ब्रिटेन के एनएचएस में गैर श्वेत स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ नस्लभेद बढ़ा : सर्वेक्षण

ब्रिटेन के एनएचएस में गैर श्वेत स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ नस्लभेद बढ़ा : सर्वेक्षण

ब्रिटेन के एनएचएस में गैर श्वेत स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ नस्लभेद बढ़ा : सर्वेक्षण
Modified Date: August 5, 2026 / 10:48 am IST
Published Date: August 5, 2026 10:48 am IST

(अदिति खन्ना)

लंदन, पांच अगस्त (भाषा) ब्रिटेन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में कार्यरत गैर-श्वेत चिकित्सा कर्मियों के खिलाफ नस्लभेदी व्यवहार बढ़ता जा रहा है और उन्हें ‘‘डर्टी फॉरनर्स’’ (घृणित विदेशी) और ‘‘मंकी’’ (बंदर) जैसे अपमानजनक शब्द कहे जा रहे हैं। एक नए सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आयी है।

‘सोसाइटी ऑफ रेडियोग्राफर्स’ (एसओआर) ने कार्यस्थल पर नस्लभेद के अनुभवों के बारे में अपने सदस्यों से जानकारी जुटाई। सर्वेक्षण में बताया गया कि पिछले 18 महीनों में नस्लभेदी घटनाएं काफी बढ़ी हैं। पेशेवर संस्था ने यह भी खुलासा किया कि कुछ मरीजों ने गैर-श्वेत चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से इलाज कराने से भी इनकार कर दिया।

एसओआर के औद्योगिक रणनीति एवं सदस्य संबंधों के कार्यकारी निदेशक डीन रोजर्स ने कहा, ‘‘पिछले डेढ़ वर्ष में नस्लभेद की घटनाओं में आई वृद्धि बेहद चिंताजनक और अस्वीकार्य है। यह हमारे समाज की खराब तस्वीर पेश करती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एनएचएस का विविधतापूर्ण कार्यबल उसकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि भेदभाव, उत्पीड़न, नस्लभेद, धमकाने या डराने-धमकाने जैसी किसी भी तरह की मौखिक या व्यवहारगत हरकत पूरी तरह अस्वीकार्य है और एनएचएस में इसकी कोई जगह नहीं है।’’

एनएचएस में कार्यरत 15 लाख से अधिक कर्मचारियों में करीब 45,000 भारतीय मूल के चिकित्सा पेशेवर हैं, जो विदेश में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों का सबसे बड़ा समूह हैं।

मिडलैंड्स क्षेत्र में कार्यरत एशियाई मूल की एक सोनोग्राफर ने सर्वेक्षण में बताया कि कई बार मरीज उनसे कहते हैं, ‘‘यह देश पहले जैसा नहीं रहा। बाहर से आने वाले लोग यहां आकर हमारी नौकरियां छीन रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी बातें अब पहले से कहीं अधिक सुनने को मिल रही हैं। मीडिया, कुछ राजनीतिक दलों और टीवी चैनलों में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल होने से लोग अब खुलेआम अपने नस्लभेदी विचार व्यक्त करने लगे हैं।’’

एनएचएस के कुल कार्यबल में करीब 21 प्रतिशत कर्मचारी गैर-ब्रिटिश नागरिक हैं, जबकि ‘हेल्थ एंड केयर प्रोफेशंस काउंसिल’ में पंजीकृत प्रत्येक चार रेडियोग्राफर में से लगभग एक ने विदेश में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

सर्वेक्षण के बाद एसओआर ने कहा कि वह अब यह सुनिश्चित करने पर विशेष जोर देगा कि एनएचएस के सभी ट्रस्ट नस्लभेद की हर घटना का रिकॉर्ड रखें, उसके निपटारे की निगरानी करें और आवश्यकता पड़ने पर श्रमिक संघों के साथ मिलकर कार्रवाई करें।

ब्रिटेन में भारतीय मूल के चिकित्सकों और नर्सों के सबसे बड़े संगठन ‘ब्रिटिश एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडियन ओरिजिन’ (बीएपीआईओ) ने भी एनएचएस में भेदभावपूर्ण और नस्लभेदी व्यवहार की बार-बार निंदा की है।

संगठन ने कहा, ‘‘जातीय अल्पसंख्यक समुदायों से आने वाले चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने एनएचएस के निर्माण एवं विकास में अपूरणीय योगदान दिया है और आज भी वे जातीयता, लिंग, जन्मस्थान या राजनीतिक विचारों की परवाह किए बिना सभी मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। वे सम्मान के साथ काम करने और बिना किसी धमकी या हमले के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के हकदार हैं।’’

भाषा गोला सिम्मी

सिम्मी


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