देश इसमें शामिल हों तो अच्छा रहेगा।
क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह एक संकरा समुद्री मार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है। दुनिया का लगभग 20% तेल इसी मार्ग से जहाजों के जरिए गुजरता है, जिससे खाड़ी देशों का तेल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचता है।
इस समुद्री मार्ग की सबसे संकरी चौड़ाई लगभग 33 किमी है और हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल यहां से ट्रांसपोर्ट होता है। इसलिए अगर यहां तनाव या युद्ध की स्थिति बनती है तो वैश्विक तेल प्रासंगिक, उपलब्धता चेन और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। (Petrol and Diesel Price Reduce News) इसी वजह से इसे दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल “चोक-पॉइंट” माना जाता है और जब ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव बढ़ता है तो यह क्षेत्र वैश्विक चर्चा का केंद्र बन जाता है।
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