बिहार: संसद में महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी पर घिरे पप्पू यादव, महिला आयोग ने भेजा नोटिस

बिहार: संसद में महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी पर घिरे पप्पू यादव, महिला आयोग ने भेजा नोटिस

बिहार: संसद में महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी पर घिरे पप्पू यादव, महिला आयोग ने भेजा नोटिस
Modified Date: April 21, 2026 / 09:04 pm IST
Published Date: April 21, 2026 9:04 pm IST

पटना, 21 अप्रैल (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संसद में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के मुद्दे को लेकर महिलाओं पर विवादित टिप्पणी करने के लिए पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव की मंगलवार को आलोचना की।

वहीं बिहार राज्य महिला आयोग ने यादव को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है कि क्यों ना उनकी अयोग्यता की सिफारिश करते हुए लोकसभा अध्यक्ष से संपर्क किया जाए।

यादव की महिलाओं को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया।

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘चौंकाने वाला बयान! जब देश नारी शक्ति को आगे बढ़ाने में जुटा है, तब देखिए कांग्रेस समर्थित सांसद क्या कह रहे हैं।’’

सत्तारूढ़ दल के एक अन्य नेता तुहिन सिन्हा ने पोस्ट में यादव के बयान को ‘‘घृणित और शर्मनाक’’ बताया।

उन्होंने कहा, ‘‘पप्पू यादव स्वनिर्मित महिला नेताओं का अपमान कर रहे हैं। क्या प्रियंका गांधी वाद्रा इस आपत्तिजनक महिला-विरोधी नेता को बाहर करेंगी या उनके विचारों का समर्थन करती हैं? घृणित लोग।’’

आयोग की अध्यक्ष अप्सरा ने कहा, ‘‘हमने पूर्णिया सांसद द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लिया है। उनके जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकती है।’’

पप्पू यादव ने सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह और 18वीं सदी के समाज सुधारक राजा राममोहन राय का भी उल्लेख किया, जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया था।

उन्होंने पूछा कि कन्या भ्रूण हत्या और घरेलू हिंसा के लिए कौन जिम्मेदार है। यादव ने कहा, ‘‘महिलाओं पर गिद्ध जैसी नजर किसकी है…? यह नेताओं की है। किसी नेता के कमरे से गुजरे बिना 90 प्रतिशत महिलाएं राजनीति नहीं कर सकतीं। नेताओं के रोज के सीसीटीवी फुटेज में यह देखा जा सकता है। यह एक संस्कृति बन चुकी है।’’

यादव ने दावा किया कि छात्राओं का विद्यालयों व कॉलेजों में शोषण होता है और दफ्तरों में महिलाओं के साथ भी ऐसा ही होता है।

निर्दलीय सांसद ने कहा, ‘‘लोकसभा और विधानसभा महिलाओं को गिद्ध जैसी नजर से देखती है। मैंने सदन में कहा था कि 75 प्रतिशत नेता अश्लील वीडियो देखते हैं। सबके मोबाइल की जांच कर लीजिए। वहां से कुछ मिटता नहीं है। यह व्यवस्था ही सारे कुकर्मों की जड़ है। नेता, बाबाओं, अधिकारियों और पूंजीपतियों की।’’

हालांकि, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने के लिए मालदा गए यादव ने नोटिस की जानकारी मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, ‘‘महिला आयोग कांच के घर में रहकर पत्थर फेंक रहा है। जब मैं जनवरी में पटना में नीट की एक अभ्यर्थी की संदिग्ध यौन उत्पीड़न के बाद मौत को लेकर आंदोलन कर रहा था, तब आयोग कहां था?’’

सांसद ने कहा कि उन्होंने महिलाओं के बारे में कोई अशोभनीय टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने केवल यह तथ्य सामने रखा कि कई महिलाएं उन लोगों द्वारा शोषण का शिकार होती हैं, जिन्हें वे अपना मार्गदर्शक मानती हैं। यह बात नेताओं और धार्मिक गुरुओं पर भी लागू होती है, जिनमें से कई दुष्कर्म के मामलों में नामजद हैं।’’ यादव ने यह भी दावा किया कि उनके पास महिला आयोग की कुछ सदस्याओं की राजनीतिक नेताओं के साथ कथित आपत्तिजनक तस्वीरें हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह नोटिस उल्टा चोर कोतवाल को डांटे जैसी स्थिति है। महिला आयोग पहले उन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करे, जिनका चरित्र ढीला है और जो सार्वजनिक रूप से अश्लील वीडियो देखने के लिए जाने जाते हैं।’’

वायरल वीडियो में यादव दलितों और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (ईबीसी) के लोगों की स्थिति पर भी बोलते सुनाई दिए।

उन्होंने कहा कि एक भी ईबीसी उद्योगपति नहीं है।

यादव ने दावा किया, ‘‘उच्चतम न्यायालय के इतिहास में केवल एक दलित की बेटी न्यायाधीश बनी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे सेना में नहीं हैं, पुलिस में नहीं हैं, यहां तक कि किसी मीडिया चैनल के मालिक भी नहीं हैं… एक भी ईबीसी नहीं, एक भी अनुसूचित जाति-जनजाति नहीं। किसी मठ में एक भी ईबीसी नहीं है, किसी मठ या मंदिर के ट्रस्ट में एक भी दलित नहीं है।’’

यादव ने कहा कि दलितों और ईबीसी के अधिकारों की बात करने वाला कोई नहीं है और महिलाओं की स्थिति में समग्र सुधार की आवश्यकता है।

भाषा कैलाश जितेंद्र

जितेंद्र


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