हमारा मन क्यों भटकता है? नये अध्ययन में बताया गया है काम पर ध्यान बनाए रखने के तरीके

हमारा मन क्यों भटकता है? नये अध्ययन में बताया गया है काम पर ध्यान बनाए रखने के तरीके

हमारा मन क्यों भटकता है? नये अध्ययन में बताया गया है काम पर ध्यान बनाए रखने के तरीके
Modified Date: July 1, 2026 / 04:09 pm IST
Published Date: July 1, 2026 4:09 pm IST

(जॉर्डन वेहरमन, सिडनी विश्वविद्यालय)

सिडनी, एक जुलाई (द कन्वरसेशन) आप अपनी डेस्क पर बैठकर एक लघु कथा लिख रहे हैं। आप पूरी तरह ध्यान लगाए हुए हैं, लेकिन कई घंटों के बाद भी आपको समझ नहीं आ रहा कि इसे कैसे खत्म किया जाए। इसलिए आप दौड़ने निकल जाते हैं और अपने विचारों को भी अपने साथ बहने देते हैं और अचानक आपको कहानी का समाधान मिल जाता है।

कभी-कभी, समस्याओं का कोई साफ जवाब नहीं मिलता। “युरेका” वाला समाधान तब मिलता है जब हम उसकी उम्मीद नहीं कर रहे होते, यानी जब हमारा मन भटक रहा होता है। लेकिन हमारा मन भटकता क्यों है? दौड़ने से हमें ऐसा जवाब कैसे मिल जाता है जो डेस्क पर बैठकर नहीं मिल पाता?

अक्सर हम मन के भटकने को नुकसानदायक मानते हैं, लेकिन इससे रचनात्मकता भी बढ़ सकती है। जिन स्थितियों में मन भटकता है, उन्हें बेहतर ढंग से समझकर हम अपने काम और खेल को इस तरह से नियोजित कर सकते हैं कि न सिर्फ समस्याओं का समाधान हो, बल्कि हम उस अनुभव का भी आनंद ले सकें जहां हमारा मन हमें ले जाता है।

पत्रिका ‘कॉन्शियसनेस एंड कॉग्निशन’ में छपे मेरे हालिया अध्ययन का मकसद यह पता लगाना है कि किसी काम के कौन-से पहलू मन भटकने की वजह बनते हैं।

यू आकार का वक्र

लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि काम की कठिनाई के हिसाब से मन का भटकना यू-आकार का वक्र बनाता है।

इस बात को समझने के लिए फिर से एक छोटी कहानी लिखने वाले उदाहरण पर लौटते हैं। हो सकता है कि वह आपके लिए ‘उचित स्तर तक चुनौतीपूर्ण’ हो और आपको काम पर केंद्रित रखे, लेकिन मेरे लिए वह जरूरत से ज्यादा कठिन है। नतीजतन, मेरा ध्यान भटकने लगता है और मेरा मन बार-बार इधर-उधर चला जाता है।

लेकिन, अपने तीन साल के बच्चे को 50वीं बार किताब पढ़कर सुनाना बहुत आसान लगता है। मेरा मन फिर भटकने लगता है।

यही वह घुमावदार वक्र है: चाहे चीजें बहुत आसान हों या बहुत कठिन, लोगों का मन भटकने लगता है।

लेकिन ऐसे शोध जो यह पता लगाते हैं कि क्या मन का भटकना किसी काम की जटिलता के स्तर की वजह से होता है, अक्सर अलग-अलग तरह के कामों की तुलना करते हैं।

दिमाग की नियंत्रण प्रणाली का इस्तेमाल करना

अपने प्रयोग में, हमने 80 प्रतिभागियों से तीन में से कोई एक ऐसा काम करने को कहा जो पूरी तरह से नियंत्रित हो और एक जैसा हो – ये सभी काम दिमाग के ‘इनहिबिटरी कंट्रोल सिस्टम’ (रोकने या काबू करने वाली प्रणाली) से जुड़े थे। यह प्रणाली दिमाग की उस क्षमता के लिए जिम्मेदार है जिससे वह किसी काम को रोक सकता है या किसी प्रतिक्रिया को दबा सकता है।

पहले कार्य में प्रतिभागियों को या तो हर बार “गो” संकेत मिलने पर प्रतिक्रिया देनी होती थी, या फिर कुछ मामलों में खुद को प्रतिक्रिया देने से रोकना होता था। इसे “गो/नो-गो” कार्य कहा जाता है, जिसमें प्रतिभागियों को कुछ स्थितियों में अपनी स्वचालित प्रतिक्रिया को रोककर रखना पड़ता है।

दूसरे कार्य में प्रतिभागियों को या तो दो अक्षरों में से किसी एक, या छह अक्षरों में से किसी एक पर प्रतिक्रिया देनी होती थी। इसे “फोर्स्ड चॉइस” कार्य कहा जाता है। इसमें माना जाता है कि प्रतिभागी सभी संभावित प्रतिक्रियाओं के लिए पहले से तैयार रहते हैं और फिर गलत बटन दबाने से खुद को रोकते हैं।

तीसरे कार्य में प्रतिभागियों को दो संख्याओं में से बड़ी संख्या चुननी होती थी, जबकि यह अनदेखा करना होता था कि कभी-कभी अधिक मान वाली संख्या छोटे आकार में लिखी होती थी। इसे “न्यूमेरिकल स्ट्रूप टास्क” कहा जाता है, जिसमें प्रतिभागियों को असंगत जानकारी (जैसे आकार) को नजरअंदाज कर केवल संख्या के वास्तविक मान के आधार पर निर्णय लेना होता है। यदि दोनों संख्याओं के मान एक-दूसरे के अधिक करीब हों, तो यह कार्य और अधिक कठिन हो जाता है।

पहले दो कामों में, लोगों का ध्यान तब ज़्यादा भटकता था जब उन्हें किसी प्रतिक्रिया को जान-बूझकर रोकना नहीं पड़ता था, और जब उनके पास प्रतिक्रिया देने के लिए सिर्फ़ दो ही विकल्प होते थे। इसी तरह, इन आसान कामों में प्रतिक्रियाएं तेज़ी से और ज़्यादा सही तरीके से दी गईं।

तीसरे काम के नतीजे और भी हैरान करने वाले थे।

जब काम ज़्यादा मुश्किल था — यानी जब संख्याओं का मान एक-दूसरे के करीब थीं — तो लोगों की प्रतिक्रिया धीमी और कम सटीक था। लेकिन काम के मुश्किल होने का मन के भटकने पर कोई असर नहीं पड़ा: लोगों का मन वैसे ही भटकता रहा, लगभग उतना ही जितना आसान काम के दौरान भटकता था।

काम पर ध्यान केंद्रित रखने की तरकीब

इन नतीजों से पता चलता है कि जब हमें अपने ध्यान पर नियंत्रण न करना हो, तो शायद हम ऐसा न करें।

इसलिए, अगर आप अपने काम पर ध्यान बनाए रखना चाहते हैं, तो ऐसी गतिविधि आज़माएं जिसमें कभी-कभी खुद को रोकना पड़े, या ऐसे फैसले लेने पड़ें जहां आसान विकल्प सही न हो। अगर आप चाहते हैं कि आपका मन इधर-उधर घूमे, तो कोई ऐसी गतिविधि आज़माएं जो ज़्यादा स्थिर और एक जैसी हो।

यह जानने के लिए अलग-अलग रणनीतियां अपनाना जरूरी है कि आपके लिए कौन-सी सबसे प्रभावी साबित होती है।

और याद रखें, हर समस्या का समाधान डेस्क पर बैठकर ही नहीं निकलता। कई बार रचनात्मक ढंग से समाधान खोजने के लिए अपने मन को कुछ देर मुक्त रूप से भटकने देना भी जरूरी होता है।

द कन्वरसेशन प्रशांत सुभाष

सुभाष


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