सीमांचल में पानी में आर्सेनिक-यूरेनियम की मौजूदगी और कैंसर के मामलों पर शोध के लिए कोर ग्रुप गठित

सीमांचल में पानी में आर्सेनिक-यूरेनियम की मौजूदगी और कैंसर के मामलों पर शोध के लिए कोर ग्रुप गठित

सीमांचल में पानी में आर्सेनिक-यूरेनियम की मौजूदगी और कैंसर के मामलों पर शोध के लिए कोर ग्रुप गठित
Modified Date: February 13, 2026 / 04:34 pm IST
Published Date: February 13, 2026 4:34 pm IST

पटना, 13 फरवरी (भाषा) बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने शुक्रवार को कहा कि सीमांचल क्षेत्र में पानी में आर्सेनिक और यूरेनियम की मौजूदगी तथा कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर चिंतित राज्य सरकार ने इस संबंध में शोध कराने के लिए एक कोर ग्रुप का गठन किया है।

यह कोर ग्रुप इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) के राज्य कैंसर केंद्र , एम्स-पटना, मुजफ्फरपुर स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र और महावीर कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान संस्थान के समन्वय से बनाया गया है।

पांडेय ने कहा, “कैंसर के मामलों पर रोक लगाने, समुचित इलाज, दीर्घकालिक प्रबंधन और उपचार सुविधाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से बिहार कैंसर केयर एंड रिसर्च सोसायटी भी स्थापित की गई है। हम स्क्रीनिंग, प्रारंभिक जांच और जन-जागरूकता पर भी जोर दे रहे हैं।”

वह विधानसभा में सीमांचल के अररिया, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज और सुपौल जिलों में कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर विधायक और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे।

इमान ने कहा कि केंद्रीय भूजल बोर्ड ने सीमांचल जिलों से 634 नमूनों की जांच की, जिनमें लौह की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई।

उन्होंने यह भी बताया कि मैनचेस्टर विश्वविद्यालय, महावीर कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र और राष्ट्रीय औषधि शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान के संयुक्त अध्ययन में 35 महिलाओं और स्तनपान करने वाले उनके शिशुओं के नमूनों में से 70 प्रतिशत शिशुओं में यूरेनियम का उच्च स्तर पाया गया।”

इमान ने क्षेत्र के लोगों को पानी में मौजूद भारी तत्वों के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए एक शोध संस्थान और अस्पताल बनाने की भी मांग की।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सीमांचल के सभी जिलों में कैंसर स्क्रीनिंग, डे-केयर सेंटर, पेलिएटिव केयर, बायोप्सी और कीमोथेरेपी की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

उन्होंने कहा, “मरीजों को मुफ्त जांच, परामर्श और दवाएं दी जा रही हैं।”

कैंसर संबंधी आंकड़े साझा करते हुए पांडेय ने कहा कि अक्टूबर 2022 से जनवरी 2026 के बीच अररिया, कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया और सुपौल जिलों में 5.81 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई।

उन्होंने कहा कि इनमें से 3.9 लाख की मुख कैंसर, 1.6 लाख की स्तन कैंसर और 28,136 की सर्वाइकल कैंसर की जांच हुई।

मंत्री ने कहा कि स्क्रीनिंग के दौरान कुल 646 पुष्ट मामले सामने आए।

उन्होंने बताया कि सीमांचल जिलों में 3,575 कैंसर मरीजों को विभिन्न प्रकार की डे-केयर प्रक्रियाएं और कीमोथेरेपी दी जा रही है।

पांडेय ने कहा, “2020 से 2026 के बीच आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पांच जिलों में 22,217 कैंसर मरीजों के इलाज पर 58.10 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा, जनवरी 2020 से दिसंबर 2025 के बीच मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष से 9,648 कैंसर मरीजों के लिए 65.40 करोड़ रुपये जारी किए गए।”

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राज्य के सभी 38 जिलों में कैंसर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पानी में आर्सेनिक और यूरेनियम की समस्या का समाधान लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का कार्य है और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।

भाषा कैलाश

जोहेब

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