करतारपुर गुरुद्वारा की शासी परिषद ने जीर्णोद्धार कार्य में तेजी लाने का निर्णय लिया

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करतारपुर गुरुद्वारा की शासी परिषद ने जीर्णोद्धार कार्य में तेजी लाने का निर्णय लिया

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  • Publish Date - February 19, 2026 / 05:20 PM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 05:20 PM IST

(सज्जाद हुसैन)

इस्लामाबाद, 19 फरवरी (भाषा) करतारपुर गुरुद्वारे के आधिकारिक शासी निकाय ने सिख धार्मिक स्थल के जीर्णोद्धार में तेजी लाने का फैसला किया है।

करतारपुर गुरुद्वारा पिछले साल बाढ़ से प्रभावित हुआ था।

गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर की शासी परिषद की आठवीं बैठक बुधवार को धार्मिक मामलों के मंत्रालय में सचिव साजिद चौहान की अध्यक्षता में आयोजित की गई।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, परिषद ने हाल ही में आई बाढ़ के कारण आवश्यक मरम्मत और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की और बाढ़ को “भारत की जल आक्रामकता” से जोड़ते हुए कहा कि इससे कॉरिडोर परियोजना के कुछ हिस्से प्रभावित हुए हैं।

बयान में कहा गया, “यह निर्णय लिया गया कि बाढ़ से प्रभावित कॉरिडोर के क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत का कार्य तत्काल आधार पर शुरू किया जाएगा।”

परिषद ने कार्य की प्रगति का आकलन करने और कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए दो सप्ताह के भीतर पुनः बैठक करने का संकल्प लिया।

चौहान ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि करतारपुर कॉरिडोर परियोजना मानवीय मूल्यों और अंतरधार्मिक सद्भाव का प्रतीक है और उन्होंने सिख तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं को सर्वोत्तम सुविधाएं प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोड़ा ने पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान के रूप में बैठक में भाग लिया।

अरोड़ा ने कहा कि केंद्र और पंजाब सरकार दोनों सिख तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत और निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए संयुक्त प्रयास कर रही हैं।

गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, योजना आयोग और पंजाब गृह विभाग के प्रतिनिधियों ने इस सत्र में भाग लिया।

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा पाकिस्तान के नरोवाल जिले में रावी नदी के पार स्थित है, जो भारत के डेरा बाबा नानक तीर्थ से लगभग चार किलोमीटर दूर है।

यह गुरु नानक देव का अंतिम विश्राम स्थल है, जिन्होंने अपने जीवन के अंतिम 18 वर्ष करतारपुर में बिताए थे।

भाषा

राखी पवनेश

पवनेश