होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाली के लिए सुरक्षा और भरोसा बहाल करना जरूरी

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाली के लिए सुरक्षा और भरोसा बहाल करना जरूरी

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बहाली के लिए सुरक्षा और भरोसा बहाल करना जरूरी
Modified Date: April 10, 2026 / 05:24 pm IST
Published Date: April 10, 2026 5:24 pm IST

( जेनिफर पार्कर, वेस्टर्न आस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी )

क्रॉले, 10 अप्रैल (द कन्वरसेशन) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को युद्धविराम की घोषणा की और इसके बाद तुरंत उम्मीद जगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही जल्द सामान्य हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

ईरान ने युद्ध की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर रोक लगा दी थी।

अगली सुबह भी जलडमरूमध्य में यातायात बेहद सीमित रहा। कुछ ही पोत, जो मुख्य रूप से ईरान से जुड़े थे, वहां से गुजरे, जबकि खाड़ी में इंतजार कर रहे अधिकतर जहाज वहीं रुके रहे। इसके तुरंत बाद ईरान ने घोषणा की कि वह लेबनान पर इजराइल के हमलों के कारण प्रभावी रूप से इस जलडमरूमध्य को बंद करेगा।

वास्तविकता यह है कि जलडमरूमध्य कभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ। इसे “खुला” या “बंद” बताना वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता। जहाजों को रोका नहीं जा रहा है, बल्कि उन्हें वहां से गुजरने को लेकर हतोत्साहित किया जा रहा है।

हाल के हफ्तों में ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की अपनी क्षमता और मंशा दोनों प्रदर्शित की हैं। जहाजों पर हमलों और खतरों के कारण रोजाना गुजरने वाले पोतों की संख्या लगभग 130 से घट गई है। जब तक यह जोखिम बना रहेगा, जहाजों की वहां बड़ी संख्या में आवाजाही नहीं होगी।

ऐसे में स्थिति को कैसे सुधारा जा सकता है?

बातचीत और कार्रवाई दोनों जरूरी

युद्धविराम की घोषणाओं ने स्थिति को स्पष्ट करने के बजाय और अधिक अनिश्चितता पैदा कर दी है।

वॉशिंगटन ने दावा किया है कि जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन तेहरान का संदेश अधिक अस्पष्ट रहा है। इसमें यह संकेत भी शामिल हैं कि जहाजों को गुजरने से पहले ईरानी अधिकारियों को सूचित करना होगा।

कुछ लोग इसे जलमार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने और संभावित रूप से टोल लगाने की दिशा में ईरान का पहला कदम मानते हैं।

यह अस्पष्टता महत्वपूर्ण है, क्योंकि जहाजों की आवाजाही एक व्यावसायिक गतिविधि है, जो जोखिम आकलन पर आधारित होती है। जहाज संचालक और चालक दल केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर निर्णय नहीं लेते, खासकर तब जब हालिया अनुभव यह संकेत देते हैं कि ऐसे बयान टिकाऊ नहीं हो सकते।

भरोसे का महत्व

व्यावहारिक रूप से, जलडमरूमध्य में यातायात बहाल करने की प्रक्रिया दो चरणों में होगी।

पहला चरण है खतरे को कम करना। यह सैन्य, कूटनीतिक या दोनों उपायों के संयोजन से संभव है, लेकिन इससे ईरान की जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता और इच्छा पर वास्तविक असर पड़ना चाहिए।

दूसरा चरण है भरोसा बहाल करना। यदि युद्धविराम के चलते जहाजों पर हमले रुक भी जाते हैं, तब भी जहाज तुरंत वापस नहीं आएंगे। भरोसा हिल चुका है और इसे बहाल होने में समय लगेगा।

विश्वसनीय भरोसा बहाली प्रयासों में शुरुआती दौर में सीमित नौसैनिक निगरानी सहायता पोत शामिल हो सकते हैं। यह उल्लेखनीय है कि व्हाइट हाउस ने युद्धविराम पर भरोसा दिखाने के लिए अमेरिकी झंडे वाले वाणिज्यिक जहाजों को तुरंत सुरक्षा प्रदान नहीं की।

यदि ऐसा किया जाता, तो यह उद्योग को स्पष्ट संकेत देता, आवाजाही पर भरोसा बहाल करने में मदद करता और ईरान के उन दावों को कमजोर करता कि जहाजों को उसकी सेना से अनुमति लेनी होगी।

ईरान के युद्धविराम बनाए रखने के हित को देखते हुए, उसके लिए अमेरिकी नौसैनिक सुरक्षा में चल रहे जहाजों को चुनौती देना मुश्किल होता। लेकिन अमेरिका की हिचकिचाहट ने ईरान को अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर दिया, जिससे जहाज उसके तट के करीब जाने लगे और जलमार्ग पर उसका प्रभाव बढ़ा।

प्रभावी भरोसा बहाली अभियान में व्यापक अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति भी जरूरी होगी, जो निगरानी, सूचना साझा करने और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता प्रदान करे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इसे जल्द स्थापित करना चाहिए, क्योंकि इसकी स्थापना ही भरोसा बहाल करने में मदद करेगी।

ऐसा मॉडल पहले भी देखा गया है। वर्ष 2019 में खाड़ी-ए-ओमान में ईरानी हमलों के बाद स्थापित ‘इंटरनेशनल मेरीटाइम सिक्योरिटी कन्स्ट्रक्ट’ ने बड़े पैमाने पर काफिले संचालन के बजाय पारदर्शिता, समन्वय और भरोसे पर ध्यान केंद्रित किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसी तरह का, लेकिन अधिक प्रभावी दृष्टिकोण फिर अपनाना होगा। यह कोई पूर्ण समाधान नहीं है, लेकिन यह जहाजरानी उद्योग को आवश्यक स्पष्टता और संवाद प्रदान कर सकता है।

कूटनीति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से स्पष्ट और समन्वित संदेश, और वाणिज्यिक जहाजों पर हमले दोबारा होने पर कड़े आर्थिक परिणामों की चेतावनी, भरोसा बहाल करने के लिए जरूरी होंगे।

टोल का मुद्दा

यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि ईरान जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की कोशिश कर सकता है।

कानूनी स्थिति स्पष्ट है। ‘‘यूनाइटेड नेशन्स कन्वेन्शन ऑन द लॉ ऑफ द सी’’ के तहत यह एक अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य है, जहां जहाजों को निर्बाध पारगमन का अधिकार है। ऐसे में शुल्क लगाना इस सिद्धांत के खिलाफ होगा और अन्य महत्वपूर्ण जलमार्गों के लिए खतरनाक उदाहरण बनेगा।

कुछ शुरुआती संकेत हैं कि ईरान इस दिशा में परीक्षण कर रहा है। जहाजों को रेडियो संदेश देकर अनुमति लेने की चेतावनी और पहले सूचना देने के सुझाव इस ओर इशारा करते हैं कि वह जलमार्ग पर अधिक नियंत्रण स्थापित करना चाहता है।

इसका विरोध किया जाना चाहिए। यदि यहां टोल या सीमित प्रतिबंध भी लागू होते हैं, तो इससे समुद्री व्यापार के मूल सिद्धांत ‘नौवहन की स्वतंत्रता’ को नुकसान पहुंचेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय किसी स्थायी ईरानी टोल प्रणाली को स्वीकार नहीं करेगा और यदि ऐसा प्रयास होता है, तो आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

इस बात को लेकर भी सवाल बने हुए हैं कि क्या जलडमरूमध्य में या उसके आसपास बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं। ऐसी आशंकाएं भी अनिश्चितता बढ़ाती हैं और समन्वित अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता को मजबूत करती हैं।

इस संबंध में स्पष्ट और सार्वजनिक आकलन भरोसा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा और इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कुल मिला कर, जहाज तभी होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरना शुरू करेंगे, जब इसे पर्याप्त रूप से सुरक्षित माना जाएगा।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा दिलीप

दिलीप


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