बिहार: दाल उत्पादन की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में उठा, सरकार ने बढ़ोतरी के उपाय गिनाए

बिहार: दाल उत्पादन की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में उठा, सरकार ने बढ़ोतरी के उपाय गिनाए

बिहार: दाल उत्पादन की भारी कमी का मुद्दा विधानसभा में उठा, सरकार ने बढ़ोतरी के उपाय गिनाए
Modified Date: February 5, 2026 / 07:37 pm IST
Published Date: February 5, 2026 7:37 pm IST

पटना, पांच फरवरी (भाषा) बिहार विधानसभा में बृहस्पतिवार को दालों के उत्पादन में भारी कमी का मुद्दा उठाये जाने पर सरकार ने राज्य में दालों की खेती बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायक अमरेंद्र कुमार ने यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि राज्य के लोगों के लिए प्रोटीन का प्रमुख स्रोत मानी जाने वाली दालों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

उन्होंने पूछा कि राज्य की कुल मांग का केवल 33 प्रतिशत ही उत्पादन हो पा रहा है और प्रति व्यक्ति उत्पादन सालाना लगभग तीन ग्राम है।

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सरकार का पक्ष रखते हुए बताया कि राज्य में 4.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की दालों की खेती की जा रही है, जिससे 3.93 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है।

उन्होंने कहा, “दाल बिहार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण फसल है। उत्पादन बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक और विधियों का उपयोग किया जा रहा है। किसानों को मसूर की खेती के लिए प्रति क्विंटल 2000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, जबकि मूंग को हरित खाद्य फसल के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। दालों के बीज प्रतिस्थापन दर में भी अच्छा सुधार हुआ है।”

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दालों में आत्मनिर्भरता मिशन शुरू किया गया है, जिसके तहत राज्य को 93.75 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने कहा इस राशि का उपयोग बेहतर बीज उत्पादन, खेती के क्षेत्र के विस्तार, प्रसंस्करण और उत्पाद के मूल्य संवर्धन में किया जाएगा।

यादव ने कहा, “हमारा लक्ष्य अगले पांच वर्षों में दाल उत्पादन को दोगुना करना और बिहार को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी।”

बोधगया से राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार से पूछा कि जलजमाव की समस्या को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री ने बताया कि कृषि विभाग जल संसाधन विभाग के साथ मिलकर इस समस्या के समाधान पर काम कर रहा है।

जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने सदन में कहा, “ताल क्षेत्र दाल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां चरणबद्ध तरीके से समेकित विकास योजना शुरू की गई है, जिसके तहत अतिरिक्त पानी को हटाया जा रहा है। कुछ पानी को भूजल पुनर्भरण के लिए संरक्षित किया जा रहा है, जबकि शेष पानी को हरहोर नदी के माध्यम से गंगा में छोड़ा जाएगा। इसके लिए लखीसराय जिले के बलगुदर में बाढ़ रोधी स्लूइस गेट का निर्माण किया जाएगा।”

‘ताल क्षेत्र’ पटना, नालंदा, लखीसराय और शेखपुरा जिलों में फैले एक लाख हेक्टेयर से अधिक निचले इलाके में स्थित है।

विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने भी इस मुद्दे पर कहा कि चालू वित्तीय वर्ष के दौरान केंद्र सरकार के सहयोग से किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दालों की खरीद की योजना शुरू की गई है।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र


लेखक के बारे में