होर्मुज जलडमरूमध्य ने दिखाया : वैश्विक राजनीति में अब ‘भौगोलिक स्थिति’ बड़ी ताकत

होर्मुज जलडमरूमध्य ने दिखाया : वैश्विक राजनीति में अब ‘भौगोलिक स्थिति’ बड़ी ताकत

होर्मुज जलडमरूमध्य ने दिखाया : वैश्विक राजनीति में अब ‘भौगोलिक स्थिति’ बड़ी ताकत
Modified Date: April 23, 2026 / 11:39 am IST
Published Date: April 23, 2026 11:39 am IST

( रेनौद फौकार्ट, लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट स्कूल के अर्थशास्त्र विभाग में वरिष्ठ प्राध्यापक )

लंदन, 23 अप्रैल (द कन्वरसेशन) ईरान की सैन्य ताकत कभी भी अमेरिका और इज़राइल के बराबर नहीं थी। ऐसे में उसने अपने पास मौजूद एक अत्यंत प्रभावी हथियार का सहारा लिया और यह हथियार होर्मुज जलडमरूमध्य की ‘भौगोलिक स्थिति’ है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को अवरुद्ध करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल गई है। कच्चे तेल के एक बैरल की कीमत दोगुनी हो गई, जिसका सीधा असर ईंधन, खाद्य पदार्थों से लेकर छुट्टियों तक हर चीज की लागत पर पड़ा है।

इस घटनाक्रम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी अपने रुख पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। अब पूरी दुनिया की नजरें इस जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है।

होर्मुज जलडमरुमध्य पर शायद दुनिया का इतना ध्यान पहले कभी नहीं था जितना आज है।

ईरान के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य एक अत्यंत मूल्यवान भू-राजनीतिक संपत्ति रहा है। इसकी अपेक्षाकृत मजबूत सौदेबाजी की स्थिति ‘गेम थ्योरी’ के एक पारंपरिक सिद्धांत को दर्शाती है, जिसे ‘रुबिनस्टीन बार्गेनिंग’ कहा जाता है।

इस सिद्धांत के अनुसार, किसी भी संघर्ष में पक्षों की ताकत दो बातों पर निर्भर करती है—समाधान न होने की स्थिति में उन्हें कितना नुकसान होगा और समाधान के लिए वे कितने अधीर हैं।

यदि युद्ध जारी रहता है तो ईरान को अपने मिसाइल और ड्रोन भंडार के खत्म होने और बुनियादी ढांचे के नुकसान का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, तानाशाही व्यवस्था होने के कारण वह असंतोष को दबाकर अधिक समय तक इंतजार कर सकता है।

दूसरी ओर, अमेरिका के लिए संघर्ष जारी रखना करदाताओं के अरबों डॉलर खर्च करने जैसा है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के अवरुद्ध होने से ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर अमेरिकी उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए व्हाइट हाउस का धैर्य जल्दी समाप्त हो सकता है।

इस प्रकार, होर्मुज जलडमरूमध्य ने अब तक इस संघर्ष में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया के लिए अपरिहार्य इस जलमार्ग के कारण अमेरिका की स्थिति अपेक्षा से अधिक कमजोर हो सकती है।

‘गेम थ्योरी’ यह भी बताती है कि मजबूत स्थिति हासिल करने के लिए देशों और क्षेत्रों को अपने-अपने ‘होर्मुज’ विकसित करने होंगे। यहां ‘होर्मुज’ से तात्पर्य ऐसी संपत्ति या क्षमता से है जिसकी दूसरों को आवश्यकता हो और जो उनकी सौदेबाजी की शक्ति को मजबूत करे।

यह जरूरी नहीं कि वह ‘होर्मुज’ समुद्री मार्ग ही हो। उदाहरण के लिए, चीन की ताकत वैश्विक विनिर्माण में उसका प्रभुत्व है, जिसके बिना अधिकतर देशों के लिए काम करना मुश्किल है।

उप-सहारा अफ्रीका की ताकत उसके प्राकृतिक संसाधनों में निहित है, जैसे कि दुनिया का ज्यादातर कोबाल्ट कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में होता है। भविष्य में उसकी युवा और बढ़ती आबादी भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बन सकती है, जब बाकी दुनिया तेजी से वृद्ध हो रही है।

यूरोपीय संघ की ताकत उसके एकीकृत एकल बाजार के आकार में रही है, जिसके माध्यम से उसने वैश्विक स्तर पर अपने उत्पादों और मानकों को स्थापित किया है और व्यापार में विशेष लाभ हासिल किया है।

हालांकि, यह बढ़त स्थायी नहीं है। वैश्विक आर्थिक वृद्धि अब चीन, भारत और इंडोनेशिया जैसे देशों से आने की संभावना है, जिससे यूरोप की सौदेबाजी क्षमता कमजोर हो सकती है। शोध बताते हैं कि इस स्थिति से निपटने के लिए यूरोपीय बाजारों का और अधिक एकीकरण और संघ का विस्तार आवश्यक है।

इसी संदर्भ में यह भी माना जा रहा है कि ब्रिटेन किसी न किसी रूप में फिर से यूरोपीय एकल बाजार से जुड़ सकता है, क्योंकि ब्रेक्जिट ने ब्रिटेन और यूरोपीय संघ दोनों की अंतरराष्ट्रीय सौदेबाजी की शक्ति को कमजोर किया है।

संकीर्ण जलमार्ग, व्यापक प्रभाव

ऐसे समय में जब वैश्विक गठबंधन और विभाजन कम स्पष्ट हो गए हैं, ‘होर्मुज’ जैसी रणनीतिक संपत्ति का महत्व और बढ़ गया है। पुराने गठबंधनों और वादों का महत्व काफी हद तक कम हो चुका है।

अमेरिका ने नाटो से अलग होने की धमकी दी है और कनाडा तथा ग्रीनलैंड को अपने में शामिल करने की बात कही है। वहीं, अमेरिका और रूस दोनों ने हंगरी में विक्टर ओर्बान के असफल पुनर्निर्वाचन अभियान का समर्थन किया।

ऐसी दुनिया में, जहां भरोसेमंद गठबंधन कम होते जा रहे हैं, सभी देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएं इतनी परस्पर जुड़ी हुई हैं कि एक देश में छोटा सा बदलाव भी दुनिया के दूसरे हिस्से में बड़ा प्रभाव डाल सकता है। उदाहरण के तौर पर, ईरान के पास तेल टैंकरों की आवाजाही रुकने से ब्रिटेन के सुपरमार्केट में खाद्य आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इन परिस्थितियों में गेम थ्योरी यह संकेत देती है कि सफलता के लिए दो बातें आवश्यक हैं—किसी एक साझेदार पर निर्भरता कम करना और ऐसी क्षमता विकसित करना, जिसके बिना अन्य देश काम न चला सकें।

आने वाले दशकों में वही देश सफल होंगे, जो अपना ‘होर्मुज’ विकसित कर पाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें किसी अन्य के ‘होर्मुज’ पर निर्भर न रहना पड़े।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव

वैभव


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