अंतरराष्ट्रीय कानून निष्प्रभावी हुए, यूएनएससी का ‘पी-5’ शिखर सम्मेलन बुलाया जाए : रूस
अंतरराष्ट्रीय कानून निष्प्रभावी हुए, यूएनएससी का ‘पी-5’ शिखर सम्मेलन बुलाया जाए : रूस
(विनय शुक्ला)
मास्को, आठ मार्च (भाषा) रूस ने कहा है कि ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कानून निष्प्रभावी हो गए हैं। उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के पांच स्थायी सदस्यों (पी-5) का शिखर सम्मेलन बुलाने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रस्ताव पर अमल करने का आह्वान किया।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति पुतिन के उस प्रस्ताव पर फिर से विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित करती है, जो उन्होंने कोविड-19 महामारी से पहले दिया था, जिसमें वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा करने के लिए पी-5 (रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) के शिखर सम्मेलन का आह्वान किया गया था।
पेस्कोव ने सरकारी टीवी चैनल रॉसिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “हम सबने अंतरराष्ट्रीय कानून नाम की चीज़ खो दी है… मुझे तो यह भी समझ नहीं आता कि किसी से अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों और सिद्धांतों का पालन करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। असल में, अंतरराष्ट्रीय कानून का अस्तित्व ही खत्म हो चुका है”।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून “कानूनी तौर पर” मौजूद हैं, लेकिन अब “वास्तविक रूप से” नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “हम किसी को यह नहीं बता सकते कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करो, किस कानून का पालन करो? आज कोई भी यह परिभाषित नहीं कर सकता कि वह कानून क्या है।”
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद तनाव में हुई तीव्र वृद्धि का जिक्र करते हुए पेस्कोव ने कहा कि क्षेत्र में स्थिति काफी हद तक अस्थिर हो गई है।
उन्होंने कहा, “यह क्षेत्र काफी हद तक अस्थिर हो गया है, और बड़ी संख्या में क्षेत्रीय संघर्षों और अनसुलझे मुद्दों के संचयी प्रभाव के परिणामस्वरूप आर्थिक और राजनीतिक दोनों तरह के परिणाम सामने आ रहे हैं।”
इस बीच, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि अमेरिका को अपनी व्यापक योजनाओं को स्पष्ट करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि वे मौजूदा अंतरराष्ट्रीय मानदंडों से कैसे संबंधित हैं।
उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा, “हम अक्सर इस बारे में बात करते हैं कि हम किस तरह की दुनिया में रहते हैं, इसे परिभाषित करना चाहते हैं… हमारा मानना है कि अमेरिका को अपनी योजनाओं और यह सब पहले से परिभाषित मानदंडों से कैसे संबंधित है, इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।”
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश

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