गंडक में बाढ़ का खतरा: बगहा में जलस्तर रिकॉर्ड 91.25 मीटर, पश्चिम चंपारण में दो स्थानों पर कटाव

गंडक में बाढ़ का खतरा: बगहा में जलस्तर रिकॉर्ड 91.25 मीटर, पश्चिम चंपारण में दो स्थानों पर कटाव

गंडक में बाढ़ का खतरा: बगहा में जलस्तर रिकॉर्ड 91.25 मीटर, पश्चिम चंपारण में दो स्थानों पर कटाव
Modified Date: September 29, 2026 / 12:43 pm IST
Published Date: September 29, 2026 12:43 pm IST

पटना, 29 सितंबर (भाषा) बिहार में गंडक नदी में बाढ़ का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। नेपाल में भारी बारिश के बाद बगहा में इस नदी का जलस्तर बढ़कर रिकॉर्ड 91.25 मीटर पर पहुंच गया है, जिससे उसके निचले इलाकों में तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

विभाग के अनुसार, पश्चिम चंपारण जिले में गंडक नदी के बाएं किनारे स्थित चंपारण तटबंध के दो हिस्से रात में क्षतिग्रस्त हो गए। इनमें एक बगहा-एक के खैरटवा और दूसरा बैरिया के फुलियाखाड़ में है।

डब्ल्यूआरडी के अधिकारी ने बताया कि नेपाल में गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण वाल्मीकिनगर बैराज से पानी का अत्यधिक प्रवाह हुआ, जिससे नीचे की ओर स्थित तटबंधों पर भारी दबाव पड़ा। पश्चिम चंपारण और आसपास के इलाकों में कई स्थानों पर पानी के तटबंध के ऊपर से बहने और रिसाव आदि की घटनाएं सामने आई हैं।

विभाग के मुताबिक, इस बार वाल्मीकिनगर बैराज से छोड़ा गया पानी वर्ष 2024 में दर्ज अधिकतम 5,62,500 क्यूसेक से थोड़ा कम होने के बावजूद बगहा के गेज स्थल पर नदी का जलस्तर अब तक के उच्चतम स्तर 91.25 मीटर पर पहुंच गया। यह वर्ष 2024 में दर्ज पिछले रिकॉर्ड 90.90 मीटर से 0.35 मीटर अधिक है।

विभाग ने बताया कि अब तक रिसाव और पाइपिंग वाले 169 स्थानों को आपात उपायों के जरिए सुरक्षित किया जा चुका है। तटबंधों पर भारी दबाव के मद्देनजर कार्यपालक अभियंताओं के नेतृत्व में चार दलों को रात में बगहा, बेतिया, मोतिहारी और गोपालगंज भेजा गया।

वाल्मीकिनगर बैराज पर 28 सितंबर को सुबह छह बजे 5,43,500 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया था। पानी का प्रवाह 13 घंटे तक पांच लाख क्यूसेक से अधिक और 32 घंटे तक चार लाख क्यूसेक से अधिक रहा।

विभाग ने कहा कि 2024 में दर्ज 5,62,500 क्यूसेक के अधिकतम प्रवाह की तुलना में इस बार पानी का प्रवाह कम था, लेकिन इसके बावजूद बगहा में नदी का जलस्तर पिछले उच्चतम स्तर से 0.35 मीटर ऊपर पहुंच गया।

बयान के अनुसार, नदी के ऊपरी हिस्से में जलस्तर घट रहा है, जबकि निचले हिस्से में इसके बढ़ने का रुख देखा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रहे हैं।

डब्ल्यूआरडी के अनुसार, मंगलवार सुबह 10 बजे तीन प्रमुख बैराजों पर पानी के प्रवाह में अलग-अलग रुझान देखा गया। वाल्मीकिनगर में गंडक का प्रवाह घट रहा था, जबकि वीरपुर में कोसी का प्रवाह स्थिर रहा और इंद्रपुरी में सोन नदी का प्रवाह बढ़ा।

विभाग ने बताया, “सुबह 10 बजे गंडक बैराज (वाल्मीकिनगर) से 1,86,200 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया, जो सुबह आठ और नौ बजे दर्ज 1,91,200 क्यूसेक से कम है। कोसी बैराज (वीरपुर) पर सुबह 10 बजे प्रवाह 1,20,055 क्यूसेक रहा, जो सुबह नौ बजे के स्तर के बराबर है। वहीं, सोन बैराज (इंद्रपुरी) पर सुबह 10 बजे 1,51,116 क्यूसेक प्रवाह दर्ज किया गया, जो सुबह नौ बजे के 1,48,563 क्यूसेक से अधिक है।”

भाषा कैलाश

मनीषा वैभव

वैभव


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