जल जीवन मिशन-2 के लिए केंद्र-बिहार के बीच एमओयू : मंत्री

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जल जीवन मिशन-2 के लिए केंद्र-बिहार के बीच एमओयू : मंत्री

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 05:24 PM IST,
    Updated On - June 11, 2026 / 05:24 PM IST

पटना, 11 जून (भाषा) बिहार के लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) मंत्री संजय सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि जल जीवन मिशन-2 (जेजेएम-2) के तहत केंद्र सरकार और बिहार सरकार के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके माध्यम से अब तक वंचित रहे क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

यह निर्णय बुधवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में लिया गया।

बिहार सरकार के ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के तहत वर्ष 2016 में शुरू की गई ‘हर घर नल का जल’ योजना के अंतर्गत लक्षित परिवारों में से 90 प्रतिशत से अधिक को नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है। जेजेएम-2 का उद्देश्य शेष परिवारों तक पेयजल सुविधा पहुंचाना तथा जलापूर्ति संरचनाओं के दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव को सुनिश्चित करना है।

सिंह ने कहा, ‘‘लंबे समय से लंबित एमओयू पर जल शक्ति मंत्रालय और बिहार सरकार के बीच जेजेएम-2 के तहत हस्ताक्षर किए गए हैं। इससे ‘हर घर नल का जल’ मिशन के अंतर्गत छूटे हुए क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सकेगा।’’

उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में अब तक जलापूर्ति नहीं पहुंच सकी है अथवा जहां पेयजल आर्सेनिक, फ्लोराइड और लौह तत्व से प्रभावित है, वहां सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार ने केंद्र से 18,894 करोड़ रुपये की मांग की है।

मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल को बताया कि बिहार के लोगों को सुरक्षित पेयजल तभी उपलब्ध कराया जा सकता है, जब केंद्र सरकार का सहयोग मिले। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब बिहार का समग्र विकास होगा और गांवों तथा शहरों की सभी वंचित बस्तियों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचेगा।’’

उन्होंने कहा कि सरकार नवादा और गया जैसे जिलों में (जहां भविष्य में जल संकट की आशंका है) सतही जल आधारित संयंत्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। इसके लिए जमीनी सर्वेक्षण पहले से जारी हैं।

सिंह ने बताया कि एक जून तक राज्य में खराब पड़े 74,000 चापाकलों में से 27,000 की मरम्मत की जा चुकी है। शेष चापाकलों के संबंध में तस्वीरों और स्थानीय लोगों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर सत्यापन की प्रक्रिया जारी है।

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने एक जून को पीएचईडी को निर्देश दिया था कि राज्य के सभी खराब चापाकलों की मरम्मत 15 जून तक सुनिश्चित की जाए।

मंत्री ने कहा कि राज्य जल प्रबंधन एवं आकस्मिकता कोष के तहत विभाग को नौ करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इन राशि से 914 नए चापाकल लगाने का कार्य शुरू कर दिया गया है।

भाषा

कैलाश रवि कांत