यूक्रेन रूस के अंदर ड्रोन के माध्यम से तेल संयंत्रों को बना रहा निशाना
यूक्रेन रूस के अंदर ड्रोन के माध्यम से तेल संयंत्रों को बना रहा निशाना
मास्को, दो मई (एपी) यूक्रेनी ड्रोन रूस के अंदरूनी इलाकों में तेल संयंत्रों को निशाना बना रहे हैं जिससे धुएं के बड़े गुबार उठ रहे हैं जिन्हें अंतरिक्ष से भी देखा जा सकता है और काला सागर के पर्यटन स्थलों पर विषैली बारिश भी हो रही है।
इन हमलों का उद्देश्य रूस के तेल निर्यात को कम करना है क्योंकि तेल निर्यात यूक्रेन पर निरंतर रूसी आक्रमण के लिए धन का एक प्रमुख स्रोत है।
हालांकि आर्थिक प्रभाव अभी तक स्पष्ट नहीं है, क्योंकि ईरान युद्ध के कारण तेल की कीमतों में वृद्धि और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील से क्रेमलिन के खजाने में वृद्धि हुई है।
फिर भी, हमलों की व्यापकता और उनके पर्यावरणीय प्रभाव से युद्ध का असर मोर्चे से दूर आम रूसियों तक पहुंच रहा है।
यूक्रेन के ड्रोन ने दो सप्ताह से भी कम समय में चार बार काला सागर के किनारे तुआपसे शहर में तेल रिफाइनरी और निर्यात टर्मिनल को निशाना बनाया है, जिससे आग लग गई और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। यह शहर सीमा से करीब 450 किलोमीटर की दूरी पर है।
यूक्रेन ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने रूस के पर्म क्षेत्र में एक तेल पंपिंग स्टेशन पर लगातार दो दिनों तक हमला किया है। यह क्षेत्र यूक्रेन से 1,500 किलोमीटर (900 मील) से अधिक दूर है।
रूसी मीडिया ने इन हमलों की खबर दी। हालांकि पर्म के गवर्नर दिमित्री माखोनिन ने केवल इतना कहा कि ड्रोन ने औद्योगिक सुविधाओं को निशाना बनाया है।
बाल्टिक सागर में रूस के सबसे बड़े तेल और गैस निर्यात टर्मिनलों में से एक, उस्त-लुगा पर मार्च के अंत में एक सप्ताह के भीतर तीन बार हमला हुआ। यह यूक्रेन से 800 किलोमीटर (500 मील) से अधिक दूर है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने ऐसे हमलों की तुलना रूस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से की है।
ज़ेलेंस्की ने शुक्रवार को कहा कि रूस को इस साल के आरंभ से ही अपने तेल क्षेत्र पर हुए हमलों के परिणाम स्वरूप कम से कम सात अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने कहा था कि यूक्रेनी खुफिया जानकारी से संकेत मिलता है कि उस्त-लुगा और प्रिमोर्स्क जैसे प्रमुख तेल बंदरगाहों से निर्यात में गिरावट आई है।
लेकिन इसका पूरा आर्थिक प्रभाव अभी भी स्पष्ट नहीं है क्योंकि रूस पश्चिम एशिया संकट से लाभ उठा रहा है।
एपी
राजकुमार पवनेश
पवनेश

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