म्यांमा में 2021 में तख्तापलट का नेतृत्व करने वाले सेना प्रमुख राष्ट्रपति बने

म्यांमा में 2021 में तख्तापलट का नेतृत्व करने वाले सेना प्रमुख राष्ट्रपति बने

म्यांमा में 2021 में तख्तापलट का नेतृत्व करने वाले सेना प्रमुख राष्ट्रपति बने
Modified Date: April 10, 2026 / 05:27 pm IST
Published Date: April 10, 2026 5:27 pm IST

बैंकॉक, 10 अप्रैल (एपी) म्यांमा के सैन्य कमांडर मिन आंग ह्लाइंग ने शुक्रवार को निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। ह्लाइंग ने वर्ष 2021 में आंग सान सू ची की असैन्य सरकार से सत्ता छीनने के बाद से दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश पर कठोर शासन किया।

उनका शपथ ग्रहण समारोह उस आम चुनाव के बाद हुआ, जिसे संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों और मानवाधिकार समूहों ने न तो स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष बताया है।

सू ची की लोकप्रिय ‘नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी’ पार्टी समेत कई अन्य पार्टियों ने इसमें भाग नहीं लिया। ह्लाइंग के सामने सू ची को सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद शुरू हुए गृहयुद्ध को समाप्त करने की बड़ी चुनौती है, जिसका सशस्त्र प्रतिरोध हुआ था।

नाममात्र की लोकतांत्रिक सरकार की ओर वापसी को व्यापक रूप से असैन्य शासन की आड़ में सेना को सत्ता में बनाए रखने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

मिन आंग ह्लाइंग का राष्ट्रपति पद पर आसीन होना सैन्य तानाशाहों की उस परंपरा का अनुसरण करता है, जिसमें वे खुद को देश के सर्वोच्च नेता के रूप में प्रस्तुत करते हैं और पक्षपातपूर्ण चुनाव के माध्यम से अपने शासन को वैधता प्रदान करने का प्रयास करते हैं।

वह संसद द्वारा तीन अप्रैल को कराए गए चुनाव के बाद पांच साल तक राष्ट्रपति के रूप में सेवा देंगे। उनके मंत्रिमंडल के अधिकतर सदस्य भी सेना से जुड़े हैं।

शुक्रवार को शपथ लेने वाले 30 नए मंत्रिमंडल सदस्यों में से 28 वर्तमान या पूर्व जनरल, सैन्य समर्थित ‘यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी’ के सांसद या पिछली सैन्य सरकार के सदस्य हैं।

सैन्य समर्थक गुट के पास दो सदन वाली विधायिका में लगभग 90 प्रतिशत सीट हैं।

शपथ ग्रहण के बाद अपने भाषण में 69 वर्षीय मिन आंग ह्लाइंग ने कहा, ‘‘म्यांमा लोकतंत्र के पथ पर लौट आया है और एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है।’’

उन्होंने युद्धरत जातीय विद्रोहियों के साथ शांति स्थापित करने और दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (आसियान) के साथ सामान्य संबंध बहाल करने का भी संकल्प लिया, जिसने राजनीतिक अस्थिरता से जुड़ी चिंता के बीच म्यांमा पर दबाव बनाए रखा।

मिन आंग ह्लाइंग ने राजधानी नैपीदॉ में नवनिर्मित संसद भवन में प्रथम उपराष्ट्रपति न्यो सॉ (पूर्व जनरल और ह्लाइंग के करीबी सलाहकार) और द्वितीय उपराष्ट्रपति नान नी नी अये (यूएसडीपी के जातीय समूह करेन के राजनेता हैं) के साथ पद की शपथ ली।

दिसंबर और जनवरी में हुए आम चुनाव की व्यापक रूप से आलोचना की गई, जिसका एक कारण यह भी था कि देश के बड़े हिस्से में चल रहे गृहयुद्ध के कारण मतदान नहीं हुआ था।

बैंकॉक स्थित गैर-पक्षपातपूर्ण संगठन ‘एशियन नेटवर्क फॉर फ्री इलेक्शंस’ ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘जुंटा के चुनाव म्यांमा के केवल 42 प्रतिशत भूभाग में एक प्रतिबंधात्मक कानूनी ढांचे के तहत आयोजित किए गए थे, जिसने सैन्य-समर्थित यूनियन सॉलिडेरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी के लाभ के लिए वैध राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर रोक लगा दी थी।’’

वर्ष 2017 में सू ची के नेतृत्व वाली सरकार के तहत, मिन आंग ह्लाइंग ने रोहिंग्या मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ एक कठोर अभियान चलाया, जिसके कारण लाखों लोग बांग्लादेश भाग गए।

इस अभियान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा की गई और कुछ लोगों ने सेना पर नरसंहार में संलिप्त होने का आरोप लगाया।

मानवाधिकार निगरानी संगठन ‘असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स’ के अनुसार, वर्ष 2021 में सेना द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद से लगभग 8,000 नागरिक मारे गए हैं और लगभग 22,208 राजनीतिक बंदी अब भी जेल में बंद हैं। मौजूदा संघर्ष में कुल मौतों की संख्या इससे कहीं अधिक होने का अनुमान है।

म्यांमा की 80 वर्षीय पूर्व नेता सू ची उन आरोपों के लिए 27 साल जेल की सजा काट रही हैं जिन्हें व्यापक रूप से निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित माना जाता है। उनकी पार्टी ने 2015 और 2020 के चुनावों में भारी जीत हासिल की थी।

एपी संतोष वैभव

वैभव


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