पुतिन से बोले PM मोदी ‘यह युद्ध का युग नहीं है’, अमेरिका ने किया बयान का स्वागत |

पुतिन से बोले PM मोदी ‘यह युद्ध का युग नहीं है’, अमेरिका ने किया बयान का स्वागत

युद्ध को लेकर पुतिन से की गई प्रधानमंत्री मोदी की बात का स्वागत करते है: पेंटागन अधिकारी Welcomes PM Modi's talks with Putin on war: Pentagon official

Edited By: , September 23, 2022 / 02:19 PM IST

America welcomes the PM Modi statement: वाशिंगटन ,23 सितंबर। अमेरिका ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान का स्वागत किया, जिनमें उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कहा था कि ‘‘यह युद्ध का युग नहीं है।’’ पेंटागन के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर पुतिन से मुलाकात की थी और कहा था, ‘‘आज युद्ध का युग नहीं है और मैंने आपसे इस संबंध में फोन पर बात की थी। ’’

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इस पर पुतिन ने मोदी से कहा था कि वह ‘‘यूक्रेन में जारी संघर्ष को लेकर भारत की चितांओ से अच्छी तरह से वाकिफ हैं और रूस इसे जल्द समाप्त करने की हर संभव कोशिश करेगा।’’

हिंद-प्रशांत सुरक्षा मामलों के सहायक मंत्री डॉ. एले रैटनर ने संवाददाताओं से बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘ हम प्रधानमंत्री के पिछले सप्ताहांत में दिए गए बयानों का स्वागत करते हैं। ’’

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने हाल में संवाददाताओं से कहा था कि प्रधानमंत्री ने जो कहा वह ‘‘सिद्धांतों पर आधारित था जिन्हें वह सही और न्यायोचित मानते हैं। अमेरिका उसका स्वागत करता है।’’

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रैटनर ने कहा कि अमेरिका संघर्ष के त्वरित तथा शांतिपूर्ण समाधान की भारत की प्रतिबद्धता को साझा करता है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम यकीनन इस बात को समझते हैं कि रूस के साथ सुरक्षा साझेदारी को लेकर भारत का लंबा तथा जटिल इतिहास रहा है और वह (भारत) हथियार तथा आयात में विविधता लाने के साथ ही स्वदेशी पर भी कई वर्षों से जोर दे रहा है। हम उन्हें सहयोग देना चाहते हैं।’’

पेंटागन के शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘‘हम दोनों मोर्चों पर भारत को सहयोग देना चाहते हैं और हम ऐसा कर भी रहे है। हम सह-विकास तथा सह-निर्माण में संभावनाएं तलाशने के लिए गहन विचार-विमर्श कर रहे हैं। हम भारत के स्वदेशीकरण को सहयोग देने के तरीके तलाश रहे हैं और जानते हैं कि यह प्रधानमंत्री मोदी तथा वहां की सेना की प्राथमिकता है। ’’