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Padma awards 2026: MP की तीन महान हस्तियों को मिला पद्म श्री अवार्ड, पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, साहित्यकार मोहन नागर और कलाकार भगवान दास रैकवार को सम्मान

Padma Shri award: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आज पद्म पुरस्कार पाने वाले लोगों के नाम का ऐलान कर दिया गया है। इनमें देश के कई राज्यों के उन …

Padma awards 2026, image source: ibc24

Padma awards 2026, image source: ibc24

Dr.Anil Shukla
Published: 25 Jan 2026 | 5:28 pmModified: 25 Jan 2026 | 6:04 pm
HIGHLIGHTS
  1. पद्म पुरस्कार पाने वाले लोगों के नाम का ऐलान
  2. मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रत्रकार कैलाशचंद्र पंत का भी नाम
  3. पूरे भारत में बढ़ा रहे हिंदी भाषा का मान

नईदिल्ली: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आज पद्म पुरस्कार पाने वाले लोगों के नाम का ऐलान कर दिया गया है। (Padma awards 2026 list) इनमें देश के कई राज्यों के उन महान लोगों को चुना गया है जिन्होंने अपने काम से देश का मान सम्मान बढ़ाया है।

भारत सरकार ने 2024 में 45 'गुमनाम नायकों' को पद्म पुरस्कार दिए, जिन्होंने समाज, संस्कृति, शिक्षा, कला, विज्ञान और मानवता की सेवा में जीवन समर्पित किया है। (Padma awards 2026 list)  इनमें से ज्‍यादातर नाम ऐसे हैं, जो गांवों कस्‍बों में रहकर लोगों की ज‍िंदगी बदलने का काम कर रहे हैं

इनमें एक नाम मध्य प्रदेश के वरिष्ठ प्रत्रकार कैलाशचंद्र पंत का भी है। सरकार ने उन्हें पद्म श्री के लिए चुना है। हिंदी भाषा के लिए किया जा रहा उनका उल्लेखनीय काम सराहनीय है। (Padma awards 2026 list)  वह इस भाषा का मान पूरे भारत में बढ़ा रहे हैं।

कौन हैं कैलाश चंद्र पंत?

कैलाश चंद्र पंत मध्य प्रदेश के सीनियर जर्नलिस्ट हैं। हिंदी भाषा के सम्मान में किया जा रहा उनका काम वाकई सराहनीय है। (Padma Awards 2026) अपनी शानदार पत्रकारिता के करियर को विराम देने के बाद बीते दो दशकों से वह जनधर्म नाम की साप्ताहिक मैगजीन निकालते हैं। यहीं नहीं उन्होंने महू में स्वध्याय विद्यापीठ की स्थापना की। यही नहीं कैलाश चंद्र पंत ने भोपाल में हिंदी भवन न्यास और कृषि भवन को भी विकसित किया।

कैलाश चंद्र पंत भोपाल से प्रकाशित होने वाली पत्रिका अक्षरा के भी संपादक हैं। उन्हें बृजलाल द्विवेदी सम्मान से नवाजा गया है। यही वजह है कि कैलाश चंद्र पंत को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए इस साल पद्म श्री अवार्ड से नवाजा गया है। वे साहित्य और पत्रकारिता से जुड़े सेमिनारों (संगोष्ठियों) में शामिल रहे हैं, जहां उन्होंने अध्यक्ष या मुख्य वक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।

कौन हैं भगवान दास रायकवार ?

मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड के लोक नृत्य ‘राई’ को जीवित रखने वाले वरिष्ठ कलाकार भगवान दास रायकवार का नाम भी इस​ लिस्ट में शामिल है। (Padma Awards 2026)  उन्होंने दशकों तक इस पारंपरिक नृत्य को सिखाया और देश भर में इसका प्रदर्शन किया। एक साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, उन्होंने अपनी संस्कृति को मिटने नहीं दिया। कला के ल‍िए उन्हे यह सम्‍मान दिय गया।

कौन हैं मोहन नागर ?

Padma awards 2026 list: शिक्षाविद और लेखक जिन्होंने वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना जगाने और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बता दें कि मोहन नागर बैतूल जिले के रहने वाले हैं। मोहन नागर लगातार 32 सालों से बैतूल में जल संरक्षण और शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं। (Padma Awards 2026)  मोहन नागर, एक कर्मठ समाजसेवी और पर्यावरणविद् माने जाते हैं। नागर आदिवासी बाहुल्य बैतूल में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ने अब तक कई जल संरक्षण अभियानों के लिए काम भी किया है, पानी बचाने के लिए कई जागरुकता कार्यक्रम चलाए, जिसके चलते उन्हें जल पुरुष के नाम से पहचाना जाता है।

कुल 45 लोगों को मिलेगा पद्म श्री

बता दें कि इस बार भी भारत सरकार ने गुमनाम हीरोज(Unsung Heroes) को पद्म पुरस्कार के लिए चुना है। (Padma Awards 2026)  इनमें एक पूर्व बस कंडक्टर भी है जिसने दुनिया का सबसे बड़ा मुफ्त पुस्तकालय खोला है। एशिया का पहला मिल्क बैंक खोलने वाले एक बाल रोग विशेषज्ञ और 90 साल की उम्र में अत्यंत दुर्लभ वाद्य यंत्र बजाने वाले व्यक्ति को भी इसके लिए चुना गया है।

full list of padma awardees 2025: इन 45 'कर्मयोग‍ियों' को सरकार ने द‍िया पद्म सम्‍मान

1. अंके गौड़ा (कर्नाटक)
बस कंडक्टर से ज्ञान संरक्षक बने अंके गौड़ा ने मांड्या में ‘पुस्तक मने’ नामक विशाल निजी पुस्तकालय खड़ा किया, जिसमें 22 भाषाओं की 10 लाख से अधिक पुस्तकें हैं। साहित्य और शिक्षा के लिए सम्मान।

2. डॉ. आर्मिडा फर्नांडीज (महाराष्ट्र)
नवजात शिशु चिकित्सा की अग्रणी विशेषज्ञ। ‘स्नेहा’ संस्था के माध्यम से 30 वर्षों से झुग्गी क्षेत्रों में मातृ-शिशु स्वास्थ्य के लिए कार्यरत। देश का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक स्थापित किया। स्वास्थ्य सेवा के लिए सम्मान।

3. भगवान दास रायकवार (मध्य प्रदेश)
बुंदेलखंड के पारंपरिक ‘राई’ लोकनृत्य के संरक्षक। दशकों तक इस नृत्य को सिखाकर और मंचों पर प्रस्तुत कर इसे जीवित रखा। कला के लिए सम्मान।

4. भिकल्या लडक्या ढिंडा (महाराष्ट्र)
आदिवासी वाद्य ‘तारपा’ के उस्ताद। वारली संस्कृति की पहचान माने जाने वाले इस वाद्य को नई पीढ़ी तक पहुंचाया। कला के लिए सम्मान।

5. बृज लाल भट्ट (जम्मू-कश्मीर)
धुमर और कश्मीरी लोक संगीत के संवाहक। कठिन दौर में भी कश्मीरी पंडित सांस्कृतिक विरासत को संगीत के जरिए संजोए रखा। कला के लिए सम्मान।

6. बुदरी ताती (छत्तीसगढ़)
बस्तर की धोकरा लौह शिल्प कलाकार और औषधीय ज्ञान की संरक्षिका। सैकड़ों आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया। समाज सेवा व कला के लिए सम्मान।

7. चरण हेम्ब्रम (ओडिशा)
संथाली भाषा के लेखक-शिक्षाविद। आदिवासी बच्चों के लिए मातृभाषा आधारित शिक्षा और पाठ्यपुस्तकों का विकास किया। साहित्य व शिक्षा के लिए सम्मान।

8. चिरंजी लाल यादव (उत्तर प्रदेश)
बिरहा लोकगायन के प्रमुख गायक। लोकसंगीत के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को आवाज़ दी। कला के लिए सम्मान।

9. धार्मिकलाल चुन्नीलाल पंड्या (गुजरात)
भवाई लोकनाट्य के 90 वर्षीय संरक्षक। छह दशकों तक समाज सुधार को रंगमंच का माध्यम बनाया। कला के लिए सम्मान।

10. गफरुद्दीन मेवाती जोगी (राजस्थान)
भपंग वाद्य के साधक। मेवाती लोकसंगीत और जोगी परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई। कला के लिए सम्मान।

11. हेली वार (मेघालय)
खासी लोकसंगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संरक्षणकर्ता। पूर्वोत्तर की संगीत परंपरा को जीवित रखा। कला के लिए सम्मान।

12. इंद्रजीत सिंह सिद्धू (पंजाब)
पशु कल्याण के लिए समर्पित समाजसेवी। बीमार और लावारिस पशुओं के लिए आश्रय केंद्र स्थापित किए। समाज सेवा के लिए सम्मान।

13. के. पजनीवेल (पुडुचेरी/तमिलनाडु)
नादस्वरम के प्रख्यात वादक। मंदिर संगीत की परंपरा को गुरु-शिष्य परंपरा से आगे बढ़ाया। कला के लिए सम्मान।

14. कैलाश चंद्र पंत (उत्तराखंड)
कुमाऊंनी भाषा, लोककथाओं और संस्कृति के विद्वान। क्षेत्रीय साहित्य को सम्मान दिलाया। साहित्य व शिक्षा के लिए सम्मान।

15. खेम राज सुंद्रियाल (उत्तराखंड/दिल्ली)
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक। हिमालयी पर्यावरण और पहाड़ी समाज की समस्याओं को राष्ट्रीय मंच पर उठाया। साहित्य/पत्रकारिता के लिए सम्मान।

16. कोल्लाक्कायिल देवकी अम्मा (केरल)
‘वन की मां’ के नाम से प्रसिद्ध। पांच एकड़ भूमि पर घना जंगल विकसित किया। पर्यावरण संरक्षण के लिए सम्मान।

17. कुमारसामी थंगराज (तेलंगाना)
प्रसिद्ध जीनोम वैज्ञानिक। भारतीय जनसंख्या और जनजातियों पर ऐतिहासिक शोध। विज्ञान व इंजीनियरिंग के लिए सम्मान।

18. महेंद्र कुमार मिश्रा (ओडिशा)
आदिवासी लोकगीत और मौखिक परंपराओं के शोधकर्ता। सांस्कृतिक दस्तावेज़ीकरण में अहम योगदान। साहित्य व शिक्षा के लिए सम्मान।

19. मीर हाजीभाई कासमभाई (गुजरात)
कच्छ की बन्नी कढ़ाई के संरक्षक। पारंपरिक हस्तकला को रोज़गार से जोड़ा। कला के लिए सम्मान।

20. मोहन नगर (मध्य प्रदेश)
शिक्षाविद और लेखक। वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा के लिए सतत संघर्ष। साहित्य व शिक्षा के लिए सम्मान।

21. नरेश चंद्र देव वर्मा (त्रिपुरा)
आदिवासी कल्याण और स्वदेशी संस्कृति के संरक्षक। मरणोपरांत समाज सेवा के लिए सम्मान।

22. नीलेश विनोदचंद्र मांडलेवाला (गुजरात)
‘अंगदान दूत’। डोनेट लाइफ अभियान के जरिए हजारों लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित किया। समाज सेवा के लिए सम्मान।

23. नूरुद्दीन अहमद (असम)
मोबाइल थिएटर के स्टेज डिज़ाइनर। बांस और स्थानीय सामग्री से रंगमंच को नया रूप दिया। कला के लिए सम्मान।

24. ओतुवर थिरुथानी स्वामीनाथन (तमिलनाडु)
तेवारम भजनों के पारंपरिक गायक। प्राचीन शैव संगीत परंपरा के संवाहक। कला के लिए सम्मान।

25. पद्मा गुरमेट (लद्दाख)
पारंपरिक पत्थर नक्काशी की विशेषज्ञ। बौद्ध हिमालयी कला का संरक्षण। कला के लिए सम्मान।

26. पोखिला लेखतेपी (असम)
कार्बी जनजाति की लोकगायिका। मौखिक इतिहास को गीतों में संजोया। कला के लिए सम्मान।

27. पुण्यमूर्ति नटेसन (तमिलनाडु)
थप्पट्टम लोकनृत्य के गुरु। दलित लोकसंस्कृति को सम्मानजनक मंच दिया। कला के लिए सम्मान।

28. आर. कृष्णन (तमिलनाडु)
गरीबों को भोजन और लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करने वाले मानवतावादी समाजसेवी। समाज सेवा के लिए सम्मान।

29. रघुपत सिंह (राजस्थान)
जल संरक्षण और जैविक खेती के अग्रदूत। बंजर भूमि को उपजाऊ बनाया। कृषि/समाज सेवा के लिए सम्मान।

30. रघुवीर तुकाराम खेड़कर (महाराष्ट्र)
तमाशा लोकनाट्य के दिग्गज कलाकार। लोककला को नई गरिमा दिलाई। कला के लिए सम्मान।

31. राजस्थपति कालियाप्पा गाउंडर (तमिलनाडु)
गांधीवादी समाजसेवी। ग्रामीण शिक्षा और स्वच्छता के लिए समर्पित। समाज सेवा के लिए सम्मान।

32. रामा रेड्डी मामिड़ी (तेलंगाना)
तेलुगु भाषा आंदोलन के प्रमुख स्तंभ। लोकसंस्कृति और साहित्य को मजबूती दी। साहित्य व शिक्षा के लिए सम्मान।

33. रामचंद्र व सुनीता गोडबोले (महाराष्ट्र)
आदिवासी स्वास्थ्य के लिए समर्पित डॉक्टर दंपति। कुपोषण और बाल मृत्यु दर घटाने में योगदान। समाज सेवा के लिए सम्मान।

34. एस. जी. सुशीलाम्मा (कर्नाटक)
देवदासी प्रथा और महिला उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष करने वाली समाजसेवी। समाज सेवा के लिए सम्मान।

35. संगयुसांग एस. पोंगनर (नागालैंड)
आओ नागा जनजाति के लोकसंगीत और लॉग ड्रम के संरक्षक। कला के लिए सम्मान।

36. शफी शौक (जम्मू-कश्मीर)
कश्मीरी भाषा के विद्वान, कवि और आलोचक। साहित्य को आधुनिक दृष्टि दी। साहित्य व शिक्षा के लिए सम्मान।

37. श्रीरंग देवबा लाड (महाराष्ट्र)
मिट्टी की कुश्ती और लोककलाओं के संवाहक। ग्रामीण खेल संस्कृति को बढ़ावा दिया। कला के लिए सम्मान।

38. श्याम सुंदर (उत्तर प्रदेश)
कालाजार रोग के उन्मूलन में अहम योगदान देने वाले वैज्ञानिक। चिकित्सा सेवा के लिए सम्मान।

39. सिमांचल पात्रो (ओडिशा)
प्रह्लाद नाटक और मुखौटा नृत्य के लोक कलाकार। पारंपरिक शिल्प को जीवित रखा। कला के लिए सम्मान।

40. सुरेश हनागवाड़ी (कर्नाटक)
हीमोफीलिया मरीजों के लिए जीवन समर्पित करने वाले डॉक्टर। कर्नाटक हीमोफीलिया सोसाइटी की स्थापना। चिकित्सा सेवा के लिए सम्मान।

41. तगा राम भील (राजस्थान)
राजस्थानी लोकगायक। रेगिस्तान की आत्मा को संगीत में ढाला। कला के लिए सम्मान।

42. टेची गुबिन (अरुणाचल प्रदेश)
नशामुक्ति और युवा सुधार अभियानों के अग्रणी कार्यकर्ता। समाज सेवा के लिए सम्मान।

43. तिरुवरुर भक्तवत्सलम (तमिलनाडु)
मृदंगम के दिग्गज वादक। तंजावुर शैली के संवाहक। कला के लिए सम्मान।

44. विश्व बंधु (उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड)
स्वच्छता कर्मियों के अधिकारों के लिए संघर्षरत गांधीवादी। समाज सेवा के लिए सम्मान।

45. युमनाम जात्रा सिंह (मणिपुर)
नट संकीर्तन और रासलीला के गुरु। अशांति के दौर में भी सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखा। कला के लिए सम्मान।

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लेखक के बारे में

Dr.Anil Shukla
Dr.Anil Shukla

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com

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