एनीमिया गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती, महिलाओं-बच्चों पर अधिक प्रभाव: स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय

एनीमिया गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती, महिलाओं-बच्चों पर अधिक प्रभाव: स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय

एनीमिया गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती, महिलाओं-बच्चों पर अधिक प्रभाव: स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय
Modified Date: March 26, 2026 / 02:51 pm IST
Published Date: March 26, 2026 2:51 pm IST

पटना, 26 मार्च (भाषा) बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि एनीमिया एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है, जिसका प्रभाव विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों में अधिक देखा जाता है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस रोग के नियंत्रण और उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

पांडेय ने यहां ऊर्जा ऑडिटोरियम में ‘फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज फॉर एनीमिया प्रबंधन’ कार्यक्रम के तहत एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज) थेरेपी योजना की शुरुआत की।

इस अवसर पर राज्य के सभी जिलों से चिन्हित 760 महिलाओं (प्रत्येक जिले से 20) को एफसीएम इंजेक्शन दिया गया।

वर्तमान में राज्य के पास लगभग दो लाख डोज उपलब्ध हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ‘फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज थेरेपी’ गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए त्वरित, सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराएगी, जिससे हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार संभव होगा।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लोगों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि मुफ्त दवा नीति के तहत आवश्यक दवाओं की सूची में समय-समय पर नई औषधियों को शामिल किया जाता है।

पांडेय ने बताया कि इसी क्रम में दिसंबर 2025 में ‘फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज’ को इस सूची में शामिल कर इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

उन्होंने कहा कि बिहार में लगभग 64 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से प्रभावित हैं, जिसे दूर करना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक माह के भीतर इस सेवा को प्रखंड (ब्लॉक) स्तर के अस्पतालों तक उपलब्ध कराया जाए, ताकि लोगों को अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर ही इसका लाभ मिल सके।

मंत्री ने कहा कि यह थेरेपी ‘एनीमिया मुक्त बिहार’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

एनीमिया के कारण विशेषकर गर्भवती महिलाओं में कमजोरी आती है, जिससे नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और ऐसे में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार में यह पहल सहायक सिद्ध होगी।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है और ग्रामीण स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि एनीमिया एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य से कम हो जाता है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

भाषा कैलाश शोभना जितेंद्र

जितेंद्र


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