बिहार के युवा अब तकनीक के क्षेत्र में भी बना रहे पहचान : सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह

बिहार के युवा अब तकनीक के क्षेत्र में भी बना रहे पहचान : सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह

बिहार के युवा अब तकनीक के क्षेत्र में भी बना रहे पहचान : सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्रेयसी सिंह
Modified Date: March 27, 2026 / 01:02 am IST
Published Date: March 27, 2026 1:02 am IST

पटना, 26 मार्च (भाषा) बिहार की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री श्रेयसी सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्य के युवाओं में अपार प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और नवाचार की बड़ी क्षमता है तथा अब वे तकनीक के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अब तक दुनिया बिहार के युवाओं को मुख्य रूप से भारतीय प्रशासनिक और पुलिस सेवा के अधिकारियों के रूप में पहचानती रही है, लेकिन आज राज्य के युवा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

सिंह भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), पटना के बिहटा परिसर में ‘इन्क्यूबेशन सेंटर’ के 10वें स्थापना दिवस समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर आईआईटी पटना इन्क्यूबेशन सेंटर ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना और जॉन्स हॉपकिन्स स्त्री-रोग एवं प्रसूति विज्ञान में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा कार्यक्रम (जेएचपीआईईजीओ) के साथ दो समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

सिंह ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा उद्देश्य केवल स्टार्टअप को बढ़ावा देना ही नहीं है, बल्कि उन्हें विचार से लेकर उत्पाद को उपयोगकर्ताओं तक पहुंचाने तक आवश्यक बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन और सहयोग प्रदान करना भी है।’’

उन्होंने कहा कि आईआईटी पटना जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम राज्य के तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के हर घर तक तकनीकी सुविधाएं पहुंचाने का श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जाता है।

उन्होंने कहा कि बिहार के दरभंगा और भागलपुर में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क भी स्थापित किए गए हैं।

इस अवसर पर आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. टी. एन. सिंह ने कहा कि आईआईटी पटना के प्रयासों से राज्य के चार इंजीनियरिंग कॉलेजों में इन्क्यूबेशन सेंटर संचालित किए जा रहे हैं।

भाषा कैलाश गोला

गोला


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