Maoist Commander Badse Deva: पूर्व नक्सली कमांडर बारसे देवा का बड़ा खुलासा.. कहा, एनकाउंटर नहीं, बल्कि इस वजह से डाले हथियार, आप खुद भी सुनें चौंकाने वाला दावा

Maoist Commander Badse Deva Interview: देवा, माडवी से प्रभावित था और उसने 2003 में सीपीआई एमएल पीडब्ल्यूजी ज्वाइन किया था। देवा और हिडमा दोनों पुवर्ती के रहने वाले थे। अधिकारियों ने बताया कि देवा हिड़मा को फॉलो करता था और यही वजह थी कि, देवा ने सैन्य रणनीतियों, विस्फोटकों की खरीद, आईईडी लगाने जैसे कामों में महारत हासिल कर ली थी।

Maoist Commander Badse Deva: पूर्व नक्सली कमांडर बारसे देवा का बड़ा खुलासा.. कहा, एनकाउंटर नहीं, बल्कि इस वजह से डाले हथियार, आप खुद भी सुनें चौंकाने वाला दावा

Maoist Commander Badse Deva Interview || Iamge- Prokerala Image

Modified Date: January 7, 2026 / 08:16 am IST
Published Date: January 7, 2026 8:09 am IST
HIGHLIGHTS
  • पूर्व माओवादी कमांडर का बड़ा बयान
  • 75 लाख इनामी देवा ने किया सरेंडर
  • 48 घातक हथियार हुए बरामद

हैदराबाद: सीपीआई (माओवादी) के पूर्व कमांडर और कुख्यात नक्सली रहे बारसे सुक्का उर्फ ​​देवा ने अपने सरेंडर को लेकर कई बड़े दावे किये हैं। देवा ने कहा है कि उन्होंने नक्सलियों के “मुठभेड़ या आत्मसमर्पण” कारण पुलिस के सामने सरेंडर नहीं किया, बल्कि इसलिए कि, पुलिस ने उसे पकड़ लिया था और उसे राजधानी ले आई थी। न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू (Maoist Commander Badse Deva Interview) में देवा ने यह भी बताया कि उन्होंने “मौजूदा स्थिति” को देखते हुए आत्मसमर्पण कर दिया था।

3 जनवरी को किया था तेलंगाना में सरेंडर (PLGA commander surrender)

गौरतलब है कि, पिछले सप्ताह देवा के तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर करने के बाद नक्सल संगठन को बड़ा झटका लगा था। पूर्व नक्सल कमांडर बारसे देवा पर 75 लाख रुपये का इनाम था। देवा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी बटालियन (पीएलजीए) का बटालियन कमांडर था। उसे नक्सलियों के बीच दूसरा सबसे बड़ा आदिवासी नेता माना जाता था। बारसे देवा ने बीते 3 जनवरी को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। उसके साथ 19 दूसरे माओवादियों ने भी तेलंगाना के डीजीपी के सामने हथियार डाल दिए थे।

देवा का दावा, “चढ़ गया था पुलिस के हत्थे’ (Badse Deva arrest claim)

बारसे देवा, पिछले साल नवंबर में आंध्र प्रदेश में मुठभेड़ में मारे गए माडवी हिड़मा के समकक्ष माना जाता था। देवा ने बताया कि हिड़मा के साथ मिलकर उसने माओवादी संगठन के अलग-अलग विभागों में काम किया था। बटालियन कमांडर की जिम्मेदारी मिलने के बाद पिछले डेढ़ साल तक दोनों ने साथ मिलकर काम किया था। आत्मसमर्पण के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए देवा (Maoist Commander Badse Deva Interview) ने कहा कि वह किसी काम से जा रहा था, तभी पुलिस ने उसकी गाड़ी रोकी, उसकी तलाशी ली, उसे पकड़कर हैदराबाद ले आई।

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डायरी में था हथियार डिपो का जिक्र (Badse Deva diary revelation)

देवा ने बताया कि वह “सरेंडर करने के मकसद से आया था लेकिन पकड़े जाने के बाद उसने अपना इरादा बदल दिया।” उसने यह भी बताया कि उसके पास कुछ नकदी पैसे थे जबकि उसकी डायरी में हथियारों के एक डिपो का जिक्र था। पुलिस ने बाद में डिपो में छापेमारी कर हथियारों को बरामद कर लिया। देवा ने यह भी बताया कि इनमें से कुछ हथियार पुलिस से लूटे गए थे।

साथ लाये थे 48 घातक हथियार (Maoist arms recovery Telangana)

बता दें कि, तेलंगाना के डीजीपी शिवधर रेड्डी ने 3 जनवरी को बताया था कि टॉप माओवादी लीडर देवा के आत्मसमर्पण और बड़ी संख्या में हथियारों की बरामदगी ने क्षेत्र में नक्सलियों के संगठन को काफी कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा, “वे 48 की संख्या में हथियार भी लाए हैं। ये बहुत हाई क्वालिटी हथियार हैं। इन हथियारों में एके-47, एलएमजी, एसएलआर, आईएनएसए राइफल और इजरायल में बनी टैवोर सीक्यूबी शामिल हैं।”

शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि सीपीआई (माओवादी) के भीतर काफी संघर्ष चल रहा है। कहा कि, “वे स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना कर रहे हैं। सुरक्षा बलों का दबाव इतना अधिक है कि वे एक जगह से दूसरी जगह नहीं जा पा रहें हैं। पहले वे बहुत आसानी से घूमते-फिरते थे, लेकिन अब यह पूरी तरह से बंद हो चुका है। सुरक्षा बलों की मौजूदगी और कार्रवाई के कारण उनकी आवाजाही पूरी तरह से रूक गई है। इसीलिए उन्होंने अब आत्मसमर्पण करने का फैसला किया है। (Maoist Commander Badse Deva Interview) उन्होंने पुलिस से एक हथियार को छोड़कर बाकी सभी हथियार लूट लिए थे। हमें यह पता लगाना होगा कि उन्होंने वह एक हथियार, यानी क्रॉस क्वार्टर कॉम्बैट (CQB) हथियार,कैसे हासिल किया। लेकिन बाकी सभी हथियार पुलिस से लूटे गए थे।”

दूसरे नक्सलियों ने बताई सरेंडर की वजह (Reasons behind Maoist surrender)

उन्होंने बताया कि, देवा, माडवी से प्रभावित था और उसने 2003 में सीपीआई एमएल पीडब्ल्यूजी ज्वाइन किया था। देवा और हिडमा दोनों पुवर्ती के रहने वाले थे।”
अधिकारियों ने बताया कि देवा हिड़मा को फॉलो करता था और यही वजह थी कि, देवा ने सैन्य रणनीतियों, विस्फोटकों की खरीद, आईईडी लगाने जैसे कामों में महारत हासिल कर ली थी। पुलिस ने बताया कि, “हिड़मा ने प्रमोशन के बाद बटालियन छोड़ दिया था जिसके बाद बटालियन की जिम्मेदारी बारसे देवा को सौंपी गई थी। नक्सल संगठन ने उसे पीएलजीए बटालियन कमांडर के रूप में नियुक्त किया था।”

पुलिस ने कहा कि देवा काफी खतरनाक नक्सली था। वह छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी जैसी कई हमलों से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी कार्यकर्ताओं ने पुलिस को यह भी बताया है कि, (Maoist Commander Badse Deva Interview) उन्हें बताया कि माओवादी संगठन मनमाने तरीके से उन्हें दूरदराज के इलाकों में तैनात कर रहा था। खासकर ऐसे जगह, जहाँ के बारें में उन्हें बिलकुल भी जानकारी नहीं थी। यही वजह रही कि, उन्हें बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

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