अमेरिका ने पहले भी कई देशों पर आक्रमण कर नेताओं को सत्ता से हटाया, वेनेजुएला का मामला थोड़ा अलग

अमेरिका ने पहले भी कई देशों पर आक्रमण कर नेताओं को सत्ता से हटाया, वेनेजुएला का मामला थोड़ा अलग

अमेरिका ने पहले भी कई देशों पर आक्रमण कर नेताओं को सत्ता से हटाया, वेनेजुएला का मामला थोड़ा अलग
Modified Date: January 5, 2026 / 12:51 pm IST
Published Date: January 5, 2026 12:51 pm IST

(जुआन जाहिर नारांजो कासेरेस, सनशाइन कोस्ट विश्वविद्यालय)

सनशाइन कोस्ट (ऑस्ट्रेलिया), पांच जनवरी (द कन्वरसेशन) अमेरिका के विशेष बलों ने रविवार तड़के वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को काराकस में स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया और विमान में बिठाकर देश से बाहर ले गए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस न्यूयॉर्क में मादक पदार्थ-आतंकवाद के आरोपों में मुकदमे का सामना करेंगे।

लातिन अमेरिका और कैरेबिया में अमेरिकी हस्तक्षेपों से परिचित किसी व्यक्ति के लिए बुनियादी बात तो पहले जैसी है और वह है एक नेता को अस्वीकार्य मानकर उसपर अत्यधिक प्रभाव के साथ सैनिक बल का इस्तेमाल किया गया, और फिर रातोंरात एक सरकार को गिरा दिया गया।

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लेकिन वेनेजुएला का मामला इसलिए अलग और बहुत चिंताजनक है क्योंकि अमेरिका ने कई महीनों तक बहुत हिम्मत के साथ इस देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। बार-बार बदलते और ढुलमुल कारणों के आधार पर ये सैन्य अभियान चलाए गए और इनके लिए बहुत कम प्रमाण प्रस्तुत किए गए।

यह मामला भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कई विद्वान पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून गंभीर संकट में है।’

वेनेजुएला क्षेत्र का पहला देश नहीं है, जिसके नेता को अमेरिकी हस्तक्षेप या सहमति से सत्ता से हटा दिया गया हो।

साल 1953 में, ब्रिटिश सरकार ने अपने उपनिवेश ब्रिटिश गुयाना (अब गुयाना) का संविधान निलंबित करके केवल 133 दिन बाद चेडी जागन की लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार को हटा दिया था। ब्रिटिश मानते थे कि जागन के सामाजिक व आर्थिक सुधार उनके व्यापारिक हितों के लिए खतरा बन सकते थे।

एक दशक बाद, सीआईए ने जागन की बाद की सरकार को अस्थिर करने के लिए एक लंबा गुप्त अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप 1964 के चुनाव में धांधली हुई और यह सुनिश्चित हुआ कि उनके प्रतिद्वंद्वी फोर्ब्स बर्नहम को जीत हासिल हो।

साल 1965 में, अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने डोमिनिकन गणराज्य में 22,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक भेजे, ताकि 1963 में तख्तापलट के तहत हटाए गए पूर्व राष्ट्रपति जुआन बोश की वापसी को रोका जा सके और क्षेत्र में एक और वामपंथी सरकार बनने से रोकी जाए।

साल 1983 में ग्रेनाडा के प्रधानमंत्री मॉरिस बिशप के हिंसक अपहरण और फांसी के बाद राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने एक आक्रमण का आदेश दिया। रीगन सरकार ने कहा था कि यह कार्रवाई अमेरिकी चिकित्सा छात्रों की सुरक्षा और ग्रेनाडा को ‘सोवियत-क्यूबा उपनिवेश’ बनने से रोकने के लिए आवश्यक थी।

दिसंबर 1989 में, राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश ने 24,000 अमेरिकी सैनिकों के साथ पनामा पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया। इसका मकसद जनरल मैनुअल नोरिएगा को हटाना था, जिन पर मादुरो की तरह ही मादक पदार्थों की तस्करी के आरोप थे। उन्हें बाद में अमेरिका भेजा गया, मुकदमा चलाया गया और जेल में डाल दिया गया।

इसके बाद 2004 में, हैती के राष्ट्रपति जीन-बर्त्रेंड एरीस्टिड को सत्ता से हटाकर अफ्रीका भेज दिया गया। उन्होंने इसे अमेरिका की साजिश के तहत हुआ तख्तापलट और ‘अपहरण’ बताया।

साल 2022 में, फ्रांसीसी और हैती के अधिकारियों ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि फ्रांस और अमेरिका ने मिलकर उन्हें हटाने के लिए काम किया था।

मादुरो का मामला अलग क्यों है?

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इन सभी मामलों में, वाशिंगटन ने उस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया, जिसे उसने लंबे समय तक अपने प्रभाव वाला क्षेत्र माना। जब जब इन देशों की सरकारों ने अमेरिका के हितों को विचारधारा, गठबंधन या विरोध के जरिए खतरे में डाला, तब तब अमेरिका ने हस्तक्षेप किया।

लेकिन 2026 का वेनेजुएला 1983 के ग्रेनाडा या 1989 के पनामा जैसा नहीं है। यह एक बहुत बड़ा देश है, जिसकी जनसंख्या लगभग तीन करोड़ है। वेनेजुएला के पास एक मजबूत सशस्त्र बल हैं, जो वर्षों से अमेरिका के संभावित आक्रमण की तैयारी कर रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह अभियान पूरी तरह से एक अलग वैश्विक संदर्भ में हुआ है।

शीत युद्ध के दौरान, अमेरिकी हस्तक्षेपों की अक्सर निंदा की जाती थी, लेकिन इससे कभी भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वैधता को सीधे तौर पर खतरा नहीं होता था। इसके विपरीत आज मादुरो के खिलाफ अभियान की विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं वाले देश निंदा कर रहे हैं।

कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने इन हमलों को लातिन अमेरिका की ‘संप्रभुता पर हमला’ बताया, जबकि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला डा सिल्वा ने कहा कि इस हमले से ‘अस्वीकार्य सीमा’ पार हुई है और एक ‘अत्यधिक खतरनाक उदाहरण’ पेश हुआ है।

मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शिनबॉम ने कहा कि ये हमले ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन’ हैं।’

यहां तक कि पारंपरिक अमेरिकी सहयोगियों ने भी असंतोष व्यक्त किया।

फ्रांस के विदेश मंत्री ने कहा कि इस अभियान से ‘बल का प्रयोग न करने के सिद्धांत’ का उल्लंघन हुआ है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून की नींव है।

उन्होंने कहा कि स्थायी राजनीतिक समाधान ‘बाहर से थोपे’ नहीं जा सकते।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के एक बयान में कहा गया कि वह इस ‘खतरनाक चलन’ को लेकर बहुत चिंतित हैं, जिसे अमेरिका बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन नहीं किया जा रहा।

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) के तहत, किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता या राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ बल प्रयोग पर प्रतिबंध है।

क्षेत्रीय परिणाम

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लातिन अमेरिका के लिए इसके तात्कालिक परिणाम पहले से ही महसूस किए जा रहे हैं। कोलंबिया ने वेनेजुएला की सीमा पर अपनी सेनाएं तैनात कर दी हैं, जबकि पड़ोसी गुयाना ने अपनी सुरक्षा योजनाएं सक्रिय कर दी हैं।

इस समय यह स्पष्ट नहीं है कि आगे किसी और अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन योजना बनाई गई है या नहीं।

ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका वेनेजुएला को तब तक ‘चलाता’ करेगा जब तक एक ‘सुरक्षित सत्ता हस्तांतरण’ पूरा नहीं हो जाता, लेकिन विश्लेषक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या वाशिंगटन इस तरह की बेमियादी प्रतिबद्धता के लिए तैयार है।

वेनेजुएला के रक्षा मंत्री ने भी ‘आपराधिक आक्रमण’ के खिलाफ लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है।

यह ऑपरेशन लातिन अमेरिका में वेनेजुएला को लेकर पहले से मौजूद विभाजन को और बढ़ा चुका है।

साल 2024 में मादुरो की जीत को तुरंत चुनौती दी गई। मादुरो की सरकार ने जीत का दावा किया, जबकि विपक्ष ने कहा कि उसने जीत हासिल की।

क्षेत्र के देश इस बात को लेकर बंटे दिखे कि किसका दावा सही है। कुछ देशों ने मादुरो की सरकार को मान्यता दी, जबकि अन्य ने विपक्ष का समर्थन किया।

एक व्यापक जोखिम यह है कि वेनेजुएला बड़े देशों के साथ साथ कहीं क्षेत्र के छोटे-छोटे देशों के लिए भी एक उदाहरण न बन जाए। अगर वाशिंगटन बिना कानूनी अनुमति के किसी देश के प्रमुख को पकड़ सकता है, तो वह दूसरों को ऐसा करने से कैसे रोक सकता है?

(द कन्वरसेशन) जोहेब मनीषा

मनीषा


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