सेवा नियमित करने की मांग को लेकर पटना में चतुर्थ श्रेणी के संविदा परिचारकों का प्रदर्शन

सेवा नियमित करने की मांग को लेकर पटना में चतुर्थ श्रेणी के संविदा परिचारकों का प्रदर्शन

सेवा नियमित करने की मांग को लेकर पटना में चतुर्थ श्रेणी के संविदा परिचारकों का प्रदर्शन
Modified Date: September 29, 2026 / 04:25 pm IST
Published Date: September 29, 2026 4:25 pm IST

पटना, 29 सितंबर (भाषा) बिहार में संविदा पर कार्यरत चतुर्थ श्रेणी के परिचारकों ने उनकी सेवा को नियमित करने की मांग को लेकर मंगलवार को पटना में प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर आयोजित एकमुश्त परीक्षा के जरिये चतुर्थ श्रेणी के संविदा परिचारकों की सेवा नियमित की जाए।

पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पटना के गांधी मैदान से मार्च शुरू किया और मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने का प्रयास किया।

उसने बताया कि भारी पुलिस बल की तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शनकारियों को जेपी गोलंबर के पास रोक दिया गया।

गांधी मैदान थाना प्रभारी अखिलेश कुमार मिश्रा ने कहा कि प्रदर्शन जारी है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में है।

प्रदर्शनकारी अविनाश कुमार ने ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, “हम दशकों से काम कर रहे हैं। सरकार या तो हमारे साथ सहानुभूति दिखाते हुए औपचारिक रूप से हमारी नियुक्ति करे या हमें इच्छामृत्यु की अनुमति दे। अगर सरकार अपने रुख पर अड़ी रहती है, तो हम भी यहां से तब तक नहीं हटेंगे, जब तक हमारी मांगें स्वीकार नहीं कर ली जातीं।”

एक अन्य प्रदर्शनकारी बैजू सिंह ने कहा कि यह करीब डेढ़ दशक पुराना मामला है और इसकी शुरुआत बिहार सरकार की वर्ष 2010 की ‘साइकिल चलाओ, नौकरी पाओ’ पहल से हुई थी।

उन्होंने कहा, “जिलास्तरीय भर्ती प्रक्रिया के तहत जिलाधिकारियों के नेतृत्व में कुछ लोगों को पक्षपातपूर्ण तरीके से नौकरी दी गई, जबकि कई लोग संविदा और अस्थायी कर्मचारी के तौर पर काम करते रह गए।”

सिंह ने कहा कि पटना उच्च न्यायालय के वर्ष 2019 के एकमुश्त उपाय संबंधी निर्देश के आधार पर बिहार कर्मचारी चयन आयोग (बीएसएससी) ने 2024 में भर्ती परीक्षा आयोजित की थी, लेकिन इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई।

उन्होंने कहा, “हमारी एकमात्र मांग है कि हमें स्थायी रूप से नियुक्त किया जाए, क्योंकि इस प्रक्रिया में हमने पहले ही दशकों गंवा दिए हैं।”

भाषा

कैलाश पारुल

पारुल


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