चिनफिंग ने ट्रंप को ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ से किया आगाह, प्राचीन यूनान के इतिहास से क्या मिलती है सीख

चिनफिंग ने ट्रंप को ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ से किया आगाह, प्राचीन यूनान के इतिहास से क्या मिलती है सीख

चिनफिंग ने ट्रंप को ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ से किया आगाह, प्राचीन यूनान के इतिहास से क्या मिलती है सीख
Modified Date: May 19, 2026 / 04:12 pm IST
Published Date: May 19, 2026 4:12 pm IST

( नेविले मोरले, यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटेर )

लंदन, 19 मई (द कन्वरसेशन) चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 15 मई को डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई शिखर वार्ता के दौरान ईसा-पूर्व पांचवीं शताब्दी के यूनानी इतिहासकार थ्यूसाइडिडेस का उल्लेख करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति को परोक्ष रूप से चेतावनी दी।

शी ने अपने शुरुआती संबोधन में कहा, “दुनिया एक नए मोड़ पर आ खड़ी हुई है। क्या चीन और अमेरिका तथाकथित ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ से ऊपर उठकर महाशक्तियों के संबंधों का नया प्रतिमान विकसित कर सकते हैं?”

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति में थ्यूसाइडिडेस का उल्लेख खूब हुआ है। जनवरी में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ‘मेलियन डायलॉग’ की प्रसिद्ध पंक्ति — “शक्तिशाली वही करते हैं जो कर सकते हैं और कमजोर वही सहते हैं जो उन्हें सहना पड़ता है” — का हवाला देते हुए नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था के कमजोर पड़ने की चेतावनी दी थी।

अन्य टिप्पणीकारों ने वेनेजुएला और ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का वर्णन करने के लिए भी इस उद्धरण का इस्तेमाल किया, कुछ ने समर्थन में और कुछ ने आलोचना के तौर पर।

हालांकि, शी ने थ्यूसाइडिडेस के उस विश्लेषण की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें उन्होंने एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का “सबसे वास्तविक कारण” बताया था, हालांकि इसकी चर्चा कम ही हुई थी।

वर्ष 1875 के एक चर्चित अनुवाद में यह पंक्ति इस प्रकार प्रस्तुत की गई थी — “एथेंस का उदय और उससे स्पार्टा में उत्पन्न भय ने युद्ध को अपरिहार्य बना दिया।”

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ ग्राहम एलिसन ने इसी विचार से ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ की अवधारणा विकसित की।

थ्यूसाइडिडेस का मानना था कि इतिहास का अध्ययन भविष्य की घटनाओं को समझने में मददगार हो सकता है। इसी आधार पर एलिसन ने तर्क दिया कि जब स्पार्टा जैसी “स्थापित शक्ति” का सामना एथेंस जैसी “उभरती शक्ति” से होता है, तो परिणाम प्रायः संघर्ष के रूप में सामने आता है।

एलिसन का दावा है कि इतिहास में ऐसे 16 उदाहरणों में से 12 मामलों में युद्ध हुआ, जिनमें दोनों विश्व युद्ध भी शामिल हैं।

इसी संदर्भ में यह प्रश्न उठता है कि क्या शीत युद्ध के बाद वैश्विक महाशक्ति रहे अमेरिका और आर्थिक रूप से तेजी से उभरते चीन के बीच भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है।

एलिसन के इस सिद्धांत पर व्यापक बहस हुई थी। वर्ष 2017 में उन्हें चीन-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में चर्चा के लिए व्हाइट हाउस भी आमंत्रित किया गया था। इसलिए शी द्वारा ‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ का उल्लेख कोई नया विचार नहीं था, बल्कि ट्रंप के पहले कार्यकाल की बहस की याद दिलाने जैसा था।

‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ को लेकर अधिकतर चर्चा एलिसन की व्याख्या पर केंद्रित रही है। बहस इस बात पर हुई कि क्या अमेरिका-चीन संबंधों को इस रूप में देखना सही है और क्या परमाणु हथियारों तथा आर्थिक परस्पर निर्भरता ने इस समीकरण को बदल दिया है।

एलिसन ने इस अवधारणा को चेतावनी के रूप में प्रस्तुत किया था, ताकि दोनों देश टकराव के बजाय सहयोग और समझौते का रास्ता अपनाएं।

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि स्थापित महाशक्ति इस सिद्धांत को ऐसे भी देख सकती है कि संभावित प्रतिद्वंद्वी को उसके पूरी तरह ताकतवर बनने से पहले ही रोक देना चाहिए, भले ही इससे युद्ध की आशंका बढ़ जाए।

इसी कारण शी ने “ट्रैप से बचने” पर जोर दिया। लेकिन चीन के प्रति कठोर रुख रखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल संघर्ष को टालने की रणनीति हो सकती है, ताकि शक्ति संतुलन चीन के पक्ष में और मजबूत हो सके।

लेख में कहा गया है कि एलिसन का सिद्धांत ऐतिहासिक तथ्यों और स्वयं थ्यूसाइडिडेस की व्याख्या — दोनों ही स्तरों पर सवालों के घेरे में है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई ऐतिहासिक संघर्षों को केवल “स्थापित” और “उभरती” शक्तियों के बीच संघर्ष के रूप में देखना अत्यधिक सरलीकरण है। उदाहरण के लिए, क्या प्रथम विश्व युद्ध केवल ब्रिटेन और जर्मनी की प्रतिद्वंद्विता का परिणाम था?

इसके अलावा, थ्यूसाइडिडेस की मूल यूनानी पंक्ति का अनुवाद भी विवादित माना जाता है। अधिक शाब्दिक अनुवाद के अनुसार, “एथेंस के महान बनने से स्पार्टा में भय उत्पन्न हुआ और युद्ध की ओर धकेलने वाली स्थिति बनी।” यह स्पष्ट नहीं है कि युद्ध की ओर कौन “धकेला” गया — केवल स्पार्टा, दोनों पक्ष, या पूरा परिदृश्य?

लेख के अनुसार, थ्यूसाइडिडेस ने इसके बाद युद्ध तक पहुंचने वाली घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया और यह भी दिखाया कि कई मौकों पर परिस्थितियां अलग दिशा ले सकती थीं।

उनका विश्लेषण केवल शक्ति संतुलन तक सीमित नहीं था, बल्कि व्यक्तिगत निर्णयों, भावनाओं और दीर्घकालिक राजनीतिक परिस्थितियों को भी महत्व देता था। इस लिहाज से उनका “ट्रैप” कहीं अधिक जटिल था और उसका परिणाम अनिवार्य रूप से युद्ध नहीं माना जा सकता।

लेख के अनुसार, ट्रंप की यह प्रतिक्रिया एलिसन के सरलीकृत सिद्धांत की भी गलत व्याख्या है कि बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका कमजोर पड़ रहा था लेकिन अब वह “दुनिया का सबसे ताकतवर देश” बन गया है।

‘थ्यूसाइडिडेस ट्रैप’ का सिद्धांत यह नहीं कहता कि स्थापित शक्ति पतन की ओर बढ़ रही है, बल्कि केवल यह बताता है कि उसके सामने अब एक शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी उभर आया है।

द कन्वरसेशन

मनीषा अविनाश

अविनाश


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