मोदी के स्वीडन दौरे में प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए खाका पेश, व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
मोदी के स्वीडन दौरे में प्रौद्योगिकी क्षेत्र के लिए खाका पेश, व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य
( तस्वीर सहित )
गोथनबर्ग (स्वीडन), 18 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्वीडन यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रणनीतिक एवं प्रौद्योगिकी संबंधों को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वाकांक्षी खाका पेश किया। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), महत्वपूर्ण खनिज, नवाचार, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रविवार को गोथनबर्ग में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान, मोदी और स्वीडन के एवं उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। स्वीडन की क्राउन प्रिंसेस विक्टोरिया भी बैठक में शामिल हुईं।
दोनों नेताओं ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करने की दिशा में काम करने पर भी सहमति व्यक्त की।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को स्वीडन के प्रतिष्ठित सम्मान ‘‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’’ से सम्मानित किया गया। यह स्वीडन द्वारा किसी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।
मोदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा, ‘‘स्वीडन की मेरी यात्रा कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ संपन्न हुई, जो भारत-स्वीडन संबंधों को नयी ऊर्जा और गति प्रदान करेंगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने, संयुक्त नवाचार साझेदारी के दूसरे संस्करण और भारत-स्वीडन प्रौद्योगिकी और एआई गलियारे की शुरुआत करने से लेकर अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने तक, चर्चाएं अत्यंत सार्थक रहीं।’’
विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया है तथा 2026-2030 के लिए एक संयुक्त कार्ययोजना अपनाई है। यह योजना आर्थिक और सुरक्षा लचीलापन, उभरती प्रौद्योगिकियों, विश्वसनीय कनेक्टिविटी तथा स्थिरता-आधारित सहयोग पर केंद्रित है।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह रणनीतिक साझेदारी चार स्तंभों पर आधारित होगी। इनमें स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद, अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी, उभरती प्रौद्योगिकियां और विश्वसनीय कनेक्टिविटी, और लोगों, धरती, स्वास्थ्य और लचीलेपन से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग के माध्यम से मिलकर भविष्य को आकार देना शामिल हैं।
भारत और स्वीडन ने ‘‘भारत-स्वीडन संयुक्त नवाचार साझेदारी के दूसरे संस्करण की भी शुरुआत की, जिसमें एक डिजिटल संयुक्त विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र की परिकल्पना की गई है और एआई, 6जी, क्वांटम कंप्यूटिंग, महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में गहन सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि एक अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, दोनों देशों ने भारत-स्वीडन टेक्नोलॉजी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कॉरिडोर के विकास का समर्थन किया है। इसका उद्देश्य एआई, डिजिटल परिवर्तन, नवाचार तथा उद्योग, स्टार्टअप और शोध संस्थानों को शामिल करते हुए उन्नत प्रौद्योगिकी साझेदारी में सहयोग को बढ़ावा देना है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों नेताओं ने व्यापार सुविधा तंत्र को मजबूत करने, ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल को बढ़ावा देने और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर नियमित संवाद करने पर भी सहमति व्यक्त की, जिसका उद्देश्य अगले पांच वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को दोगुना करना है।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में 7.75 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था।
दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी संबंधों को मजबूत करने के लिए हाल में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन के महत्व पर भी जोर दिया।
दोनों देशों ने नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने और विशेष रूप से युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने, भारत-स्वीडन लघु एवं मध्यम उद्यम और स्टार्टअप मंच विकसित करने का भी निर्णय लिया।
संयुक्त बयान के अनुसार, भारत और स्वीडन ने ‘स्वीडन में अध्ययन’ और ‘स्वीडन में काम’ जैसी पहल के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और उच्च कुशल पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच सीधी और नियमित हवाई संपर्क की संभावना तलाशने पर भी सहमति जताई गई।
इस यात्रा के दौरान ‘‘विकास भी विरासत भी’’ विषय पर आधारित टैगोर-स्वीडन व्याख्यान शृंखला की घोषणा भी की गई, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक और बौद्धिक जुड़ाव को गहरा करना, लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना, भारत की ‘‘सौम्य शक्ति’ को बढ़ावा देना और वर्ष 2026 को नोबेल पुरस्कार से सम्मानित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की स्वीडन यात्रा के शताब्दी वर्ष के रूप में मनाना है।
दोनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।
संयुक्त बयान में कहा गया है कि उन्होंने ‘‘सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की स्पष्ट और कड़ी निंदा की।’’
दोनों नेताओं ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की भी ‘कड़ी शब्दों में’ निंदा की, और आतंकी ढांचे और सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने का आह्वान किया। पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे।
संयुक्त बयान में दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 1267 प्रतिबंध ढांचे के अंतर्गत सूचीबद्ध आतंकवादियों और आतंकी संगठनों के खिलाफ कठोर एवं समन्वित कार्रवाई की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके साथ ही, आतंक के वित्तपोषण के स्रोतों को समाप्त करने के लिए सतत प्रयास जारी रखने का संकल्प दोनों पक्षों ने लिया, जिसमें संयुक्त राष्ट्र और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत करना शामिल है।
संयुक्त बयान में यह भी कहा गया कि क्रिस्टरसन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तारित स्वरूप में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्वीडन के समर्थन को दोहराया।
मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में स्वीडन के समर्थन के लिए धन्यवाद व्यक्त किया, वहीं दोनों पक्षों ने शांति, सुदृढ़ आपूर्ति शृंखलाओं और सतत आर्थिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
दोनों नेताओं ने भारत-नॉर्डिक साझेदारी के महत्व पर भी जोर दिया।
रविवार को गोथनबर्ग हवाई अड्डे पर क्रिस्टरसन ने मोदी का स्वागत किया।
मोदी इससे पहले 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन का दौरा कर चुके हैं।
मोदी सोमवार सुबह ओस्लो के लिए रवाना हुए। वह चार यूरोपीय देशों नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा पर हैं।
भाषा आशीष मनीषा
मनीषा

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