अमेरिका : संचार रणनीतिकार ने शुरू किया भारतीय-अमेरिकी समुदाय पर केंद्रित मतदाता डेटा मंच

अमेरिका : संचार रणनीतिकार ने शुरू किया भारतीय-अमेरिकी समुदाय पर केंद्रित मतदाता डेटा मंच

अमेरिका : संचार रणनीतिकार ने शुरू किया भारतीय-अमेरिकी समुदाय पर केंद्रित मतदाता डेटा मंच
Modified Date: February 24, 2026 / 11:07 am IST
Published Date: February 24, 2026 11:07 am IST

(योषिता सिंह)

न्यूयॉर्क, 24 फरवरी (भाषा) संचार रणनीतिकार अनंग मित्तल ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय पर केंद्रित एक विशिष्ट मतदाता डेटा मंच की शुरुआत की है।

प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉन्सन के लिए डिजिटल प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके भारतीय मूल के मित्तल ने सोमवार को ‘इंडियन अमेरिकन वोटर एटलस’ शुरू किया। उन्होंने इसे “भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए और उसके बारे में विशेष रूप से तैयार किया गया पहला गैर-पक्षपाती, खुला नागरिक डेटा मंच” बताया।

मित्तल ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, “इस देश में 54 लाख भारतीय-अमेरिकी हैं, जिनमें से 26 लाख मतदान के पात्र हैं।”

उन्होंने कहा कि भारतीय-अमेरिकी अमेरिका में सर्वाधिक आय वाला समूह है और देश के कई अत्यंत प्रतिस्पर्धी संसदीय क्षेत्रों में उनकी उल्लेखनीय उपस्थिति है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने अमेरिकी राजनीति में किसी भी जनसांख्यिकीय समूह की तुलना में सबसे नाटकीय दलगत परिवर्तन किया।

मित्तल के अनुसार, यह मतदाता एटलस सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अधिकतर डेटा को एक निःशुल्क डैशबोर्ड में समाहित करता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मंच डेटा से परे कोई राजनीतिक निष्कर्ष या पूर्वानुमान प्रस्तुत नहीं करता और इसे निष्पक्ष तथा द्विदलीय स्वरूप में तैयार किया गया है।

वर्ष 2026 के कार्नेगी सर्वेक्षण का हवाला देते हुए मित्तल ने कहा कि 2024 में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान ट्रंप की ओर था। लेकिन वर्ष 2020 में स्वतंत्र भारतीय मतदाताओं की संख्या 15 प्रतिशत से 2026 में बढ़कर 29 प्रतिशत हो गई। उन्होंने कहा कि “समुदाय उन सभी के लिए खुला है जो गंभीरता से इससे जुड़ना चाहते हैं।”

मित्तल ने कहा, “एच-1बी वीजा और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड में लंबित मामलों का मुद्दा हमारे समुदाय के एक बड़े हिस्से के लिए सबसे अधिक राजनीतिक परिणाम वाला है। भारतीय मूल के लाखों कामगार और उनके परिवार, दशकों से खिंची ग्रीन कार्ड की कतार में हैं। ये वे लोग हैं जो नियमों का पालन कर रहे हैं, कर दे रहे हैं और अपने अमेरिकी बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं, लेकिन उनके पास समाधान का कोई स्पष्ट संकेत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि इसके ‘सामुदायिक सुरक्षा’ खंड में भारतीय-अमेरिकियों को प्रभावित करने वाले घृणा अपराधों और पक्षपात की घटनाओं का विवरण है। यह डेटा संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) तथा सामुदायिक और मानवाधिकार वकालत समूहों जैसे स्रोतों से लिया गया है।

मित्तल ने कहा कि इसमें एक दशक के दौरान हुई एशियाई-विरोधी, सिख-विरोधी और हिंदू-विरोधी घटनाओं का विवरण तथा वर्ष 2012 के ओक क्रीक गुरुद्वारा नरसंहार से लेकर मंदिरों पर हमलों और सामूहिक हिंसा की घटनाओं का अभिलेख शामिल है।

भाषा मनीषा वैभव

वैभव


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